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एक ही व्यक्ति के द्वारा की गई चोरी से एक ही व्यक्ति दो बार पीड़ित हुआ और साहब हुए निरुत्तर

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जबलपुर। देश में कानून का राज चलता है तब आलम यह है की चोर चोरी पर चोरी करता जाता है और प्रशासन कोशिशों पर कोशिशें करता नजर आता है। लेकिन प्रशासन की कोशिशों से पीड़ित को कोई राहत मिलती नजर नहीं आती।
पाटन तहसील के अंतर्गत थाना गांव के नजदीक केहरी पटेल की कुछ जमीन है। गत वर्ष उस जमीन से बबूल के तीन पेड़ काट लिए गए और उनकी चोरी का इल्जाम आया लक्ष्मण यादव और उनके साथियों पर। मामला बना चोरी का और आरोपी जमानत पर बाहर हो गए। इसके बाद जब केहरी पटेल के बच्चों ने उनकी जमीन जिसका पटवारी हल्का नंबर 10 बटा 24 भूमि मौजा थाना तहसील पाटन खसरा नंबर 191 रखवा 1460 हेक्टेयर के संबंध में अंश भाग 0.1 10 है, पर फसल बोई दो उस फसल को भी चोरी कर लिया गया। जबकि उस जमीन पर लगी हुई फसल के विषय में अधिकारियों ने पहले ही आदेश जारी किया था कि सरकारी अमले की निगरानी में उस फसल को काटा जाएगा।लेकिन चोर की हिमाकत तो देखिए सरकारी अमले के पहुंचने से पहले ही उसने फसल काट ली। जिसने खेत को जोता बोया फसल उगाई। वह वह खाली हाथ रह गया। वह सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहा है कि उसके द्वारा बोई गई फसल का उसे कुछ दाम मिल जाए या उस पर कोई कार्यवाही हो जाए जब इस संबंध में हमने पाटन तहसील की अनुविभागीय अधिकारी सिद्धार्थ जैन और तहसीलदार स्वाति सूर्या से बात करनी चाही तो उन्होंने कैमरे पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया।
कुल मिलाकर अंधेर नगरी और चौपट राजा की राज चोरों की मौज है और मेहनतकशों की बेबसी।
मीडिया को जानकारी देते हुए एडवोकेट ने बताया कि इस मामले में पिछले वर्ष वादी के खेत से तीन बबूल के पेड़ काट लिए गए थे जिसकी रिपोर्ट उस वक्त की गई और उस मामले में प्रतिवादी लक्ष्मण यादव अब तक फरार हैं और बाकी साथी उस तरह का अपराध दोबारा ना करने की शर्त पर जमानत पर हैं। इस वर्ष जब केहरी पटेल के बच्चों ने फसल बोई तब उसे लेकर भी एक विवाद की स्थिति बनी। इस स्थिति में तहसीलदार ने ग्राम कोटवार, पटवारी और आर आई को रिसीवर नियुक्त किया और उन्हें आदेशित किया कि अपनी देखरेख में फसल की कटाई सुनिश्चित कर केहरी पटेल के संरक्षण में फसल को रखा जाए। 17 अप्रैल को फसल की कटाई होने का दिल निश्चित किया गया। किंतु उस दिन पुलिस बल प्राप्त नहीं हो पाया। जब 18 तारीख को पुलिस बल के साथ रिसीवर फसल काटने पहुंचे तो उनके पहुंचने के पहले ही गेहूं की फसल प्रतिवादी द्वारा काट ली गई थी। इस बाबत पुलिस ने मौका पंचनामा तैयार कर जानकारी तहसीलदार महोदय को दी और तहसीलदार महोदय आने कार्रवाई अग्रिम कार्रवाई पुलिस के भरोसे छोड़ दी जब एसडीएम महोदय से इस बात की शिकायत केहरी पटेल व परिजनों ने की। तो उन्होंने अग्रिम कार्रवाई के लिए तहसीलदार महोदय को पुनः निर्देशित किया। लेकिन तब से लेकर अब तक यानी लगभग 2 महीनों में इस विषय में कोई राहत भरी कार्यवाही प्रशासन के द्वारा नहीं की गई है। आवेदकों को संदेह है कि यदि फसल को आरोपियों द्वारा इधर उधर कर दिया गया। तब उनकी फसल का क्या होगा।
केहरी पटेल के सुपुत्र सोनेलाल पटेल ने बताया कि उन्हें उनकी फसल का या तो उचित मुआवजा मिले या फिर उनकी फसल वापस हो और साथ ही जिन्होंने अपराध किया है उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

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