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दबंग सरपंच की दबंगई प्रशासन के सामने जनता को धमकाया ।

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रीवा। मऊगंज जनपद अन्तर्गत पताई विशेषर पंचायत का जहां करोड़ों का भ्रष्टाचार छुपाने के लिए अपनाए जा रहे अजीबोगरीब हथकण्डे, उल्टा चोर कोतवाल को रहे डांट

रीवा / देवतालाब। प्रदेश की समस्त ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार इन दिनों चरमसीमा पर है यदि भ्रष्टाचार का आम जनता विरोध करती है तो दबंग सरपंच अथवा महिला सरपंच के रिश्तेदारों द्वारा धमकाया जाता है, फर्जी मुकदमे में फंसाने की साजिश की जाती है। जिससे ग्रामवासी पीछे हट जाएं और भ्रष्टाचार की शिकायत न करें।

पुलिस के सामने आम जनता से सरपंच ने की अभद्रता

रीवा जिले के मऊगंज जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत पताई विशेषर से ऐसा मामला प्रकाश में आया है जहां ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार का विरोध कर रहे ग्रामवासियों ने जब सरपंच सचिव से मुलाकात करने पंचायत भवन की तरफ रुख किए तो पंचायत के सरपंच गीता मिश्रा के पति राजकुमार मिश्रा, सचिव अशोक पांडे, रोजगार सहायक आकाश गौतम द्वारा पंचायत भवन में अंदर से ताला जड़ दिया गया और डायल 100 को सूचित कर पुलिस को बुलाया गया। पुलिस आते ही वास्तविकता भी सामने आई जिसमें स्पष्ट हुआ कि यह सब ड्रामा सरपंच के पति द्वारा किए गए भ्रष्टाचार के बचाव के लिए किया जा रहा था जबकि स्वयं सहायक उपनिरीक्षक थाना लौर श्री शुक्ला द्वारा कहा गया कि यहां पर किसी भी प्रकार का वाद विवाद जनता द्वारा नहीं किया गया और न ही हमें यहां पर किसी को कोई खतरा दिखा। एएसआई शुक्ला ने बताया की जनता अपने ग्राम पंचायत में कोविड के सारे नियमो का पालन करते हुए ग्राम सभा कर रही थी और भ्रष्टाचार के विरोध में कार्यवाही की मांग कर रही थी जो वहां के सरपंच पति को नागवार गुजरी और डायल हंड्रेड को कॉल कर पुलिस बुला लिया।

पुलिस ने खुलवाया ताला

पुलिस ने घटना स्थल में पहुंच कर जब सरपंच पति को पंचायत भवन का दरवाजा अंदर से खोलकर बाहर आने के लिए कहा तब सरपंच पति ने दबंगई दिखाना प्रारंभ कर दिया और ग्रामवासी रोहित गौतम, मनीष दुबे, संदीप दुबे, कुलदीप दुबे, देवेंद्र दुबे, संतोष दुबे और उपसरपंच वर्मा को भी अभद्र भाषा का प्रयोग कर धमकाने लगे। यह सब देख कर पुलिस और एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी सामने आये और सरपंच पति को कहा कि वह अभद्र भाषा का प्रयोग न करे और यहां जनता शांतिपूर्ण ढंग से खड़ी हुई है और पुलिश सब देख रही है। इस प्रकार देखा गया कि यह एक आम परंपरा है कि पहले पंचायत सरपंच सचिव जमकर भ्रष्टाचार फैला रहे हैं उसके बाद उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली स्थिति सामने आ रही है जिसमें भ्रष्टाचारी ही आम जनता को प्रताड़ित करने पर तुले हुए हैं। आम जनता यदि अपने पंचायत प्रांगण में शांतिपूर्ण ढंग से सभा करें और भ्रष्टाचार अनियमितता के विरुद्ध कार्यवाही के लिए मीटिंग करें तो इन भ्रष्टाचारी सरपंच सचिवों के चलते शांतिपूर्ण ढंग से सभा भी नहीं करने दी जाती है औऱ उल्टे पुलिस को बुला दिया जाता है। हां यह बात अलग है कि पुलिस के आने के बाद सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता है जिसमें इन जनप्रतिनिधियों द्वारा किए गए भ्रष्टाचार की पोल खुल जाती है और फर्जीवाड़ा सामने आ जाता है।

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