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अतरैला समेत त्योंथर डिवीज़न के बदले सैकड़ों ट्रांसफॉर्मर

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विभाग का रोना नही भरा था बिल इसलिए हुई देरी, यदि अतरैला की बात करें तो अभी भी 5 लाख 50 हज़ार में मात्र 40 हज़ार जमा पर बदला गया ट्रांसफॉर्मर

 रीवा। त्योंथर डिवीजन में कुछ सप्ताह पूर्व सैकड़ों जले हुए ट्रांसफार्मर के विषय में मीडिया में खबर प्रकाशित हुई थी। यह सिलसिला ऐसा था जब डिवीजन के 7 विद्युत वितरण केंद्रों में जले हुए ट्रांसफार्मर बदलने को लेकर लगातार न्यूज़ चली। इस विषय में एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी के द्वारा उच्चाधिकारियों को सूचित किया गया और साथ में त्योंथर डिवीजन के कार्यपालन अभियंता श्री पंचराज तिवारी को भी कई बार अवगत कराया गया। इसके बाद ट्रांसफार्मर बदलने में काफी तेजी आई और पिछले ही कुछ सप्ताह में सैकड़ों ट्रांसफार्मर भी बदल दिए गए। यद्यपि देखा जाए तो त्योंथर डिवीजन नहर से जुड़े हुए होने के कारण और साथ में धान की खेती की बाहुल्यता के चलते मोटर पंप का काफी तेजी से उपयोग होता है जिसकी वजह से ओवरलोड होने के कारण ट्रांसफार्मर जलना एक आम बात हो गई है। ट्रांसफार्मर भी बदलते रहते हैं लेकिन कई बार विभाग बिजली बिल की बात कहकर ट्रांसफार्मर बदलने में आनाकानी करता है। 

जले ट्रांसफार्मर बदलने का क्या है सरकारी नियम?

यदि वर्तमान में देखा जाए तो सरकारी नियम के अनुसार कुल बकाया का दस प्रतिशत बिल जमा किया जाए अथवा उपभोक्ताओं का 50 प्रतिशत उपभोक्ता यदि बिल भर रहे हैं तो ट्रांसफार्मर बदल दिया जाता है। लेकिन कई बार ट्रांसफार्मर बदलने में विभाग भी लापरवाही करता है जिसका नतीजा यह होता है कि गेहूं के साथ घुन भी पिस जाता है अर्थात जो लोग नियमित तौर पर बिजली बिल का भुगतान कर रहे हैं उन्हें भी महीनों इंतजार करना पड़ता है। यह एक निश्चित ही समस्या का विषय है जिसके बारे में विभाग को कई बार अवगत कराया गया है।

बिजली विभाग बना राजनीति का केंद्रबिंदु

निश्चित तौर पर राजनीतिक लाभ लेने के लिए सरकारें समय-समय पर बिजली बिल माफ कर देती है जिसकी वजह से बिजली का बिल भुगतान करने वाले उपभोक्ता भी उम्मीद लगाए बैठे रहते हैं की उनका बिजली का बिल माफ हो जाएगा इसलिए समय पर बिजली बिल भुगतान नहीं करते जिसका नतीजा यह हो जाता है एरियर बढ़ता जाता है और बिजली बिल पेंडिंग होने की वजह से ट्रांसफार्मर बदलने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है।

अतरैला का 100 केवीए का ट्रांसफार्मर मंगलवार को बदला गया

त्योंथर डिवीजन के जवा अंतर्गत आने वाले लालगांव विद्युत वितरण केंद्र में अतरैला ग्राम के 100 केवीए के ट्रांसफार्मर को मंगलवार शाम को बदल दिया गया। ज्ञातव्य है कि इस विषय में ग्रामीणों ने कई बार एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी के समक्ष अपनी पीड़ा व्यक्त की थी जिसको लेकर एक्टिविस्ट ने कार्यपालन अभियंता समेत जबलपुर डिस्कॉम में मुद्दा उठाया था जिसके चलते न केवल अतरैला का ट्रांसफार्मर बदला गया बल्कि त्योंथर विद्युत डिवीजन में सैकड़ों ट्रांसफार्मर बदल दिए गए। इस विषय में एक्टिविस्ट द्वारा उपभोक्ताओं से अपील भी की गई है कि वह समय समय पर बिजली बिल का भुगतान करते रहे जिसकी वजह से एरियर न बढ़े और जब कभी ट्रांसफार्मर कतिपय कारणों से जल जाए तो बदलने में दिक्कत का सामना ना करना पड़े।

नियम को ताक में रखकर ट्रांसफार्मर बदलना बिजली विभाग के लिए बड़ी मजबूरी

जब बात बिजली विभाग की आती है तो दोनों पक्षों को देखना अनिवार्य है। कोरोना काल में हाल यह है कि बिजली विभाग ने अपने कर्मचारियों के ऊपर दबाव बनाकर भी रखा है कि वह ज्यादा से ज्यादा बिजली बिल का भुगतान करवाएं वरना उनकी पेमेंट नहीं दी जाएगी। इस विषय में कई विद्युत डिवीजन में कार्यवाही अभी हो रही है जिसके चलते अधिकारियों और कर्मचारियों की पेमेंट रुकी हुई है। अब सवाल यह है कि एक तरफ जनता को निर्बाध विद्युत आपूर्ति भी चाहिए और दूसरी तरफ विभाग अपने ही कर्मचारियों के ऊपर अनैतिक दबाव बनाकर उनकी पेमेंट रोक रहा है तो इसका क्या रास्ता है?

बकाया का मात्र 10 प्रतिशत राशि जमा कर उपभोक्ता बिजली विभाग का करें सहयोग

 स्वाभाविक है यदि बिजली बिल नहीं जमा किया जाएगा तो विभाग बिभाग घाटे में जाएगा और यह सभी को पता है कि आज सरकार के पास इतना पैसा नहीं है और पूरा मध्य प्रदेश सरकार ही कर्ज पर चल रही है। तो एक तरफ जहां आम जनता और किसान भी आर्थिक किल्लत का सामना कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ विभाग के पास भी पैसा न होने की वजह से दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में मात्र कुल बिजली बिल का बकाया राशि का दस प्रतिशत जमा कर ट्रांसफार्मर बदलवाने की प्रक्रिया गलत नहीं कही जा सकती है और इसमें निश्चित तौर पर उपभोक्ताओं को विभाग के सहयोग की आवश्यकता है।

क्या कह रहे हैं जिम्मेदार अधिकारी

1- “जब इस विषय में त्योंथर डिवीजन के कार्यपालन अभियंता पंचराज तिवारी से बात की गई तो उन्होंने बताया की एरियर्स बकाया होने की वजह से काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है और उपभोक्ता हमारा सहयोग नहीं कर रहे हैं जिसकी वजह से उच्चाधिकारियों का दबाव रहता है और हम चाहते हुए भी ट्रांसफार्मर नहीं बदल पाते। हम उपभोक्ताओं से अपील करेंगे कि वह मात्र कुल बकाया का 10 प्रतिशत भी भी जमा कर दें तो हमें ट्रांसफार्मर बदलने में कोई दिक्कत नहीं होगी। विभागीय तौर पर मैं यह कहूंगा कि उपभोक्ता ज्यादा से ज्यादा बिल जमा करें तो वह हम सबके लिए बेहतर होगा क्योंकि हमारी पेमेंट भी इसी पैसे से बनाई जाती है।”- डीई त्योंथर पंचराज तिवारी

2- “हमें कई माह से पेमेंट नहीं मिली है और विभाग कहता है की बकाया बिजली बिल वसूली की जाए। हम जब उपभोक्ताओं के बीच में जाते हैं तो हमें बिजली बिल नहीं मिलता। अब हम क्या करें स्वाभाविक है ऐसे में हमें भी काम करना बंद करना पड़ेगा।” जेई संजय गुप्ता, लालगांव डीसी

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