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दूधी ,शक्कर, सीता रेवा नदियों की ,आबरू लूटने में लगी बड़ी-बड़ी मशीनें

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दिन रात मशीनों से हो रहा है रेत का खनन ,धनलक्ष्मी के गुर्गों की दबंगई के सामने प्रशासन के नियमों को ठेंगा

गाडरवारा। जिले की गाडरवारा तहसील की नदियों में किस तरह मशीनों से खनन किया जा रहा है। इसका उदाहरण मीडिया की सुर्खियां बयां कर रही हैं लेकिन उसके बावजूद भी जिले का प्रशासन और पक्ष विपक्ष के जनप्रतिनिधि भी मौन धारण किए हुए हैं । गाडरवारा तहसील क्षेत्र की दूधी शक्कर सीता रेवा सहित अन्य सहायक नदियों के घाटों पर हर जगह बेधड़क तरीके से पोकलैंड और जेसीबी का भरपूर प्रयोग किया जा रहा है। तहसील क्षेत्र की दूधी नदी, बैरागढ़ ,पनागर ,ढिगसरा ,अंजदा तूमडा ,सांसरखेडा ,सहित अनेक बड़ी-बड़ी रेत खदानों में कई पोकलैंड और जेसीबी मशीनें लगी होने की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई है ,इन वीडियो मैं सर्वोच्च न्यायालय पर्यावरण और एनजीटी सहित सरकार के सारे नियम कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए इस वीडियो में दिखाई जा रही हैं । मशीनों से खनन के दौरान होने वाले गहरे गड्ढे नजदीकी गांव में रहने वाले लोगों के लिए जानलेवा साबित होने लगे हैं। क्षेत्र की सभी रेत खदानों में एनजीटी के नियमों की अनदेखी कर लगी मशीनों को लेकर जिम्मेदार प्रशासन खामोशी साधे हुए हैं ,जबकि खास बात यह है कि एनजीटी के नियमों के मुताबिक खनन में मशीनों का प्रयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंधित है और मानव श्रम कर रेत खदान के निर्देश हैं। फिर भी जिम्मेदारों की मिलीभगत से क्षेत्र की सभी रेत खदानों में मशीनों का प्रयोग बेधड़क किया जा रहा है। आलम यह है कि प्रत्येक खदान में तीन से चार पोकलैंड मशीनें और जेसीबी लगी हुई हैं ,जिनके जरिए नदी की जलधारा के भीतर से भी रेत निकाली जाती है ,इतना सब उजागर होने के बावजूद भी पुलिस और प्रशासन की छत्रछाया में रेत का धंधा जोर शोर से बेधड़क जा रही है।

डंपर ओं की कतार ने तबाह कर दिए खेत और सड़क

क्षेत्र में वर्षों से चल रहा है अवैध और वैध उत्खनन ने खदान से लगे गांव ग्रामीण क्षेत्र के कई किसानों के खेत और गांव की सड़कों को तबाह कर दिया है ग्रामीणों ने बताया कि खदानों से लगे खेत अब बंजर जमीन में तब्दील हो गए गांव की सड़कों के परचख्खे उड़ गए है ,जिससे अब लाखों करोड़ों की प्रधानमंत्री सड़क योजना को बरसात के समय डंपर ओं की मार झेलनी पड़ेगी ,और सड़क किनारे बने मकानों में रहने वाले लोग हादसों से आशांकित रहते हैं । तहसील क्षेत्र की बैरागढ़ पनागर ढिंगसरा अजंदा तुमड़ा संसार खेड़ा की बड़ी-बड़ी रेत खदानों मैं दिन रात सैकड़ों डंपर ओं की तादाद देखी जा सकती है इन सभी रेत खदानों से लगे गांव के लोग हादसे का शिकार भी हो जाते हैं उसके बावजूद भी इन सभी नदियों के रेत घाट अब लोगों के लिए अभिशाप बनने लगी है ग्रामीण क्षेत्रों के आसपास जिन गांव मैं नदी है उन गांव से लगे दसों गांव अब इस रेत परिवहन से प्रताड़ित होने लगे हैं, बड़े-बड़े शहरों से भारी वाहन आकार बड़ी-बड़ी मशीन और पोकलैंड जीसीबी नदियों की बीच धारा में जाकर रेट का बेतहाशा दिन रात उत्खनन कर रही हैं और वह ग्रामीण सड़कों से होकर जा रही हैं,जिस सड़क की छमता मात्र मोटरसाइकिल बैलगाड़ी ट्रैक्टर ट्राली यदि की है उससे बड़े बड़े हाईवा और डंपर चल रहे हैं जो सड़कों को तहस-नहस कर रही हैं ।अब इन स्थानों पर धनलक्ष्मी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने सभी रेत खदानों में अपना कब्जा जमा लिया है,इन खदानों से प्रतिदिन दिन-रात सैकड़ों की तादाद में डंपर ओं का आना-जाना बना हुआ है,जिससे खदानों से लगे सभी ग्रामीणो के लोग भय के माहौल में जीने को मजबूर हैं।

इधर रेतखदान ठेकेदार धनलक्ष्मी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रवैया पर उठ रहे हैं सवाल

गाडरवारा क्षेत्र सहित आसपास के ग्रामीणों में प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को ₹35 से लेकर ₹4000 तक रेत लेने को मजबूर हुए हैं क्योंकि धनलक्ष्मी कंपनी के आते ही क्षेत्र में रेत रायल्टी की अवैध वसूली की चर्चा मीडिया की सुर्खियां बनी हुई है।अवैध रॉयल्टी के मामले पर गरीब तबके के लोग भारी परेशान हैं ,कंपनी के इस रवैया पर क्षेत्र के लोगों ने प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया है ।

अवैध रेत रायल्टी की प्रतिक्रिया देते हुए, खनूजा ने कहीं आंदोलन करने की बात

धनलक्ष्मी कंपनी के द्वारा ट्रैक्टरों के चालकों से ₹2000 की रायल्टी ली जा रही है जिससे प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को ₹ 3500 सौ रुपए से अधिक रेत लेने को मजबूर हैं,अगर प्रशासन के द्वारा इस मामले को संज्ञान में नहीं लिया तो जल्द ही आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

इधर भाजपा के चौहान मंडल अध्यक्ष ने उठाई हितग्राहियों की पीड़ा, सौंपा है ज्ञापन

सरकारी मापदंडों के तहत तय राशि की रायल्टी ट्रैक्टर चालकों से वसूली होनी चाहिए जिससे कि प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को उचित रेट पर रेत उपलब्ध हो सके। ₹2000 की रेत रायल्टी मिलने से प्रधानमंत्री के हितग्राहियों को महंगी रेत मिल रही है, जिससे कुछ ट्रैक्टर चालकों के द्वारा प्रशासन को ज्ञापन दिया गया है, जिसमें रेत रायल्टी की राशि को लेकर प्रशासन को अवगत कराया गया है ।

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