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अख़बार बांटने वाले की लडकी कल्याणी चव्हाण ने डॉक्टरी पास कर परिवार का किया कल्याण

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रिपोर्ट : के .रवि ( दादा )।‌हम दुनिया वालो ने वैसे हव तो कई ऐसी कहानियां सुनी के एक आम इंसान जीरो से हीरो बना या एक गरीब घर की बेटी ने आईएएस बनकर परिवार और देश का नाम रोशन किया . वगैरा वगैरा . ठिक उसी तर्ज पर महाराष्ट्र के बिड जिला के नामी धोंडिपुरा पूरा में सुदाम चव्हाण नामक 15 वी तक का एक युवा संतोष बुक स्टॉल में अख़बार बेचकर अपने परिवार के साथ खुद भी पेट पाल लेता था . साइकल पर अखबारों का बोझा लाद कर घर घर जाकर सुदाम चव्हाण बांटता था .
पर वक़्त के चलते सुदाम ने खुद के अख़बार की एजंसी शुरू कर मशहूर अख़बार दिव्या मराठी में संवाददाता के रूप में काम करना शुरू किया . वक़्त इतना आगे बढ़ चुका था के देखते ही देखते सुदाम चव्हाण की दोनो बेटियां कब बडी हुई और पढ़ाई के चरम पूरे कर कब चिकस्तकी दुनियां की बढ़ोत्तरी की और कदम रखाच उन्हें पता ही नहीं चला .प्र यह सब सुदाम चव्हाण की कड़ी मेहनत का ही फल था के उनकी बड़ी बेटी कल्याणी ने इतनी गरीबी में भी डॉक्टरी पास की और छोटी बेटी एमबिबीएस की पढाई कर रही है . खास कर इसमें यह सोचने वाली बात हैं के जो लोग अख़बार में पत्रकार के भांति नौकरी कर रहे है उन्हें पिछले 10 सालो से शी मायने में बराबर तनख्वाह नहीं मिला .जिस कारण पत्रकारों को इस बैनर से उस बैनर में भी काम करना पड़ता है .उस हालत मेभी जंहा डॉक्टरी पढ़ाने के लिए लाखो रूपए लगते हैं .वहीं कड़ी मेहनत लगन से एक अख़बार बेचने वाले पत्रकार की लडकी डॉक्टरी पास करती हैं यह इस इक्कीसवीं महंगी सदी में भी एक सराहनीय क़दम हैं .

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