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अब जनहितार्थ व्यंकट मार्ग का चौड़ीकरण हुआ जरुरी

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व्यापारियों का विरोध नजरअंदाज कर लेना होगा फैसला
रीवा। बदलते वक्त के साथ ही यदि तमाम व्यवस्थाएं अपग्रेड होती रहें तो आम जनता को बहुत ज्यादा परेशानी का सामना न करना पड़े। संभागीय मुख्यालय रीवा में शहर के मध्य से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग के अलावा एक सालों पुराना व्यंकट मार्ग है। समय के साथ घर घर में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती गई जिससे भारी यातायात दबाव सडक पर आ गया, पहले से ही संकरे व्यंकट मार्ग में अब पैदल चलना लोगों के लिए खतरनाक साबित होता है। संभागीय मुख्यालय रीवा के हृदय स्थल पर स्टेच्यू चौराहा स्थित है। इसे घोड़ा चौराहा भी पुकारा जाता है। यह पूरा चौराहा ही यहां आने वाले लोगों के लिए चुनौती पूर्ण रहता है। काले घोड़े पर सवार रीवा रियासत के तत्कालीन महाराजा की प्रतिमा शहर की खास पहचान बन गई है। स्टेच्यू चौराहे पर छुटभैये दुकानदारों के साथ साथ दो दर्जन से अधिक ठेला वालों की अवैध मौजूदगी सुचारू यातायात व्यवस्था की राह सबसे बड़ी समस्या बन गई है। अति महत्वपूर्ण चौराहे पर अवैध कब्जा रीवा नगर निगम के बेलगाम अफसरशाही का परिणाम है। पैसे लेकर चौराहों और तिराहों पर अवैध रुप से अतिक्रमण कारियो को बसाया गया है। स्टेच्यू चौराहे से जयस्तंभ चौक तक जाने वाले व्यंकट मार्ग की बदहाली का सिलसिला सूरज निकलते ही नजर आने लगता है। दिन बढ़ने के साथ ही इस अति महत्वपूर्ण व्यंकट मार्ग पर यातायात घसीटने के लिए मजबूर हो जाता है। दोपहर के समय सबसे अधिक यातायात व्यवस्था चौपट नजर आने लगती है। संभागीय मुख्यालय में जनहितार्थ व्यंकट मार्ग का चौड़ीकरण अत्यंत आवश्यक हो गया है। इस चौड़ीकरण का विरोध स्थानीय व्यापारियों ने मिलकर किया था। राजनैतिक लाभ को दूर रखते हुए रीवा को विकास का माडल बनाने के लिए व्यंकट मार्ग का चौड़ीकरण किया जाना आवश्यक हो गया है।

सर्वे शुरू होते व्यापारियों का विरोध और फाइल हुई बंद
नगर निगम से जुड़े सूत्रों ने बताया कि शहर विकास की परिकल्पना साकार करने के लिए कुछ सालों पहले तत्कालीन अधिकारियों ने संभागीय मुख्यालय रीवा में स्टेच्यू चौराहे से जयस्तंभ चौक तक व्यंकट मार्ग में दोनों तरफ सर्वे करते हुए चिन्हांकन किया गया था। इसी सर्वे के दौरान स्थानीय व्यापारियों ने एक साथ मिलकर सड़क चौड़ीकरण का विरोध खुलकर किया। जब विरोध का असर बढ़ने लगा तभी अमहिया दरबार से पूरी प्रक्रिया रोकने का फरमान जारी कर दिया गया। अंततः तत्कालीन नगर निगम के अधिकारियों ने व्यंकट मार्ग चौड़ीकरण के अति महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट वाली फाइल को हमेशा के लिए बंद कर दिया। आम जनता का हित सोचकर अब शहर विकास करने की आवश्यकता है। व्यंकट मार्ग में दोनों तरफ काबिज लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है।

विकास पुरुष के कंधों पर डेवलपमेंट का पूरा दारोमदार
मध्य प्रदेश के रीवा शहर को विकास रुपी सांचे में ढालने का काम भाजपा सरकार ने किया है। पिछले पंद्रह सालों में बहुत से विकास रुपी प्रोजेक्ट रीवा शहर में शुरू करवाए गए हैं। हां यह जरुर है कि बड़े विकास रुपी प्रोजेक्ट का दारोमदार जिन प्राईवेट एजेंसियों को सौंपा गया है, उन्होंने ही विकास को भयावह रुप रीवा शहर में प्रदान किया है। बुनियादी रुप से संभागीय मुख्यालय रीवा को विकसित करने की समझ रखने वाले मध्य प्रदेश शासन के पूर्व मंत्री और रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ल को विकास पुरुष की संज्ञा दी गई है। समय के साथ जमीनी स्तर पर व्यंकट मार्ग का चौड़ीकरण अति आवश्यक हो गया है। अब तक राजनैतिक स्वार्थ के कारण ही सड़क चौड़ीकरण कार्य पर प्रश्नचिन्ह लगा हुआ है। जनहितार्थ अक्सर काम करना जनप्रतिनिधि की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। ऐसी दशा में पूर्व मंत्री और रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ल को काफी सुझबुझ के साथ नासूर जैसी व्यंकट मार्ग पर मौजूद समस्या का समाधान हमेशा के लिए करना होगा। जनहितार्थ कड़ा क़दम उठाने की आवश्यकता है। बुद्धिजीवियों का मानना है कि व्यंकट मार्ग चौड़ीकरण समय की मांग है और इसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। विकास पुरुष के अलावा यह जनहित वाला काम कोई दूसरा नहीं कर सकता।

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