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ऑर्डीनेंस फैक्ट्रीयों के निगमीकरण का फेडरेशनों द्वारा विरोध।

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रक्षा मंत्रालय कर रहा है कमेटी एवं सलाहकारों में करदाताओं का पैसा खर्च।



जबलपुर। निजीकरण के विरोध में सभी कर्मचारी संगठन एकजुट हुए।
ऑल इंडिया डिफेंस एम्पलाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एसएन पाठक ने बताया रक्षा मंत्रालय द्वारा मैसर्स केपीएमजी एडवाइजरी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को ऑडनेंस फैक्ट्री का निगमीकरण की प्रक्रिया के लिए सलाहकार बनाए जाने से 41 ऑडनेंस फैक्ट्री ओके 80000 कर्मचारी अधिकारी हतप्रभ है। रक्षा मंत्रालय द्वारा यह एक पक्षीय निर्णय उस समय लिया गया है जबकि चीफ विजिलेंस कमिश्नर तथा पीएमओ के समक्ष उक्त कंपनी के विरुद्ध नियम विरुद्ध जाकर रक्षा मंत्रालय द्वारा ठेका प्रदान करने की 2 शिकायतें दर्ज हैं । इस बाबत फेडरेशनों AIDEF, INDWF,BPMS ने भी चीफ कमांडर आर्म्ड फोर्सेस भारत के राष्ट्रपति को भी इन अनियमितताओं को दर्शाते हुए पत्र लिखा है। रक्षा मंत्रालय द्वारा ऑडनेंस फैक्ट्री, डीआरडीओ , EME वर्क शॉप, आर्मी बेस वर्कशॉप , डीजी क्यू ए, एम ई एस इत्यादि विभागों को खत्म करने के लिए आम जनता के टैक्स के पैसे से विभिन्न कंपनियां कमेटियां लगातार बनाई जा रही हैं। सेनाओं द्वारा ऑडनेंस फैक्ट्री ओके उत्पादों की मांग खत्म किए जाने के पश्चात ऑर्डीनेंस फैक्ट्रीयों का निगमीकरण आत्मनिर्भर कैसे हो सकेगा इस बाबत फेडरेशनों AIDEF, INDWF, BPMS ने रक्षा मंत्रालय से पूछा है। ऐसी स्थितियों में फैक्ट्रियां बीमार घोषित कर निजी हाथों में सौंप दी जाएगी और धीरे-धीरे 219 साल का इतिहास खत्म कर दिया जाएगा। वर्तमान समय में कॉविड19 के कारण बेरोजगारी अपने चरम पर पहुंच चुकी है ऐसे हालात में ऑडनेंस फैक्ट्रियों का निगमीकरण करके 80000 कर्मचारियों की सेवा शर्तों और उनके परिवार के भविष्य के बारे में कोई भी जानकारी देने में सरकार असमर्थ रही है। हम रक्षा विभाग के सभी कर्मचारियों की ओर से निगमीकरण सलाहकार के पी एम जी का विरोध एवं भर्त्सना करते हैं। निगमीकरण के रास्ते निजीकरण को बढ़ावा देने के विरोध में ऑर्डीनेंस फैक्ट्रीयों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के समर्थन में रक्षा मंत्रालय के अन्य विभाग की 1 दिन की हड़ताल 19 अक्टूबर को करेंगे।

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