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प्रकृति ने हरियाली से किया श्रृंगार बारिश में खिल उठे झरने

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सतना रामनगर-  रामनगर तहसील से 20 कीलोमीटर दूर मार्कण्डेय स्थित प्राकृतिक धरोहर के मनोरम दृश्य आसपास के क्षेत्रों में कई जगह देखने को मिल जाते हैं। भले ही इन क्षेत्रों का पर्याप्त विकास न होने से इन्हें ज्यादा ख्याति प्राप्त नहीं हो पा रही है।  जंगलों के बीच से बहकर आने वाले कल-कल ध्वनि और घने वृक्षों की लंबी श्रंखला से सजी सुरम्य वादियां सहित लगभग एक  प्राकृतिक क्षेत्र में देखने को मिल जाते हैं। जहां अपने परिवार के साथ एक दिन में ही यह पूरी यात्रा कर सकते हैं। यहां पहुंचकर मन में एक नई उमंग पैदा हो जाती है। वहीं दूसरा रामनगर  तहसील से 5 किलोमीटर की दूरी में  स्थित सुहौला गांव   में प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। जहां पहाड़ी के बीच गिरता है कल कल ध्वनि में पानी  अपनी प्राकृतिक सौंदर्य के लिए  के पर्यटकों को बारह माह आकर्षित करते हैं, लेकिन इन पर्यटन स्थलों से हटकर अनेकों  ऐसे जो अधिक बारिश के समय खिल उठते हैं। जिनमें सुहौला ,  में  वारिश मैं गिरते जल का सौंदर्य देखते ही बनता है। तो अपने आप मैं प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है मार्कण्डेय में पर्यटन स्थल है जहां कल कल करती ध्वनि सोननदी गंगा बहती है सुहौला में धारा किसी जल प्रपात के सौंदर्य से कमतर नही है ,यहां वारिश के दिनों मैं आसपास के लोग बड़ी संख्या में पहुंचकर प्रकृति का आनंद उठा!
बारिश में खिल उठे झरने,  एक स्थान पर पहाड़ों से गिरता है पानी में प्राकृतिक धरोहर के मनोरम दृश्य आसपास के क्षेत्रों में कई जगह देखने को मिल जाते हैं।  में प्राकृतिक धरोहर के मनोरम दृश्य आसपास के क्षेत्रों में कई जगह देखने को मिल जाते हैं। लेकिन इन क्षेत्रों का पर्याप्त विकास न होने से इन्हें ज्यादा ख्याति प्राप्त नहीं हो पा रही है। जंगलों से बहकर आने वाले कल-कल ध्वनि और घने वृक्षों की लंबी श्रंखला से सजी सुरम्य वादियां सहित लगभग मार्कण्डेय   क्षेत्र में देखने को मिल जाते हैं। जहां अपने परिवार के साथ एक दिन में ही यह पूरी यात्रा कर सकते हैं। यहां पहुंचकर मन में एक नई उमंग पैदा हो जाती है। पर्यटन स्थलों से हटकर अनेकों  ऐसे जो बारिश के समय खिल उठते हैं।  पहाड़ी के बीच से 100 फीट ऊंचाई से गिरते जल का सौंदर्य देखते ही बनता है। यहां इन दिनों आसपास के लोग बड़ी संख्या में पहुंचकर प्रकृति का आनंद उठा। बारिश के होते ही मार्कण्डेय   की पहाड़ियों ने किया हरियाली का श्रृंगार प्राकृतिक सौंदर्य का स्वर्ग कहे जाने वाले  मार्कण्डेय  पर्यटन , में बहती सोननदी  चारों तरफ फैली हरियाली,से मनोरम हुआ पर्यटन  का बातावरण मार्कण्डेय  की पहाड़ियों में लगे पेड़ पौधो पर हरियाली लद गई पहाडियो में  कलरव करते पक्षियों स्वछन्द विचरण करते वन्य जीव नृत्य करती मोर प्राकृतिक सौंदर्य अनोखी छटा विखेरती मन को आनंदित करने वाली ओर इस अदभुत प्रकृति का श्रृंगार  की बात की जाये तो यहाँ पर प्रकृति की सुन्दरिता देखते ही बनती मार्कण्डेय  स्थल से ऊपर पहाड़  से नजर डालते ही आसपास तक पर्वतों की घनी वादियां व् छोटे छोटे जलाशय का प्राकृतिक सौंदर्य  को एक वार देखने वाला देखता ही रह जाता है जहाँ वारिश के होते ही प्रकृति अपना श्रंगार करती और इस श्रंगार को निहारने वालों की भीड़ पूरी वारिश भर इस पर्यटक स्थलों मैं बनी रहती जहाँ पर भारी संख्या रामनगर के  आसपास सहित कई स्थानों  से  सेलानी हर वारिश के मौसम मैं इस प्राकृतिक सौंदर्य को देखने वालो की भीड़ को   अधिक वारिश होने का इंतजार एक वार वारिश होते वर्ष के अंत तक चलेगी जिसमे  नजारा  पर्यटक स्थल पर अच्छी खासी भीड़ प्राकृतिक सौंदर्य देखने के लिए आई और मार्कण्डेय  का  नजारा सहित कल कल करते नालों झरनो की जल धारा से उठती मधुर मन को आनिंदित कर देती है और लोगों को प्रकृति सौंदर्य मनोहारी झांकी आँखों से चाहकर भी ओझल नही होती है। जहां प्रतिवर्ष इस मार्कण्डेय  प्राकृतिक दृश्य नजारा  को देखने प्रतिदिन लोग बने ही रहते है वही लॉक डाउन के चलते इस वर्ष कम संख्या में लोगों का आना जाना हुआ है ।साथ ही शासन की गाइडलाइन के अनुसार मार्क्स सैनिटाइजर व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए कम संख्या में लोगों का जाना निश्चित किया गया है। जानकारी देते हुए लोगों ने बताया कि मार्कण्डेय  पर्यटक स्थल को देखने के लिए  गाइडलाइन जारी की है जिसके अनुसार लोगों को वहां कम संख्या में जाना ,सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना ,मार्क्स का उपयोग, सैनिटाइजर का प्रयोग करना, खाना न बनाना आदि की गाइड लाइन जारी की है जिनका उपयोग करके ,इन पर्यटक स्थल को घुमा जा सकता है।  मार्कण्डेय  में चारों तरफ जंगल ही जगल नजर आते है बीच में बहती सोननदी का पानी जो अपने कल कल की ध्वनि से अपने ओर आकषिर्त करता है  वहीं मार्कण्डेय में शिव की मदिंर  है जहां सावन में इन दिनों काफी भीड देखा जाता है  15 किलोमीटर तक पेड पौधो से ढका रहता है रास्ता   मार्कण्डेय में बहती सोननदी का पानी में नाव की माध्यम से घूमा जा सकता है जो अपने ओर लोगों को आकर्षित करता है और क्षेत्र में पक्षियों की चहल-पहल रहता है.  सुहौला में पहाडियो के बीच से कल कल की ध्वनि से पहाडियो के बीच  से गिरता है पानी जो लोगों को आपने ओर आकर्षित करता है रामनगर क्षेत्र के आसपास लोगों यहां पहुँचते ही रहते है वहीं पास में बंदरों   का झुंड भी देखने को मिलता है जंगलों में पक्षी को चहल पहल रहती जिसे लोगों का ये पंसद आता है.

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