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देखते रहे जनप्रतिनिधी व प्रशासन, ग्रामीणो ने बना लिया पुल

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लगभग 5-6 लाख का चंदा इकठ्ठा कर किया निर्माण, जनप्रतिनिधयों को लोकप्रियता व कार्य शैली पर सवाल

नरसिहपुर। सरकार द्वारा दावा किया जाता है कि लोगो की मांग के अनुसार शहरी व ग्रामीण क्षेत्रो मे निर्माण कार्य कराये जा रहे है एंव प्रत्येक व्यक्ति के आने जाने के लिये पक्की सड़क व आवश्यक स्थानो पर पुल का निर्माण भी कराया गया है । लेकिन नरसिंहपुर जिले की ग्राम पंचायत रीछई मे पूरा माजरा उल्टा नजर आता है । यहां निवास कर रहे लोगो द्वारा बीते दस बर्षो से प्रशासन से पुल बनाने की मांग करते आ रहे है । जब पुल नही बना तो ग्रामीणो द्वारा चंदा इकठ्ठा कर पुल का निर्माण शुरू कर दिया। जिले मे आज भी कई गांव ऐसे है जहां पर लोगो को आने जाने के लिये पक्की सड़क नही है और लोग कच्चे रास्तो से होकर अपने घर तक पहुंचते है । ऐसी स्थिति मे उन लोगो को बरसात के दिनो मे काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है । एंव साथ ही स्कूली छात्रो को भी उसी दल दल भरी गली से आना जाना पड़ता है जहां पर पूरा रास्ता दल दल बना हुआ रहता है लेकिन मजबूरी के आगे सभी पस्त नजर आते है कुछ ऐसा ही नजारा ग्राम पंचायत रीछई में भी देखने को मिला ।

जन प्रतिनिधियों ने नही दिया ध्यान

रीछई ग्राम पंचायत के लोगो द्वारा पुल निर्माण को लेकर अनेको बार क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को लिखित व मौखिक रूप से अवगत कराया था । पुल बनने की आस को लेकर दस बर्ष से ज्यादा समय बीते गया जब पुल का निर्माण ना हो सका तो ग्रामीणो द्वारा चंदा एकत्र कर सामग्री क्रय कर पुल का निर्माण शुरू कर दिया । निर्माण शुरू होने के बाद भी ना तो आश्वासन के लिये जन प्रतिनिधी पहुंचे और ना ही प्रशासनिक अधिकारी ।

70 फुट की है लंबाई

ज्ञात रहे कि रीछई ग्राम पंचायत के खिरका मोहल्ला मे आधे ग्राम पंचायतवासी निवास करते है एंव कई बर्षो से पुल या रपटा व डेम बनाने की मांग उक्त नाले मे की जा रही थी परन्तू प्रशासन व जनप्रतिनिधियो की अनदेखी के कारण निर्माण नही हो सका और ग्रामीणो द्वारा लगभग 70 फुट की लंबाई का पुल चंदा एकत्र कर बनाना पड़ा । जिसकी चौड़ाई ग्रामीणो द्वारा 4 फुट दी गई है । जिसमें से केवल पैदल व दोे पहिया वाहन ही निकाला जा सकता है ।

दिनो दिन बढ़ रही थी परेशानी

ग्रामीणो द्वारा पुल बनाने का कदम इसलिये उठाया गया कि दिनो दिन परेशानी बढ़ती जा रही थी एंव बारिस के दिनो मे बच्चो का स्कूल जाना खतरे के साथ साथ परेशानी भी नाले के कारण बढ़ जाती थी और बच्चे नाला पार कर स्कूल नही जा पाते थे । जिससे ग्रामीणो द्वारा सहमति बनाकर पुल का निर्माण, कड़ी मेहनत व जदोजहद करके बनाना पड़ा । ताकि बरसात के दिनो मे आने जाने पर ज्यादा परेशानी का सामना ना करना पड़े ।

लगभग 5 लाख की लागत

ग्रामीणो द्वारा बताया गया कि उक्त पुल के निर्माण मे किसी भी प्रकार से जनप्रतिनिधियो व प्रशासन का कोई भी सहयोग प्राप्त नही हुआ है उक्त निर्माण के लिये सामग्री लोहा,सीमेंट, रेत, गिटटी का क्रय भी ग्रामीणो के दिये हुये चंदे से किया गया है एंव समस्त ग्राम के लोगो द्वारा मजदूरी कर निर्माण किया जा रहा है ।

लकड़ी से भी बनाया था पुल

ज्ञात हो कि बीते बर्षो मे कुछ बर्ष तक लगातार ग्रामीणो द्वारा उक्त नाले को पार करने के लिये लकड़ी का पुल भी बनाया जाता था जिससे बच्चो का आवागमन होता था परन्तू लकड़ी से बने पुल मे खतरा और ज्यादा बढ़ जाता था जिसे लेकर प्रशासनिक रूप से समस्या का हल ना निकलने पर लोगो द्वारा उक्त कदम उठाते हुये , पुल का निर्माण किया जा रहा है ।

साख को किया कम

उक्त पुल निर्माण को लेकर लोगो के मन मे अनेको प्रकार के सवाल उठ रहे है एंव क्षेत्रीय जनप्रतिनियों की साख को लोगो के मन में कम हो रही है वही प्रशासन के दाबो को भी खोखला बनाकर रख दिया और प्रशासन के प्रतिलोगो की सहानुभूति व कार्य शैली पर भी विपरीत असर देखा जा रहा है । हालाकि ज्ञात हो कि उक्त क्षेत्र जिले के लोक प्रिय जनप्रतिनिधयों का क्षेत्र है एंव यह क्षेत्र करेली जनपद पंचायत के अंतर्गत व तेंदूखेड़ा विधानसभा क्षेत्र में आता है जहां के लोक प्रिय विधायक संजय शर्मा है व होशंगाबाद संसदीय क्षेत्र का भी है। जहां से सर्वाधिक मतो से विजय होने वाले सासंद राव उदय प्रताप सिंह है एंव उनका निज ग्राम लोलरी भी ग्राम रीछई से ज्यादा दूरी पर नही है । उक्त पुल निर्माण के संबंध मे ग्रामीणो से चर्चा की गई तो लोगो द्वारा बताया कि जन प्रतिनिधियो को अनेको बार अवगत कराने के बावजूद भी समस्या का हल नही निकाला गया और ना ही रपटा व पुल का निर्माण कराया गया केवल आश्वासन ही हाथ लगता रहा । परन्तू बच्चो के भविष्य व सुचारू आवगमन को लेकर यह कदम उठाना पड़ा , एंव उक्त चर्चा के दौरान ग्रामीण काफी मायूस नजर आये व प्रशासन के साथ साथ जनप्रतिनिधयों के प्रति रोस भी नजर आया ।

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