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गरीब बस्तियों से दूरी बनाते जनप्रतिनिधि…

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साफ सफाई से लेकर विकास को तरस रही बस्तियां…

दीपक तिवारी जबलपुर। पुरानी कहावत है कि अंधा बांटे रेवड़ी तो अपने अपने को दे। ऐसा लगता है कि वर्तमान व्यवस्था को गरीबों की ज्यादा फिक्र नहीं है पहले से उन बस्तियों में साफ-सफाई पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा हैं। जहां गरीब तबके के लोग झुग्गी झोपड़ियों में रहते हैं या घनी बस्तियों में रहते हैं।

यहां कोरोना का संक्रमण नहीं भी फैला होता तो दूसरी बीमारियां पांव पसार लेंती, समय रहते शासन और प्रशासन क्षेत्र में जाए और आने वाली सभी समस्याओं के विरुद्ध उचित और प्रभावी कार्यवाही करें। कानून व्यवस्था से लेकर नगरीय व्यवस्था तक ठप्प है। लेकिन जबतक बड़ा काण्ड या महामारी न फैल जाए उनके कानाें में जूं तक नहीं रैंगती?

उल्लेखनीय है कि बस्तियां तो बस गई सिर्फ वोट के लिए। लेकिन सर्वसुविधा को तरसती रहती है। क्षेत्रीय जनता नेता के दरबार जाती है। तो कह दिया जाता है। कि तुम्हारे वार्ड से तो वोट ही नहीं मिल! यह कौन सा जबाव है। नेता जी! आखिर जनता क्या करें। किसके पास जाए? आखिर मजदूरी करने वाले कब तक नेताओं के दरबार में हाजिरी लगाते रहेंगे। स्थिति जैसी भी है बस जीवन यापन करने लायक है। बस यहीं सोच वो अपना जीवन यापन कर रहे। कौन के पास और किसके पास इतना समय है कि जीतने के बाद न नेताओं दरबार में हाजिरी लगाए। जनता बेचारी क्या करें। उनकों रोज खाना और कमाना है, और परिवार भी पालन है। फिर चाहे समस्या कुछ भी हो।

सफाई को तरसता शिवाजीनगर उर्फ (माण्डवा )
पश्चिम विधानसभा के अंतर्गत रामपुर छापर से लगा वार्ड नं 5 सरदार वल्लभ भाई के नाम शिवाजीनगर उर्फ माण्डवा बस्ती के पार्षद बीजेपी और विधायक कांग्रेस के नेता है। बस्ती बसे 8 साल हो गए। अभी हाल में नाली सड़क तो ठीक ही है। लेकिन मुख्यमार्ग आज तक विकास के लिए तरस रहा है। सफाई के लिए गदंगी पांव पसार रही है। कभी साल में एक दो बार कचरा निकाल सड़क में फैक जाते है, तो महीनाें सड़क में ही पड़ा रहता है। दवा छिड़काव तो भूल ही जाओं। और कभी कोई सोचे कि आज क्षेत्रीय प्रतिनिधि को जानकारी दे दी जाए, तो माननीय जी का मोबाइल उठाना तो दूर की बात। कभी पलट के दुबारा फोन पूछ परख तक नहीं होती हैं। ऐसी छबि तो जनता के बीच ना बनाओ कि अगली बार जनता आपको इग्नोर ना कर दे।

देखता ही बनता है आखिर सभी वार्डों में एक समान रूप से सैनिटाइजेशन और सफाई का काम क्यों नहीं हो रहा है? आज भी नगर निगम सीमा के अंतर्गत गरीब बस्तियों में गंदगी के ढेर लगे हैं। नालियां बजबजा रहीं हैं। हमारा प्रशासनिक अमला सक्रिय तो है लेकिन केवल उन्हीं क्षेत्रों तक जहां बड़े-बड़े अमीर धन्ना सेठ और वीवीआईपी लोग रहते हैं। ऐ तो गरीब जनता के साथ छलावा है।

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