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अग्नि और पानी के बीच झुलस रहा मुक्तिधाम

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मुक्तिधाम भी मुक्त नहीं है भ्रष्टाचार की मार से, प्रस्तावित टीनसेड भी नही बचा डकार से

मुक्तिधाम भी झेले जा रहा गरीबी, यह हैं जिंदा इंसानों की मुर्दा करतूतें

हटा/मड़ियादो। दमोह जिले की हटा जनपद अंतर्गत आने वाला ग्राम मडियादो लगातार जनसंख्या के लिहाज से विकास कर रहा है और यह क्षेत्र अपने आप में आसपास के क्षेत्रों से बहुत विस्तृत होता चला जा रहा है। जिसके साथ-साथ जन्म और मृत्यु का सिलसिला भी बढ़ रहा है। ऐसे में जो लोग शवदाह के लिए मुक्तिधाम की शरण में जाते हैं। वहां पर शवदाह गृह का होना स्वाभाविक है। परंतु इतने बड़े कस्बे में दो जगह शवदाह गृह निर्मित है और जिसमे से एक मिडिल स्कूल से आगे स्थित मुक्तिधाम है और दूसरा मुक्तिधाम रजपुरा रोड पर कंचन नाला के उस पार स्थित है। मिडिल स्कूल के पास वाले मुक्तिधाम में शवदाह पर बीते कुछ वर्ष पहले टीनशेड निर्माण प्रस्तावित किया गया था। जिसकी मंजूरी के बाद भ्रष्टाचारियों ने अपने भ्रष्टाचारी रवैया के चलते मुक्तिधाम के नाम से निकाली जाने वाली सरकारी राशि भी हजम कर ली। उनके माथे पर शिकन भी नहीं आई। सोचने का सवाल ही पैदा नहीं होता कि यह राशि मुक्तिधाम जैसे नेक कार्य की है। जिसे नव निर्माण या सुविधा के लिए लगाया जा सके। गौरतलब है मुक्तिधाम में जो टीनशेड निर्माण होना था वह आज तक नहीं हो पाया है लेकिन यह निर्माण कार्य कागजो पर बना दिया गया है और बजट में आई हुई सरकारी राशि हजम कर ली गयी है। दोनो मुक्तिधाम की स्थिति तो यह भी है कि जो शवदाह के नाम से बनाए हुए पंडाल हैं या तो उनके चद्दर उड़े हुए हैं या उनकी स्थिति बहुत ही डामाडोल है। बहरहाल स्थिति इतनी बुरी है की धूप में नीचे ना तो छाया होती है और ना ही बारिश का पानी उस स्थान को ठीक से ढक ही पाता है। जिम्मेदार लोगों ने यह भी नहीं सोचा कि इसकी देखरेख समय-समय पर कैसे की जानी चाहिए और यदि वहां पर टीन चद्दर नहीं दिखे तो उस पर क्या कार्यवाही की जाना उचित है। अब आप सोचिए कि मरने की स्थिति के बाद यदि असुविधा रहती है तब जिंदगी जीने की होड़ में सुविधाओं के संघर्ष कितने जटिल होंगे। जिंदगी जहां जीने का इंतजार कर रही है। वही मुक्तिधाम भी हर एक शव के बाद दूसरी शव का इंतजार करता है और अब यह आलम है कि शमशान भी अब गरीबी का दंश झेलने को मजबूर हो गया है। न तो वहां टीन शेड लगे है और न ही यहां कोई धूप बारिश से बचने के इंतजाम भी पुख्ता है। अब यह सोचिए कि शमशान भी लोगों के किस काम का जब शवदाह का भी इंतजाम नही। उस परिवार का क्या होता होगा जिस परिवार का मृत व्यक्ति शमशान तक जाता है चार कंधों पर और शमशान पहुंचते ही या तो बहुत तेज धूप होती है। तब टीन सेड की जरूरत होती है या फिर जरूरत तब होती है टीनशैड की जब मुखाग्नि दी जाने वाली होती है और तभी तेज बारिश हो जाए। यह कोई कल्पना नहीं यह एक हकीकत घटना है जो हाल ही के दिन में दमोह जिले शीशपुर गाँव घटित हुई है। जब शवयात्रा मुक्तिधाम में पहुंचती है जैसे ही मुखाग्नि दी जानी होती है बहुत तेज बारिश होने लगती है। ऐसे में आनन-फानन में बड़ी भारी पॉलीथिन का इंतजाम किया जाता है और वही चार लोग जो कंधों पर शव को लाए थे। वही लोग बारिश की तेज बूंदों से मुखाग्नि वाले शरीर को ढ्कते है, ताकि बारिश की बूंदे जलते हुए शव को भिगो ना सके। यह वाक्या कितना शर्मसार करने वाला है उन जिम्मेदार लोगों के प्रति जो यह मुक्तिधाम के निर्माण की नीव रखते हैं या उसकी सुरक्षा के इंतजाम उन पर होते हैं। अब आप सोचिए कि जब एक गरीब को जिंदगी भर तिल तिल रोना पड़ता है क्या उसका हक यह भी नहीं बनता कि शमशान का सुख यानी मुखाग्नि भी उसे बड़े सुकून से मिले। ठीक ऐसे ही न जाने किस-किस जगह के मामले होंगे परंतु आज ग्राम पंचायत मडियादो की स्थिति भी कुछ ऐसे ही है जहां पर कुछ टीन शेड हैं जिनके या तो टीन उड़ गए हैं और जिनके टीनशेड केवल कागजों पर ही बने हुए हैं ना तो उनकी रकम का पता और ना ही वहां के शवदाह गृह की संरचना का पता। ऐसे में प्रशासन कितना सक्रिय होता है या हम यह अंदाजा लगाएं कि क्या अब वह और लोगों के मरने का इंतजार करते हैं। जिन्हें शमशान के अंतिम सुख भी नसीब ना हो या इस पर जिम्मेदारी का कार्य करते है।
हालांकि मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दमोह ने शीशपुर ग्राम के मामले को देख, दो दिन में ही शमशान घाट पर मुक्तिधाम की वर्तमान स्थिति के लिए कार्य को आगे बढ़ाने के आदेश दे दिए हैं पर
अब जरूरत यह है कि सारे रिकॉर्ड्स निकाले जाएं। जिन पर श्मशान घाट के नाम से तयशुदा राशि कितनी मंजूर हुई? क्या उतने का कार्य हुआ है? और किसे ठेका दिया गया और कितना कार्य संपन्न हुआ है? यदि कार्य नही हुआ है तो उसे पूर्ण कराया जाए और यदि कोई धांधली या भ्रष्टाचार हुआ है तो उसे सामने लाया जाए, वर्ना मुक्तिधाम से कभी इंसान मुक्ति नही प्राप्त कर पायेगा। भ्रष्टाचारियों के नाम से गरीब की आत्मा हमेशा कोसती रहेगी। जरूरत है ऐसे कार्यों को बाहर लाने की, जिसमे भ्रष्टाचारी ऐसे कार्यों में रकम को डकार जाते हैं और सालों साल उस राशि का लेखा-जोखा ना तो बताते हैं और ना ही उस पर अपनी प्रतिक्रिया जताते हैं। उम्मीद है कि मिडिल स्कूल के पास वाले मुक्तिधाम शवदाह में टीनशेड का कार्य जल्द से जल्द शुरू हो व पूर्व से निर्मित दोनो मुक्तिधाम की मरम्मत और देखरेख का कार्य भी तत्काल हो। ऐसे कार्यों में जरा सी भी देर नही होनी चाहिए। इस सम्बंध में ग्राम पंचायत मड़ियादो सचिव स्वदेश त्रिपाठी को लगातार फोन लगाया तो उन्होंने फोन रिसीव नही किया। जिन्होंने पूर्व की तरह इस बार भी फ़ोन उठाना उचित नही समझा।

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