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फर्जी नियुक्ति के आधार पर पदासीन, आखिर किसका है संरक्षण?

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नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ ईएसओ का ज्ञापन।

जबलपुर | चुनावों का मौसम जब भी आता है विपक्षी राजनीतिक दल सत्तारूढ़ दल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाता है। इसी तरह सरकारी विभाग के अधिकारियों पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहते हैं। हर राजनीतिक दल भ्रष्टाचार पर नकेल कसने की बात भी करता है लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि यह सारे वादे खोखले ही होते हैं। क्योंकि अक्सर जब किसी विभाग में पदस्थ किसी भ्रष्ट अधिकारी की कारगुजारी उजागर की जाती हैं तो प्रशासन मौन साध कर बैठ जाता है। कभी आवाज उठाने वाले को ही दोषी ठहराया जाता है या फिर कभी उसका मुंह बंद कर दिया जाता है। लेकिन भ्रष्ट लोगों पर कार्यवाही ना के बराबर होती है। कुल मिलाकर भ्ररष्टाचार के खिलाफ उठती हर आवाज नक्कारखाने में तूती की आवाज क्यों साबित होती है यही आज का है यक्ष प्रश्न?

वर्तमान में जो मामला चल रहा है वह है नगर निगम अपर स्वास्थ्य आयुक्त भूपेंद्र सिंह बघेल की नियुक्ति और उनके द्वारा किए गए भ्रष्टाचार को लेकर। ई एस ओ संगठन ने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ ना केवल आवाज बुलंद की बल्कि सतत संघर्ष जारी है। समस्या यह है कि बड़े बड़े अधिकारियों को ज्ञापन देने के बावजूद भी आज तक कोई कार्यवाही होती हुई नजर नहीं आती। प्रशासन के अंदर खाने क्या खिचड़ी पक रही है यह तो आने वाला वक्त बताएगा लेकिन वर्तमान में कुछ होता हुआ नजर नहीं आता।
आज दिनांक 10/08/2020 को अखिल भारतीय इंजीनियरिंग छात्र संगठन ईएसओ इंडिया द्वारा संभागायुक्त कार्यालय के सामने विशाल धरना प्रदर्शन किया | ईएसओ के राष्ट्रीय महासचिव पवन देवक एवं राजकुमार चक्रवर्ती के नेत्रत्व मे ईएसओ पदाधिकारियों ने जबलपुर नगर निगम मे फर्जी नियुक्ति के आधार पर स्वास्थ्य अधिकारी बन बैठे भूपेंद्र सिंह के खिलाफ लगातार एक माह से ज्ञापन धारणा प्रदर्शन किया जा रहा है पर वरिष्ठ अधिकारियों को सारी सच्चाई पता होने के बावजूद कार्यवाही नहीं की जा रही है वरिष्ठ अधिकारियों के उदासीनता के चलते भूपेंद्र सिंह द्वारा लगातार दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करते हुए सबूतों को मिटाने का काम किया जा रहा है | जिसको लेकर ईएसओ इंडिया द्वारा आज पुनः संभागयुक्त महोदय को लिखित ज्ञापन सौंपा गया जिसमे ईएसओ इंडिया के राष्ट्रीय महासचिव पवन देवक ने बताया की जबलपुर नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी भूपेंद्र सिंह बघेल की शिकायत प्रेषित करते हैं की किस तरह से भूपेंद्र सिंह द्वारा वर्ष 1995 से लगातार अपने पद का दुरुपयोग किया जा रहा है | 07.04.1988 को उपयंत्री पद पर पहली बार नियुक्ति नगर निगम रीवा मे हुई , तत्पश्चात अवैध तरीके से फर्जी पदोन्नति का लाभ लगातार भूपेंद्र सिंह द्वारा उठाया गया | भूपेंद्र सिंह द्वारा माननीय उच्च न्यायालय मे याचिका के माध्यम से स्थगन भी ले लिया गया परंतु माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रकरण क्रमांक CA 6645/2010 मे पारित आदेश दिनांक :-24.01.2013 के अनुसार जबलपुर नगर निगम मे हुई पदोन्नति को अवैध माना गया था परंतु फिर भी दस्तावेजों से छेड़छाड़ करते हुए सच्चाई को छुपाया गया और अपने पद का दुरुपयोग करते हुए करोड़ों का भ्रष्टाचार किया गया जिसकी जांच लोकयुक्त पुलिस जबलपुर द्वारा की गयी थी |

वर्तमान मे इस अधिकारी द्वारा किए गए घोटालों का पर्दाफाश भी ईएसओ इंडिया द्वारा किया गया |

स्वास्थ्य विभाग प्रभारी भूपेंद्र सिंह द्वारा किए गए घोटाले का काला चिट्ठा

सुपर सकर घोटाला :- शहर मे सीवर लाइन का उपयोग अभी शुरू भी नहीं हुआ और भूपेंद्र सिंह द्वारा स्वास्थ्य विभाग का प्रभारी होने के कारण बिना पावर के लगभग 5 करोड़ की कीमत वाली सुपर सकर मशीन खरीद ली गयी जिसका कोई रिकॉर्ड नगर निगम की भंडार शाखा मे नहीं है अवैध तरीके से मोटे कमीशन की लालच मे इस मशीन की रकम नगर निगम के खजाने से कर दी गयी जबकि इतनी बड़ी रकम की खरीदी का अधिकार स्वास्थ्य विभाग प्रभारी को नहीं था और इस मशीन से जुड़े दस्तावेज़ भूपेंद्र सिंह द्वारा दबा कर रखे गए हैं जिसकी तत्काल जांच करते हुए संबन्धित दस्तावेज़ जप्त करने चाहिए |

टिपर खरीदी घोटाला :- भूपेंद्र सिंह द्वारा पहले 105 टिपर और पुनः 56 टिपर जिनकी कीमत लगभग 25 लाख दर्शा कर खरीदी कर ली गयी जबकि यह उपकरण किसी कारी मे उपयोग नहीं लिया जा रहा इससे संबन्धित दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की गयी और भुगतान बिना किसी अनुमति के कर दिया गया |

सेनेटाइजर घोटाला :- जिस वक्त देश कोरोना महामारी से जेएनजी लड़ रहा है उस वक्त भूपेंद्र सिंह जैसे अधिकारी करोड़ों की काली कमाई मे व्यस्त थे शहर मे सेनेटाइजर किए जाने के नाम पर 2 करोड़ का फर्जी बिल स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा पास कर दिया गया जिसकी किसी को भनक तक नहीं लगी | 2 करोड़ के घोटाले के चक्कर मे भूपेंद्र सिंह खुद को निगम का मालिक समझ बैठे और महामारी के बीच करोड़ों का घोटाला कर दिया गया |

बैनर पोस्टर घोटाला :- कोरोना महामारी की जागरूकता के नाम पर स्वास्थ्य अधिकारी भूपेन्द्र सिंह द्वारा 85 लाख रुपए नगर निगम के खजाने से निकाल कर बैनर और पोस्टर के नाम पर फर्जी बिल पास करते हुए प्रशासन को 85 लाख का चूना लगा दिया गया जिसकी भनक किसी को नहीं हुई परंतु निगम मे पदस्थ अन्य अधिकारी भूपेंद्र सिंह द्वारा लगातार किए जा रहे घोटाले के बारे मे जानते हुए भी विवश रहे|

कंपेक्टर मशीन घोटाला :- भूपेंद्र सिंह द्वारा डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के नाम पर लगभग 25 लाख रुपए की 15 कंपेक्टर गाडियाँ बिना किसी अनुमति के बिना किसी आधार के खरीद ली गयी और एस्सेल कंपनी के साथ आपसी मिलीभगत के चलते कंपनी को किराये पर दे दी गयी जिसका भुगतान लगातार निगम के खजाने से किया जा रहा है | जबकि ये सभी गाडियाँ स्टोर मे जंग खा रही रही है सिर्फ कागजों मे ही करोड़ों का लगातार भुगतान किया जा रहा है |

जेम पोर्टल घोटाला :- आपको अवगत कराना चाहते हैं की स्वास्थ्य अधिकारी भूपेंद्र सिंह द्वारा अपने ही खास विक्रेता मदान कंपनी से जरूरत से ज्यादा और अत्यधिक कीमत पर ऑनलाइन खरीदी भी कर ली गयी जिसकी जानकारी विभाग के अन्य अधिकारियों को भी है जेम पोर्टल से केवल एक ही कंपनी से सभी की गयी खरीदी मे मोटे कमीशन की लालच मे सारा घोटाला किया गया |

मोबाइल टौयलेट घोटाला :- कांग्रेस सरकार के दौरान नर्मदा महाकुंभ जैसे पावन आयोजन की आड़ मे इस अधिकारी द्वारा दर्जन से अधिक मोबाइल टॉइलेट की खरीदी कर ली गयी पर सिर्फ कागजों मे वास्तविकता मे यह वाहन कहाँ है कोई नहीं जानता भूपेंद्र सिंह द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए लाखों करोड़ों का घोटाला कर दिया गया और किसी को भनक तक नहीं लगी |

आहूजा स्पीकर घोटाला :- डोर टू डोर कचरा कलेक्शन की गाड़ियों मे लाग्ने वाले स्पीकर जिनकी वास्तविक कीमत 1500 से 2500 तक की होती है पर भूपेंद्र सिंह द्वारा 10000 रु प्रति स्पीकर की दर से भुगतान कर दिया गया जो अपने आप मे बड़ा घोटाला है जिसकी विस्तरत जांच की जानी चाहिए |

  आज तक स्वास्थ्य अधिकारी भूपेंद्र सिंह द्वारा करोड़ों की खरीदी की गयी पर नगर निगम की भंडार शाखा मे किसी भी प्रकार के दस्तावेज़ इस अधिकारी द्वारा नहीं सौंपे गए | और न ही कोई जानकारी रिकर्ड मे हैं यह सभी फाइलें भूपेंद्र सिंह के कब्जे मे हैं जिसके कारण आज तक खुलासा नहीं हो पाया | नगर निगम को आर्थिक तंगी का शिकार बनाने वाले इस अधिकारी पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी जबकि फर्जी नियुक्ति के आधार पर इस अधिकारी ने निगम को करोड़ों का चूना लगा दिया |

  संगठन मांग करता है की एसे भ्रष्ट अधिकारि को तत्काल निलंबित करते हुए जांच की जाये और कार्यवाही की जावे साथ ही इनके द्वारा निगम और शासन प्रशासन को हुए नुकसान की भरपाई भी कराई जावे | यदि 7 दिवस के भीतर इन अधिकारी पर कार्यवाही नहीं की गयी तो पूरे प्रदेश भर मे संगठन अब उग्र आंदोलन करने बाध्य होगा साथ ही जब तक एसे भ्रष्ट अधिकारी को निलंबित नहीं किया जाएगा तब तक संगठन द्वारा निगम परिसर मे ही आमरण अनशन किया जाएगा जिसकी जिम्मेवारी निगम प्रशासन और शासन की होगी |

आज ज्ञापन प्रदर्शन के दौरान ईएसओ इंडिया के राष्ट्रीय महासचिव पवन देवक,राजकुमार चक्रवर्ती, विपिन दत्ता ,प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष आसिफ आली ,जिलाध्यक्ष विपिन विश्वकर्मा ,महामंत्री आर्यन यादव ,कार्तिक चौरसिया,समेत समस्त पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे |

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