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फसलों के भुगतान में देरी से आक्रोशित हैं किसान

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फसलों के भुगतान की मांग को लेकर किसान सेवा सेना संगठन द्वारा विपणन संघ कार्यालय का घेराव किया गया।

जबलपुर। विगत एक वर्ष से जिले के किसान अपनी फसल के भुगतान की मांग को लेकर कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं और लगातार उन्हें भटकाया जा रहा है। किसान जब भी अधिकारियों के पास आते हैं तो अधिकारीगण उन्हें दो-तीन दिन में भुगतान हो जाने की बात कहकर चलता कर देते हैं। लेकिन भुगतान नहीं होता। धान और गेहूं दोनों का भुगतान बाकी है। जब किसान से फसल खरीदी जाती है तब तमाम मापदंडों के अनुरूप ही माल को खरीदा जाता है। विपणन संघ समिति प्रबंधकों द्वारा फसल की जांच की जाती है और जब ऊपज जांच में सही पाई जाती है उसके बाद ही उसको खरीदा जाता है। इसके बाद ना जाने ऐसा क्या गड़बड़ सामने आती है कि जब भुगतान की बारी आती है तो परेशान किसान को होना पड़ता है। उसे अपने खून पसीने की कमाई को पाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ता है। किसानों की ओर से संतोष राय ने इस बात का भी आरोप लगाया कि जब फसल की खरीद होती है उस समय भी किसानों से कमीशन लिया जाता है, पैसा लिया जाता है उस पैसे की बंदरबांट होती है यदि कहीं उस बंदरबांट में किसी खरीद केंद्र की तरफ से कमी रह गई तो उस केंद्र की फसल का भुगतान रोक दिया जाता है। आज सुबह जिला विपणन संघ कार्यालय का घेराव करीब ढाई सौ से अधिक किसानों ने किया किंतु वहां जिम्मेदार अधिकारियों से बातचीत से किसानों को संतुष्टि नहीं हो पाई। किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर कार्यालय पहुंचा और अपर कलेक्टर हर्ष दीक्षित से बात की अपर कलेक्टर ने उन्हें जल्द ही भुगतान हो जाने का आश्वासन दिया है साथ ही यह भी कहा है कि वह धार जो मानकों पर खरी नहीं उतर रही है उसका भी पूरा पैसा किसानों को दिया जाएगा वर्तमान समय में नीलामी करा कर जो पैसा आएगा वह किसानों को दिया जाएगा और इसके बीच समर्थन मूल्य और नीलामी मूल्य का जो अंतर रह जाएगा उस अंतर की पूर्ति भी राज्य सरकार के माध्यम से कराए जाने की बात पर कलेक्टर महोदय ने कही।
श्रीराम वेयरहाउस खरीद केंद्र क्रमांक 3 और 4 बेलखेड़ा सोसाइटी की तरफ से आए किसान ब्रजेश बादल ने बताया कि उनके यहां श्री राम वेयरहाउस हाउस में करीब साढ़े 6000 क्विंटल गेहूं खुले में रखा हुआ है वह अमानक घोषित कर दिया गया है। किसानों से कहा जा रहा है कि आप इसे वापस ले जाइए और किसानों का भुगतान ही रोक दिया गया है। इस बात को लेकर किसान आंदोलित हैं।

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