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प्रयागराज के दो निर्माताओं की फिल्म आमने-सामने

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मुम्बई से शामी एम इरफ़ान की रिपोर्ट। शुक्रवार को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने वाली फिल्मों में “थप्पड़”, “कहता है यह दिल” और “केयरलेस” तीन ऐसी फिल्में हैं, जिनकी शूटिंग उत्तर प्रदेश में हुई है। जबकि “कहता है यह दिल” और “केयरलेस” में कई और समानताएं हैं।

इस सप्ताह आधा दर्जन से अधिक फिल्मों का प्रदर्शन हुआ है। सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने वाली फिल्मों में “थप्पड़”, “कहता है यह दिल” और “केयरलेस” तीन ऐसी फिल्में हैं, जिनकी शूटिंग उत्तर प्रदेश में की गई है। जबकि “कहता है यह दिल” और “केयरलेस” में लोकेशन्स के अलावा भी कई समानताएं हैं। इन दोनों की समीक्षा से पहले इस पर डालते हैं एक नजर।
फिल्मकार अनुराग सिन्हा ने अपनी फिल्म थप्पड़ के शुरुआत में ही सीएम योगी समेत कई लोगों का आभार व्यक्त किया है। लेकिन इलाहाबाद के इन दो निर्माताओं ने प्रदेश सरकार के लोगों का आभार व्यक्त करना जरूरी नहीं समझा, जबकि इन सभी फिल्मकारों के मन में एक लालच होगी कि इन्हें उत्तर प्रदेश सरकार से सब्सिडी मिले। प्रयागराज के दोनों फिल्मकारों ने अपनी फिल्म की शूटिंग 2018 और 2019 के दौरान प्रयागराज में ही की है। ऐसी फिल्मों को सरकार द्वारा सब्सिडी देना चाहिए या नहीं, इस पर सरकार को स्वयं विचार करना होगा।
कहता है यह दिल के निर्माता आर के शर्मा और केयरलेस के निर्माता प॔कज कुमार दोनों प्रयागराज के रहने वाले हैं और दोनों की फिल्म का टाईटल क से ही शुरू होता है। यह बात और है कि सोशल मीडिया एफबी पर पंकज कुमार ने यह लिखा हुआ है कि वह मुंबई में रहते हैं। पता नहीं क्यों ऐसा झूठ बोल कर वह कौन सा लाभ लेना चाहते हैं। दोनों ने अपनी फिल्म को एक ही दिन रिलीज किया है। सुनने में आया है कि, प्रयागराज में दोनों ने सिनेमा हाल के लिए प्रतिस्पर्धा की है और अपनी फिल्म को अधिक से अधिक स्क्रीन में लगाने का प्रयास किया। अच्छी बात है और दोनों अपने प्रयास में सफल भी रहे। फिल्म का निर्माण कर लेने से ज्यादा बड़ी बात है उसको रिलीज करना।
एक फिल्म के निर्माता आर के शर्मा ने फिल्म रिलीज करने के लिए श्रीवास्तव की मदद ली है और दूसरी फिल्म के निर्माता पंकज कुमार जो कि श्रीवास्तव हैं, उन्होंने अपनी फिल्म लोल फिल्म्स के पवन शर्मा के माध्यम से रिलीज किया है। कहता है यह दिल मुंबई में मूवी स्टार 24 कैरेट और गैलेक्सी बांद्रा के G7 में प्रदर्शित हुई है। यहां पर इस फिल्म का पहले दिन बॉक्स ऑफिस कलेक्शन ठीक-ठाक था और यह फिल्म 150 स्क्रीन के साथ पायनियर एंटरटेनमेंट द्वारा आल इंडिया रिलीज हुई है।ऐसा फिल्म वितरक ने बताया है। केयरलेस फिल्म मुम्बई बांद्रा के नंदी सिनेमा में एक शो के साथ प्रदर्शित हुई है। नंदी सिनेमा सी ग्रेड/ भोजपुरी फिल्मों के लिए जाना जाता है। नाइट शो में प्रदर्शित यह फिल्म शुक्रवार को पहले ही दिन रात के 10 बजे के बाद शुरू हुई। फिल्म देखने के लिए कुल मिलाकर दस- बारह लोग उपस्थित थे। फिल्म वितरक पवन शर्मा यहां मिले लेकिन कुल कितने स्क्रीन में रिलीज हुई पूछने पर सही जवाब नहीं दिया।
दोनों फिल्मों को यूए सर्टिफिकेट सेंसर बोर्ड द्वारा दिया गया है। दोनों फिल्म की कहानी कॉलेज में पढ़ने वाले युवाओं से संबंधित है। एक फिल्म में नायिका की मृत्यु होती है तो, दूसरी फिल्म में नायक मरता है। दोनों फिल्म की पटकथा कमजोर है। पोस्ट प्रोडक्शन वर्क सही तरीके से नहीं किया गया है और दोनों फिल्मों के एडिटर हैं प्रकाश झा, जिन्होंने अपना काम सही तरीके से नहीं किया। दोनों फिल्म बहुत ज्यादा ट्रिम करने की जरूरत है। इन निर्माताओं ने टेक्निकल टीम बहुत अच्छी और अनुभवी लोगों को ले करके बनाई थी। दोनों फिल्मों के कैमरामैन बहुत ही अनुभवी हैं और दोनों फिल्म में कैमरा वर्क बहुत अच्छा है। आरके शर्मा ने डायरेक्शन की बागडोर खुद संभाली है, जबकि पंकज जी ने डायरेक्शन के लिए अपनी ही कास्ट के व्यक्ति को डायरेक्टर बना दिया है। कहता है यह दिल का डायरेक्शन दमदार नहीं है और केयरलेस के डायरेक्टर ने भी कोई तीर नहीं मारी। केयरलेस को देखते हुए ऐसा लगता है आप दूरदर्शन का धारावाहिक देख रहे हैं। जबकि इस फिल्म में बहुत ही ज्यादा उत्तेजक और मादक दृश्य खासकर के गानों में आपको देखने को मिलेगा। यह फिल्म कुछ बोल्ड भी कही जा सकती है। इसे आप परिवार के साथ देखने में थोड़ा हिचकिचायेंगे, जबकि पहली फिल्म को देखने के लिए आप परिवार के साथ जाना पसंद करेंगे।
दोनों फिल्म के फिल्मकारों का दावा है कि उन्होंने अपने शहर के कलाकारों को प्राथमिकता दी है। दोनों फिल्म देखने के बाद मुझे तो ऐसा कुछ नहीं लगा। यह कथन दोनों फिल्मकारों का झूठा ही है। इन फिल्मकारों ने या तो अपने नाते रिश्तेदारों को फिल्म में खड़ा किया है या कुछ एक कलाकारों को फिल्म के छोटे-मोटे दृश्यों में खड़ा कर दिया है। जबकि इन्हें चाहिए था कि स्थानीय कलाकारों को वरीयता देते। यूपी के लोग फिल्म देख कर इस बात का फैसला खुद करेंगे। मुझे भी फिल्म देखने वालों की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
एक बात और दोनों फिल्म में दोनों फिल्म निर्माताओं के दर्शन आपको अवश्य होंगे। इन निर्माताओं ने भी अपनी झलक अपनी फिल्म में दिखाई है। फिल्म बनाकर सिनेमाघरों में रिलीज करना बहुत बहादुरी का काम है। इन दोनों निर्माताओं को सलाम करते हुए इनकी साहस के लिए मुबारकबाद देना चाहिए। इनकी फिल्मों को सिनेमाघर में जाकर एक बार देखना तो बनता है बॉस! फिल्म देखें और आपको कैसी लगी, हमें भी अवगत कराएं। मैं फिर मिलूंगा किसी और फिल्म की चर्चा के साथ। अभी तो कहता है यह दिल डोन्ट बी केयरलेस! (वनअप रिलेशंस न्यूज डेस्क)
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(मुम्बई से शामी एम इरफ़ान की रिपोर्ट)

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