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कोलहाई पंचायत में लिखी गई भ्रष्टाचार की नई इबारत

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महामारी के नाम पर आया बजट, नहीं दिखा कहीं मास्क

रवि शंकर पाठक रीवा। लोकतांत्रिक व्यवस्था के बाद भी जनप्रतिनिधियों को सरासर अपनी मनमानी करने में किसी तरह का संकोच नहीं होता है। केंद्र और राज्य सरकार की तमाम जनकल्याणकारी योजनाओं के नाम पर सुनियोजित भ्रष्टाचार की इबारत लिखी गई है। अधिकांश ग्राम पंचायतों के सरपंच और सचिवों ने मिलकर केंद्र और राज्य सरकार की तमाम योजनाओं का लाभ अपने से जुड़े लोगों तक सीमित रखा मांगने के बाद भी ग्रामीणों को किसी तरह की योजना का लाभ 5 साल में हासिल नहीं हुआ। रीवा जिले के गंगेव जनपद पंचायत की सीमा में आने वाली ग्राम पंचायत कोलहाई में चुनाव जीतने वाले जनप्रतिनिधियों ने शातिराना अंदाज में करप्शन का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। केंद्र और राज्य सरकार की किसी भी जन कल्याणकारी योजनाओं का धरातल पर संचालन नहीं करवाया गया, यही वजह है कि ग्राम पंचायत कोलहाई में रहने वाले लोगों को शौचालय और पीएम आवास योजना के नाम पर केवल परेशान किया गया है। सड़क, नाली, पेयजल, शौचालय और पीएम आवास निर्माण के नाम पर केंद्र और राज्य सरकार से आने वाले सरकारी बजट को सुनियोजित तरीके से ठिकाने लगाया गया है। इतना ही नहीं जिस कोरोनावायरस महामारी ने दुनिया भर के देशों को तबाही के मोड़ पर पहुंचा दिया, उसे लेकर भी ग्राम पंचायत कोलहाई में सरपंच कौशल्या कोरी और सचिव शत्रुघ्न पांडे ने बड़ा घोटाला किया है। इस कोलहाई पंचायत के किसी भी गांव में रहने वाले लोगों के बीच सेनेटाइजर और मास्क का वितरण नहीं कराया गया। भाजपा सरकार ने सभी ग्राम पंचायतों को तीस हजार रुपए का बजट जारी कर घर घर में सेनेटाइजर और मास्क पहुंचाने का लक्ष्य दिया था, जिसे कोलहाई में बेलगाम सरपंच और सचिव ने कागजों में ही पूरा करना आवश्यक समझा है। ग्राम पंचायत के सभी गांवों में रहने वाले लोगों को कोरोनावायरस महामारी के खतरे से सुरक्षित रखने के लिए सेनेटाइजर और गुणवत्ता वाला मास्क का वितरण बराबर करना था। ग्राम पंचायत कोलहाई में जब सरपंच और सचिव ने सेनेटाइजर और मास्क का वितरण नहीं कराया तो ग्रामीणों ने अपनी और अपनों की सुरक्षा को देखते हुए खुद अपने पैसों से सेनेटाइजर और मास्क की खरीदी करना बेहतर समझा। सूत्रों ने बताया कि कोरोनावायरस महामारी के नाम पर राज्य सरकार ने जो तीस हजार रुपए का बजट आवंटित किया था उसे सरपंच और सचिव ने आपस में ही ठिकाने लगा दिया।

अशिक्षित सरपंच , मलाई छान रहे हैं उनके परिजन
हर जगह शिक्षा की उपयोगिता आवश्यक होती है, जब कभी सरपंच जैसे अति महत्वपूर्ण और जिम्मेदार पद पर कोई अशिक्षिता काबिज हो जाता है तो उस ग्राम पंचायत में जनहित भाषणों की शोभा बढ़ाने तक सीमित रह जाता है। कुछ ऐसे ही हालात गंगेव जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत कोलहाई में पिछले पांच साल से बने हुए हैं। अनपढ़ सरपंच होने का पूरा फायदा सरपंच के देवर, पुत्र और भतीजा उठा रहा है। सरपंच कौशल्या कोरी की भूमिका केवल कागजों में अंगूठा लगाने तक सीमित रहती है। ग्राम पंचायत कोलहाई में घर घर शौचालय निर्माण, पीएम आवास योजना सहित अन्य विभिन्न योजनाओं के नाम पर केंद्र और राज्य सरकार से आने वाले लाखों रुपए के बजट की बंदरबांट सरपंच और सचिव ने मिलकर कर ली है। ग्राम पंचायत कोलहाई में ग्रामीणों को किसी भी योजना का लाभ हासिल नहीं हुआ है। ग्रामीणों का हक छीना और रीवा में बना डाला बंगला गंगेव जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत कोलहाई में पिछले पांच साल के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की किसी भी योजना का लाभ पात्र हितग्राहियों को उपलब्ध नहीं कराया गया। शौचालय और पीएम आवास योजना के नाम पर बड़े स्तर में सरपंच और सचिव ने खेल किया है। ग्राम पंचायत कोलहाई में रहने वाले ग्रामीणों का हक छीनने वाले सरपंच के परिजनों ने संभागीय मुख्यालय रीवा में आलीशान बंगले का निर्माण जरुर पांच साल के दौरान करवा लिया है। गंगेव जनपद पंचायत कार्यालय में तैनात बेलगाम अफसरशाही ने कोलहाई पंचायत में होने वाले घोटाले को हमेशा संरक्षण देने का काम किया है।

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