Publisher Theme
I’m a gamer, always have been.

दिव्यांग महिला जो बनी एक मिशाल।

0 60

दिव्यांग महिला जो बनी एक मिशाल।

कैंसर पीड़ित पिता के इलाज के लिए 35 वर्षीय अंकिता शाह ने ऑटोरिक्शा से नया रोजगार करने का निर्णय लिया। जो एक नई मिशाल के रूप में उभरा। क्योकि वह अहमदाबाद की पहली दिव्यांग रिक्शावाली हैं। एक कॉल सेंटर में नौकरी के साथ पिछले तीन महीने से अंकिता ऑटोरिक्शा भी चला रही हैं ताकि कुछ ज्यादा आय हो। कैंसर पीड़ित पिता के लिए अंकिता ने ये निर्णय लिया।
अंकिता अपने घर में सबसे बड़ी हैं और उन्होंने अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की है. बचपन में ही पोलियो की वजह से उनका दायां पैर काटना पड़ा. समाज के उल्हानों की शिकार अंकिता 2012 में अहमादाबाद आईं और कॉल सेंटर में नौकरी करने लगीं. कई कंपनियों में इंटरव्यू देने के बावजूद अंकिता को नौकरी नहीं मिल रही थी, कंपनी वालों के लिए उनका दिव्यांग होना परेशानी बन रहा था।
ऑटोरिक्शा चलाने का निर्णय न अंकिता के लिए आसान था और न उनके परिवार के लिए. अपनी आर्थिक हालत सुधारने पर अड़ी अंकिता ने काम और निजी जीवन में बैलेंस बनाने के लिए ये कठिन निर्णय लिया. अंकिता 8 घंटे ऑटो चलाकर 20 हज़ार महीने तक कमा लेती हैं. अंकिता भविष्य में अपना टैक्सी बिज़नेस शुरू करना चाहती हैं।

Leave A Reply

Your email address will not be published.