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पर्यटक ग्राम-बसारी में विखरेगी बुंदेली संस्कृति की छठा

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छतरपुर 13 फरवरी 2020 पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में आकर लोग अपनी तहजीब और ग्रामीण संस्कृति को विस्मृत करते जा रहे हैं, खान-पान और रहन-सहन तो बदला ही है, लोक संस्कृति भी भूलते जा रहे हैं। बुन्देलखण्डी संस्कृति भी इससे अप्रभावित नहीं रह सकी, इस पर चिंता तो सभी ने व्यक्त की किंतु इसे बचाने के लिए प्रयास किया शंकर प्रताप सिंह बुन्देला ‘‘मुन्ना राजा’’ ने ।

            बुन्देली संस्कृति का संरक्षण व संवर्धन करने और लोक कलाकारों के लिए एक मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 19 वर्ष पूर्व शंकरप्रताप सिंह ‘‘मुन्ना राजा’’ ने बसंत पंचमी के दिन ग्राम बसारी में बुन्देली उत्सव शुरू कराया था । आयोजन की सार्थकता को देखते हुए प्रदेश व केन्द्र सरकार ने इसे पर्यटक ग्राम घोषित कर दिया । इस वर्ष 24 वाँ बुन्देली-उत्सव-2020 दिनांक 16 फरवरी 2020 से 22 फरवरी 2020 तक आयोजित किया जा रहा है। उत्सव के अंतर्गत बुन्देली नाटक, लोकगीत, लोक नृत्य, बुन्देली व्यंजन, कुश्ती प्रतियोगिता, अश्वनृत्य, बैलगाड़ी दौड़़ आयोजन के साथ-साथ बुन्देली सिनेमा का प्रदर्शन भी किया जाएगा।

            गांव-गांव में टीवी चैनलों के प्रभाव से लुप्त होते जा रहे विशुद्ध बुन्देली गायन व नृत्य जैसे दिवारी, रावला, कछयाई, बरेदी नृत्य, दलदल घोड़ी और लोक गायन, ख्याल, कहरवा, लमटेरा, कार्तिक गीत, गोटे गायन, आल्हा, बधइया, ढिमरयाई, सोहरे, दादरा, बिलवारी, गारी, बनरे, सैर, फाग और राई नृत्यों को पुनर्जीवित कर संरक्षण व संवर्धन की दिशा में प्रभावी पहल हुई है ।

            उत्सव में बुन्देली कला को बढ़ावा देने एवं लोक कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए एक मंच मिलने लगा है साथ ही कला को बढ़ावा मिला है। नई पीढ़ी अपनी लोक संस्कृति से परिचित होकर अभिभूत होती है, तो देशी व्यंजनों की प्रतियोगिता में परोसे जाने वाले पकवान चखकर बुजुर्ग पीढ़ी पांच दशक पहले के समय को याद करती है ।

            इस अनूठे लोक उत्सव को ग्रामीण परिवेश के अनुसार मनाने के लिए शासन व जनसहयोग से पर्यटक ग्राम- बसारी में एक विशाल स्टेडियम तथा एक कला-मंच तैयार किया गया । जिसे लोक कला से चित्रित किया गया है । पहले यहां केवल बुन्देली संस्कृति पर आधारित कार्यक्रम होते थे किंतु इस वर्ष बुन्देलखण्ड के अलावा दूसरे अंचल के लोक कार्यक्रमों को भी अवसर दिया जा रहा है । इस उत्सव में बुन्देली साहित्यकारों, इतिहासकारों और कवियों को भी सम्मानित किया जाता है ।              बुन्देली विकास संस्थान के संरक्षक शंकरप्रताप सिंह बुन्देला ‘‘मुन्ना राजा’’ का इस उत्सव के बारे में कहना है कि कुछ लोगों ने इस उत्सव को राजनीतिक नजर से देखा और आरोप भी लगाए लेकिन आलोचकों का यह नजरिया बिल्कुल गलत है, यह उत्सव बुन्देलखण्ड की कला और संस्कृति का संरक्षण व संवर्धन करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है क्योकि आज की युवा पीढ़ी पाश्चात्य सभ्यता और संस्कृति के प्रभाव में आकर अपनी सभ्यता और संस्कृति को भूलती जा रही हैं।          

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