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पैसे देने के बाद भी जारी है जमीन की जंग।

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बेचने वाला ना पैसा वापस कर रहा है ना जमीन की रजिस्ट्री।



जबलपुर – खाली जमीन का एक टुकड़ा खरीदने के चक्कर में, लाखों रुपए हड़प कर बैठे गौरव मिश्रा से रकम वापस लेने में पीड़िता श्रीमती मानसी चतुर्वेदी को एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है। 1 नवंबर 2018 को किए गए विक्रय अनुबंध के मुताबिक रिछाई में मानसी चतुर्वेदी ने 7000 वर्ग फुट का प्लाट गौरव मिश्रा से खरीदा था। जमीन मौजा रिछाई बंदोबस्त नंबर 402 पटवारी हल्का नंबर 16 बटा 65 और राजस्व निरीक्षक मंडल महाराज पुर तहसील व जिला जबलपुर खसरा नंबर 85 और रकबा 7000 वर्ग फुट की जमीन का सौदा मदन महल स्थित पीड़िता के निवास पर हुआ था। जिसमें 23 लाख ₹10000 की कुल राशि अनुबंध के तौर पर तय की गई थी और कुल संपत्ति के एवज में इस राशि के बयानों के रूप में ₹100000 की राशि चेक द्वारा दे दी गई थी किंतु चेक वापस कर नगद ₹100000 दिए गए। दोबारा 14 नवंबर को चेक के माध्यम से ₹200000 दिए गए और 26 नवंबर को ₹100000 नगद दिए गए कुल ₹400000 की राशि अन आवेदक गणों को दी गई उक्त भूमि पर प्लाटिंग कर उसे विकसित किए जाने हेतु पुनः ₹400000 की राशि दिसंबर 2018 में अनाआवेदक गणों को दिए गए इस प्रकार कुल ₹800000 की राशि दे चुके हैं। उस भूमि की जब नपाई कराई गई तो 7000 स्क्वायर फुट में से मात्र 2800 वर्ग फुट जमीन ही नापाई में आई और यह पता लगा कि अनाआवेदक गणों ने उनके साथ धोखा किया है। वह 2800 वर्ग फुट का प्लाट पहले ही किसी को भेज चुके हैं। इसके बाद अनुबंध के अनुसार 7000 वर्ग फुट की जमीन उन्हें मिलनी चाहिए लेकिन इस बाबत जब उन्होंने अनाआवेदक गणों से बात की तो वह गाली गलौज पर उतर आए मारपीट पर उतर आए और यहां तक कह दिया कि तुम्हें जो करते बने कर लो आप पूरी जमीन हमारी है। ना तो रजिस्ट्री करेंगे और ना ही कोई डेवलपमेंट का काम करने देंगे तुम्हारे ₹800000 भी वापस नहीं करेंगे और अगर ज्यादा कार्रवाई हुई हमारे खिलाफ तो जान से मार देंगे।
इस बात की जानकारी जब पीड़िता ने अपने पति और ससुर को दी तब उन्होंने अनाआवेदक गणों को एक साथ बुलाया और बातचीत करने के बाद ₹700000 का एक चेक वापस किया। लेकिन वह चेक भी ओवरराइटिंग की वजह से बैंक ने वापस कर दिया।
कुल मिलाकर पीड़िता अपने आप को न केवल ठगा हुआ महसूस कर रही है बल्कि अपने जीवन की गाढ़ी कमाई के लूट जाने का अफसोस भी उसे हो रहा है पैसा वापस कराने के लिए उसने अधिकारियों से गुहार लगाई और कार्यालयों के चक्कर भी लगाए परंतु अब तक उसे कोई राहत नहीं मिल पाई है। देशभक्ति और जन सेवा का जज्बा लेकर कानून की रक्षा करने का दम भरने वाला महकमा भी इस विषय में पीड़िता की कोई मदद नहीं कर पा रहा है।

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