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आर्थिक विषमताओं में कार्य करने को मजबूर पंचायत सचिव।

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मध्य प्रदेश पंचायत सचिव संगठन ने शासन को सौंपा ज्ञापन।

जबलपुर। मध्य प्रदेश की कुल 23000 पंचायतों में कार्यरत पंचायत सचिव विगत 25 वर्षों से लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं लेकिन इसके बावजूद सौतेले पन का शिकार हो रहे हैं। यह कहना है पंचायत सचिवों की ओर से मध्य प्रदेश पंचायत सचिव संगठन की जबलपुर जिला इकाई का।

पंचायत सचिवों को अब तक केवल छठवां वेतनमान दिया गया है जबकि सभी जगह सातवां वेतनमान लागू किया जा चुका है। पंचायत सचिव शासन और आम जनता के बीच कार्यरत व्यवस्था में रीढ़ की हड्डी की तरह काम करता है। सभी प्रशासनिक योजनाओं से संबंध सर्वे के कार्य हो या योजनाओं का लाभ घर-घर तक पहुंचाना हो गांवों के विकास की रूपरेखा तैयार कर उनका क्रियान्वयन करना हो या इसी तरह के अन्य प्रशासनिक कार्यों को पंचायत सचिव बड़े ही जिम्मेदारी और निष्ठा के साथ पूरा करते हैं। ऐसी स्थिति में यदि उनके प्रति शासन उपेक्षा पूर्ण व्यवहार करें तो आवाज उठाना जरूरी हो जाता है। इस आशय का ज्ञापन मध्य प्रदेश पंचायत सचिव संगठन ने जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय की डिप्टी कलेक्टर दीपा गुप्ता को सौंपा। इसी आशय का ज्ञापन जिला पंचायत कार्यालय के सीओ और तहसील कार्यालय में भी ज्ञापन सौंपा गया। डिप्टी कलेक्टर महोदय को ज्ञापन सौंपते हुए जिला अध्यक्ष राजेंद्र पटेल ने ज्ञापन के विषय में बताया कि किस प्रकार की विषम परिस्थितियों में सचिव काम कर रहे हैं और प्रशासन से उन्हें जल्द ही राहत मिली चाहिए। संगठन की तरफ से संभागीय प्रवक्ता योगेश पटेल ने भी मीडिया से बात करते हुए कहा की सरकार सचिवों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। जबकि सरकार और जनता के बीच सभी योजनाओं के क्रियान्वयन में सचिव की अहम भूमिका होती है। प्रशासन की तरफ से डिप्टी कलेक्टर महोदय ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि उन्होंने पंचायत सचिवों की समस्याओं को सुना है और इसे वह प्रशासन के समक्ष रखेंगे इसके ऊपर अधिकारिक रूप से निर्णय लेने का अधिकार प्रशासन को ही है।
संगठन की तरफ से मनोज तिवारी ने भी अपनी बात मीडिया के माध्यम से अधिकारियों और जनता के समक्ष रखी। इस अवसर पर संगठन की तरफ से अंबिका पटेल, धनेश शुक्ला, अरुण पटेल, अनिल चौबे, अनंत शुक्ला, राजेंद्र प्रधान और उनके साथ बड़ी संख्या में संगठन के पदाधिकारी और सदस्य गण मौजूद रहे।

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