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छह साल से फर्जी नौकरी का दाग…

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कार्यक्रम प्रबंधक श्रीमती प्रजीत कौर पर लगा आरोप

दो विभागों मे एक साथ नौकरी और पगार भी, CMHO ने खड़े किये हाथ

उमरिया यश कुमार शर्मा। स्वास्थ्य विभाग मे आज 6 साल से फर्जी नौकरी करने का मामला सामने आया है, जिसने बड़े ही चालाकि के साथ विभाग को गुमराह करते हुए ऐसा कारनामा किया कि विभाग ने हाथ खड़े कर दिये और आज तक फर्जी नौकरी पर कार्यवाही नहीं हो सकी। हैरान करने वाली बात तो यह है कि प्रदेश स्वास्थ्य महकमें से जारी हुए पत्र मे भी स्पष्ट किया गया है कि श्री मती प्रजीत कौर ने फर्जी तौर पर नौकरी को हासिल किया है, इसके बाबजूद पूर्व और वर्तमान सीएमएचओ ने कोई एक्शन नही लिया है। विभाग के मुखिया की उदासीनता के कारण आज सरकार के लाखों रुपये बलि चढ़ रहे है, संलग्नीकरण का आरोप झेलने वाले सीएमएचओ पर एक और आरोप आज मढ़ गया है कि बीते 6 साल से दो विभाग मे नौकरी और दो जगह से पगार के इस मामले मे कार्यवाही करने की बजाय साहब ने मामले को रफा दफा कर दिया है।

तीन वर्ष मे एक भी जबाव नही
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन म.प्र. के मुख्य प्रशासकीय अधिकारी डा. ब्रजेश सक्सेना ने बीते 2018 मे श्रीमती प्रजीत कौर को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसमें कहा गया है कि वर्ष 2013 मे राज्य जल मिशन (पीएचई विभाग) एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से एक ही अवधि का वेतन प्राप्त किया गया है, श्रीमती प्रजीत कौर ने एम.एण्ड. ई. अधिकारी के पद से दिनांक 14/5/2013 को त्यागपत्र प्रस्तुत किया जिसको सीएमएचओ ने स्वीकार्य नही किया जिसके बाद 5/7/2013 को श्रीमती कौर ने पदभार ग्रहण कर लिया। शिकायत अनुसार श्रीमति कौर पर यह आरोप थे कि उन्होनें कार्यपालन यंत्री से प्राप्त चेक कार्यपालन यंत्री कार्यालय में जमा करने की मनी रसीद प्रस्तुत नही की, त्याग पत्र देते समय एक माह का वेतन जमा नही किया, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संशोधित मानव संसाधन मैनुअल की कंडिका 2.21 के प्रावधान अनुसार संविदा पर नियुक्त कर्मचारी त्यागपत्र देने के दिनांक समय 15 दिवस तक त्याग पत्र वापस ले सकता है, लेकिन मैडम ने त्याग पत्र देने के करीब दो माह बाद पुन: कार्यभार ग्रहण कर लिया। और क्यों न करतें फर्जी कार्यक्रम और एक काम के दो बिलों का खेल जो मैडम बाखूबी जानती हैं।

धन के दुरुपयोग का भी आरोप
प्रभारी जिला कार्यक्रम प्रबंधक एवं मूल पद जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन अधिकारी एन.एच.एम. श्रीमती प्रजीत कौर पर शासकीय राशि के दुरुपयोग का भी आरोप है, जिन्होने़ पद का इस्तेमाल करते हुए एक काम को दो बार करवाकर बिल लगायें, जिनकी राशि ली है, एक ही समय मे दो विभागों की नौकरी करना, जबकि पीएचई विभाग के दस्तावेजों मे यह आज भी कार्यरत है और स्वास्थ्य विभाग में अपनी फर्जी रिकार्ड के सहारे सेवा दें रही हैं।

मुखिया ने किया दबाने का प्रयास
इस मामले की शिकायत वैसे तो जिला प्रशासन से लेकर भोपाल तक कि गई है, वही उक्त फर्जी नौकरी की शिकायत जब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से की गई और उनसें विधि संगत की बात की गई तो उन्होंनें कोरोना काल को प्राथमिकता का हवाला देकर मामले को टाल दिया जबकि डा. राजेश श्रीवास्तव ने ही पूरे मामले पर पर्दा डाल रखा है, इसके पीछे कौन सा राज है यह तो वो ही जाने, परंतु इतना जरुर है कि जिला अस्पताल घुसते ही अपने को तेजतर्रार अधिकारी होने का प्रमाण देने वाले सीएमएचओ साहब ने मैडम को खुली छूट दी है और जमकर माल भी बटोरने साथ दिया है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण है कि साहब ने एक पत्र मे यह कह दिया है कि इनसें संबंधित जानकारी कौशल साकेत के कारण नही मिल रही है, जिसे विभाग देने मे अस्मर्थ है। लाचारी और बेबसी का ढोंग करने वाले लचर स्वास्थ्य विभाग के मुखिया के कारण आज भष्ट्राचार और दोष सिध्द होने के बाद ऐसे अधिकारी पद मे जमे हुए है। वही हाल मे एक और मामला भी सामने आया था, जिसमें राजेंद्र तिवारी पर झोलाझाप डाक्टरों से पैसे लेने का आरोप लगा है, लेकिन विभाग ने चुप्पी साधने के लिए कौन सा पैतरा अपनाया है यह तो भगवान ही जाने मगर मुखिया के इस वर्ताव के कारण पूरा महकमा बदनामी का दाग लेकर घूम रहा है।

इनका कहना है:-
इस संबंध मे उनका पक्ष जानना चाहा गया लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नही।
श्रीमती प्रजीत कौर,प्रभारी कार्यक्रम प्रबंधक एनएचएम स्वास्थ्य विभाग उमरिया

मुझे दो साल हुए आये और मै इस संबंध मे कुछ नही जानता, मै कोरोना मे लगा हुआ हूं।
डा. राजेश श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी उमरिया

मै अभी आया हूं, मुझे इसकी जानकारी नही है, आपने बताया है यह गंभीर मामला है जांच करवाकर कार्यवाही होगी।
संजीव श्रीवास्तव, कलेक्टर उमरिया

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