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एक दिवसीय लॉक डाउन है जरूरी

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एक देश एक छुट्टी एक संडे होनी चाहिए

 मध्यप्रदेश शासन के गृह मंत्रालय के अनुसार अगस्त माह से रविवार के दिन लगने वाला एक दिन का लॉक डाउन समाप्त करने का आदेश समस्त जिला कलेक्टर  एवं दंडाधिकारियो जारी हुआ। यह यह आदेश संपूर्ण मध्यप्रदेश में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। आगामी पढ़ने वाले प्रत्येक रविवार अब पहले के अनुसार चालू रहेंगे। विश्व महामारी कोविड करोना वायरस के प्रभाव को रोकने के लिए पूर्व में पूरा लाख डाउन लगा था। फिर लॉकडाउन के नियमों में अनेकों बार बदलाव हुए अब एक दिन का प्रदेश में लगने वाला लॉकडाउन भी शासन के द्वारा समाप्त कर दिया गया है। मध्य प्रदेश के सैकड़ों छोटे बड़े शहरों में बाजार और व्यापारिक प्रतिष्ठान सप्ताह के अलग-अलग दिनों में एक दिन के लिए बंद रहते ही थे। परंतु कुछ बड़े महानगरों में भिन्न-भिन्न दिन शहर के बाजार और प्रतिष्ठान बंद रहते हैं। अर्थात एक ही शहर में सप्ताह के अलग-अलग दिन अलग-अलग क्षेत्रों में बाजार बंद रहते थे। परंतु जब से करोना वायरस का कहर संपूर्ण विश्व सहित भारत में पड़ा है तभी से भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में करोना वायरस की रोकथाम के लिए सभी प्रदेशों और जिला दंडाधिकारी कलेक्टरों के द्वारा अलग अलग तरीके से नागरिकों को सामूहिक रूप से एकत्रित न होने देने के लिए का प्रावधान किया गया। इसी तारतम्य में मध्य प्रदेश में संपूर्ण छोटे बड़े शहरों में रविवार के दिन एक दिवसीय लाकडाउन प्रभावित था। परंतु अब यह आदेश सामूहिक रूप से निरस्त कर दिया गया है। संस्कारधानी जबलपुर शहर में भी आज के बाद से रविवार एक दिवसीय लॉकडाउन नहीं रहेगा। अर्थात संपूर्ण बाजार रविवार के दिन भी खुला रहेगा आर्थिक गतिविधियों के साथ आवागमन भी सुचारू रूप से चलेगा। परंतु अब एक बहुत बड़ी व्यापारिक समस्या उन्हें सामने आने वाली है क्या जबलपुर शहर के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में सप्ताह के भिन्न-भिन्न दिनों का साप्ताहिक बाजार बंद रहने का पुराना तरीका फिर से चालू हो जाएगा। सरल शब्दों में कहें जैसे जबलपुर मध्य प्रमुख बड़ा फाव्वारा क्षेत्र दिन मंगलवार, कैंटोंमेंट सदर क्षेत्र दिन सोमवार, गोरखपुर का क्षेत्र बुधवार को साप्ताहिक बाजार और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहते थे। क्या अब यह पुनः  पुराना तरीका चालू हो जावेगा।

एक दिवसीय, रविवार के दिन लगने वाले लॉकडाउन के संदर्भ में कुछ व्यापारियों कन्हैया इलेक्ट्रिकल के संचालक कन्हैया कोष्टा, मोनू बर्तन भंडार के संचालक मोनू बर्मन, वंदना साड़ी के संचालक धर्मेंद्र चौहान, जेपीएस कलेक्शन के संचालक जितेंद्र सोनी, अभिनेत्री सौंदर्य प्रसाधन के संचालक ऋषि कोरी आदि अन्य से चर्चा हुई और उन्होंने अपनी वास्तविक स्थिति को बतलाते हुए जानकारी दी की करोना काल के बाद से खुले बाजारों में तेजी नहीं है। सभी व्यापार काम धंधे ढप होने की कगार पर हैं। इस मंदी के दौर में एक दिन का लॉक डाउन शारीरिक और मानसिक रूप से लाभदायक साबित हो रहा था। हम सभी लोग रविवार के दिन का इंतजार करते थे। और एक मन में निश्चिंत भावना यह होती थी कि रविवार के दिन मेरी दुकान बंद है और शहर की सभी दुकानें बंद हैं। अर्थात मेरी दुकान का ग्राहक कहीं और नहीं जा सकता। कुछ व्यापारियों का यह भी मानना है कि “एक देश एक छुट्टी एक रविवार होनी चाहिए”। शासकीय कर्मचारी और अधिकारियों का तो एक दिन अवकाश सुनिश्चित ही रहता है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों का सप्ताह में दो दिन अवकाश निर्धारित है। परंतु व्यापारी वर्ग के लिए भी एकसाथ छुट्टी एक संडे अनिवार्य होना चाहिए।

शनिवार के बाद और सोमवार से पूर्व आता है। यह रवि से आया है जिसका अर्थ सूर्य होता है। पंचांग के अनुसार यह शुभ दिन है। प्रायः इस दिन कार्यालयों में अवकाश रहता है अतः सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ बाजारों में रौनक और खरीदी भी रविवार को ज्यादा होती है।ईसाई धर्म के अनुसार भी रविवार बहुत शुभ दिन होता है। रविवार की छुट्टी की शुरुआत सन 1843 ई० में हुई थी। इसका मकसद सरकारी कार्यालयों में अंग्रेजों सहित काम कर रहे लोगों को मानसिक रूप से विश्राम प्रदान करना है।

मिल मजदूरों के लिए साल 1890 में 10 जून वो दिन था, जब रविवार को साप्ताहिक अवकाश के रूप में चुना गया। मिल मजदूरों को हफ्ते में सातों दिन काम करना पड़ता था। यूनियन नेता नारायण मेघाजी लोखंडे जिन को भारतीय श्रम आन्दोलन का जनक कहा जाता है। आप महात्मा ज्योतिबा फूले के अनुयायी थे।उनहोने मिल मजदूरों के लिए पहले साप्ताहिक अवकाश का प्रस्ताव रखा, जिसे अंग्रेजों ने नामंजूर कर दिया। अंग्रेजी हुकूमत से 7 साल की सघन लड़ाई और आंदोलनों के बाद अंग्रेज रविवार को सभी के लिए साप्ताहिक अवकाश बनाने पर राजी हुए।

आलेख :- आशीष जैन

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