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दो दिवसीय सिकल सेल एनीमिया का नि:शुल्क शिविर

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परीक्षण के साथ नि:शुल्क होगा दवा का वितरण

मण्डला। मण्डला के योगीराज हॉस्पिटल में एक नि:शुल्क शिविर जिसमें सिकल सेल एनीमिया का चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया है। जिसमें 29 फरवरी एवं 1 मार्च तक दो दिवसीय सिकलसेल एनीमिया नि:शुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन योगीराज हॉस्पिटल में किया गया है। इस शिविर में सिकल सेल एनीमिया के रोगों की संपूर्ण जांच की जाएगी जिसमें शुरुआती टेस्ट के साथ मरीजों को नि:शुल्क दवा वितरण भी किया जाएगा। इस कार्यक्रम में भारत के जाने-माने सिकल सेल एनीमिया विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप पात्रा एवं डॉ. प्रदीप सहारे एवं उनकी टीम योगीराज हॉस्पिटल में उपस्थित रहेंगी। जहां पर सभी वर्ग, उम्र के लोगों की जांच की जाएगी। यह शिविर 29 फरवरी से 1 मार्च तक योगीराज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में आयोजित किया जा रहा है।
अधिक से अधिक मरीज लें शिविर का लाभ की अपील
इस शिविर के आयोजक कार्यकारी मुख्य न्यासी सत्यनारायण खंडेलवाल, डॉ. अशोक मर्सकोले एवं स्वामी सीताराम ट्रस्ट द्वारा किया जा रहा है। सिकल सेल एनीमिया के मुख्य लक्षण हैं। जैसे-शरीर में खून की कमी होना, शरीर का पीला देखना, थकावट, सांस फूलना, चिड़चिड़ापन, खानपान में, अरुचि 4-हाथ पैर की उंगलियों में सूजन एवं दर्द, तिल्ली का बढ़ जाना, सिकलसेल बीमारी से धीरे-धीरे तिल्ली, फेफड़े, हृदय, गुर्दे, लीवर आदि अंगों में खराब हो जाना इस तरह इसके मुख्य लक्षण हैं। यह बीमारी मंडला, डिंडोरी, बालाघाट में मुख्यत: पाई जाती है। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक लोगो तक इस नि:शुल्क चिकित्सा शिविर का लाभ लोगों को मिल सकें। जो भी व्यक्ति, परिवार या पड़ोसी इस बीमारी से पीडि़त हैं तो इस शिविर में पहुंचाने की अपील की गई है।
सिकल क्या है?
हमारे शरीर में बहने वाले रक्त की लाल रक्त कणिकाओं में उपस्थित हिमोग्लोबिन प्राणवायु ऑक्सीजन को फेफडें़ से शरीर के सभी अंगों तक पहुंचाता है। सिकल एक अनुवांशिक बीमारी है जिसमें रोगी के लाल रक्त कण ऑक्सिजन की कमी से हंसिए के आकार में बदल जाती है। अंग्रेजी में हॅसिए को सिकल कहते हैं इसलिए इसलिए इसे सिकल सेल या सिकलिंग की बीमारी कहा जाता है। सामान्य लोगों में लाल रक्त कण का आकार गोल होता है व उम्र 4 महिने या 120 दिन होती है, परन्तु सिकल की बीमारी में लाल रक्त कण जल्द टूट जाते हैं और केवल 10-12 दिन ही चलते हैं जिससे खून की कमी बनी रहती है।
सिकल की पहचान
सिकल की बीमारी कुछ खास इलाकों में व कुछ खास जाति जैसे गोंड, भील, कुर्मी, झारिया आदि जातियों में ज्यादा पाई जाती है। खून की जॉच से सिकल बीमारी की पहचान की जाती है। साल्यूबिलिटी टेस्ट इससे सिकलिंग है या नहीं अंदाज लग जाता है रिपोर्ट भी जल्दी मिल जाती है। सिकलिंग टेस्ट स्लाइड टेस्ट है व रिपोर्ट 24 घंटे में मिलती है। एच बी इलेक्ट्रोफोरेसिस इससे सिकल टे्रट या धारक व सिकल वाहक का पता चलता है। हिमोग्लोबिन एचपीएलसी यह गोल्ड स्टैंडर्ड टेस्ट है, इससे सिकल के विभिन्न प्रकार के बारे में पता चलता है।
सिकल सेल एनिमिया के लक्षण
खून की कमी होना शरीर का पीला दिखना, थकावट, सॉस फूलना चिड़चिड़ापन, खानपान में अरूचि, हाथ पैर की उंगलियों व जोड़ों में दर्द व सूजन, तिल्ली का बढ़ जाना, बार-बार बीमार पडऩा, सिकल सेल की बीमारी से धीरे धीरे तिल्ली, फेफड़े, हृदय, गुर्दे, लिवर आदि अंगों के खराब होते जाते हैं। सिकल प्रमुख रूप से दो प्रकार का होता है सिकल वाहक या सिकल टे्रेट और सिकल धारक या सिकल सेल एनिमिया सिकल वाहक सिकल का एक जीन रखते हैं इन्हें कोई तकलीफ नहीं होती ये नॉर्मल जिन्दगी जीते हैं। ये अपने बच्चे को सिकल का एक जीन दे सकते हैं। सिकल धारक या सिकल सेल एनिमिया जब बच्चे को माता पिता दोनों से सिकल के जीन मिले हो तो बच्चा सिकल सेल एनिमिया बीमारी पीडि़त हो जाता है।
सिकल का निदान
सिकल एक अनुवांशिक बीमारी है अत: इसका इलाज संभव नहीं है परन्तु जल्द से जल्द इसकी पहचान कर कुछ दवाईयों से व सावधानी बरतने से सिकल से रोजाना होने वाली तकलीफो व व्याधियों को रोककर अच्छी जिंदगी जा सकती है। गर्भ में या जन्म के तुरंत बाद बच्चे के सिकलिंग की जॉच, टीकाकरण व बीमार होने पर तुरंत इलाज, हाइड्रॉक्सिी युरिया एक जादुई दवा है जो सिकलिंग को कम करती है जिन्दगी भर लेनी है, डॉक्टर की सलाह से लें। समय-समय पर सीबीसी, खून की जॉच, बुखार में पैरासिटेमॉल व दर्द के लिए दर्द निवारक दवा ले सकते हैं। सुपाच्य व संतुलित आहार लें।
सिकल की रोकथाम
जिन परिवारों में सिकल की बीमारी हे उनमे शादी के तुरंत बाद लड़का व बहु का सिकलिंग टेस्ट कराना चाहिये। निगेटिव है या दोनों में से एक पॉजीटिव है तो कुछ नहीं करना है। सिकलिंग को भूल जाएं। यदि दोनों सिकलिंग पॉजीटिव है तो उनकी आने वाली संतान में सिकलिंग बीमारी होने के चांस होते हैं। गर्भ के 10-12 सप्ताह में पता लगाया जा सकता है, सिकल का भ्रूण होने पर गिराया जा सकता है। इस विधि से स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया जा सकता है।

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