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बदहाली व उपेक्षा का शिकार है पतलोंन

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जबलपुर दर्पण गाडरवारा /पवन कौरव की रिपोर्ट

लगभग 5 वर्ष पूर्व ही ग़ांधी वार्ड में सम्मिलित हुए ग्राम पतलोंन की , तो यहां वरिष्ठ अधिकारी हों या शहर के जनप्रतिनिधि इन सभी की नजरों में पतलोंन हमेशा से ही उपेक्षा का शिकार होता आया है बात विकास की करें तो इन दिनो देखा जाए तो सबसे अधिक पतलोंन वासियों को ही बदहाली का शिकार होना पड़ रहा है इसका प्रमुख कारण यह भी है की इस गांव में गरीब तबके के लोग निवास करते हैं । जो सुबह होते ही अपने भरण पोषण के लिए गाडरवारा आने पर मजबूर है एक तरफ बेरोजगारी की मार झेल रहे युवा वहीं शासन की नजर पतलोंन की ओर ना पड़ना भी जिम्मेदार जनप्रतिनिधि ओर अधिकारियों के मुँह पर तमाचा है यहां बने एक पुलिया जिसकी अनेकों बार शिकायत करने के बाद भी फ़ाइल बनकर कचड़े में पड़ी हुई है अनेकों बार अधिकारियों द्वारा पुलिया का निरीक्षण किया गया पर आज तक निर्माण कार्य नही हो सका तो वही उस रास्ते से गुजरने वाले राहगीरों के लिए किसी दिन यह पुलिया मौत का कुआ साबित होगी ।

आवास योजना से वंचित सैकड़ो पात्र हितग्राही आज भी देख रहे अपने पक्का मकान बनने की बाट

सरकार चाहे किसी की भी हो पिसता गरीब ही है बरसात आते ही इन्ही गरीबो की समस्या दिन दो गुनी और रात चौगनी बढ़ जाती है क्योंकि ना ही सिर के ऊपर छत है ऒर ना ही सोने के लिए जमीन जी हां हम बात कर रहे हैं नरसिंहपुर जिले की गाडरवारा नगर पालिका क्षेत्र की जहां अधिकांश गरीब तबके के लोग निवास करते हैं लेकिन यहां जलजला पैसे व बाखरों वालों का है इस वर्ष गरीब लोगों ने ही कोरोना की सबसे ज्यादा मार झेली है । तो वो गरीब ही है जिसने 3 महीने बिना काम धंधा किये अपने परिवार का भरण पोषण कैसे किया ये तो बस वही जानता है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आवास योजना तो लागू की गई लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पात्र अपात्र घोषित करना जयचंदों पर निर्भर कर दिया जो अब गरीबो को मिलने वाले लाभ में रास्ते का कांटा बन रहे है वही दूसरी ओर आवेदन किसी ओर के नाम पर होता है और पैसे या राशि किसी ओर के खाते में जाति है जिनसे आज दिनाँक तक नगर पालिका गाडरवारा पैसे नही वसूल पाती तो वही जिनके पास ट्रेक्टर अनाप सनाप पैसा जमीन जायदाद उनको इस योजना में पहले लाभ प्राप्त हो रहा है वही जांचकर्ताओं एवं जिम्मेदार अधिकारियों की भी कार्यशैली पर सवाल खड़ा होता है । तो उसमें जिले के जिम्मेदार जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी भी मौन मौन नजर आ रहे हैं । पहले से मकान होने पर एवं जान पहचान ज्यादा होने पर इस योजना में लाभ जल्दी मिल जाता है यही नगर पालिका गाडरवारा की नीति है । वही लगातार नगर पालिका परिषद गाडरवारा में हो रहे भ्रष्टाचार पर उसके खिलाफ ना बोलने पर उन्ही जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की चुप्पी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती नजर आती है । सभी मामलों में संलिप्त अधिकारी बैखोफ बैठे भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते नजर आ रहे हैं । या यूं कहें कि इन अधिकारियों की वजह से योजनाओं का हो जाता है राम नाम सत्य । जी हां बात करे सम्बंधित विभाग के जांचकर्ता अधिकारियों की तो उन अधिकारियों की योग्यता पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा होता है जो समय – समय पर हितग्राहियों के बन रहे घर का मुआयना करने पहुचते है ।

स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत पर पलीता लगाती दिख रही पतलोंन कि हालत ।

जहां मोदी सरकार स्वच्छ भारत मिशन पर लाखों करोड़ों रूपए खर्च कर रही है वहीं ग़ांधी वार्ड स्थित पतलोंन में नगर पालिका गाडरवारा स्वच्छ भारत मिशन को पलीता लगाता नज़र आ रहा है । गाडरवारा नगर पालिका क्षेत्र के ग़ांधी वार्ड में आने वाले पतलोंन में सफाई का कोई नामोनिशान नहीं है । हर जगह गंदगी का ढेर ही दिखाई पड़ता है । गांव के रास्तों पर कूड़े के ढेर दिखाई देते हैं तो वहीं नालियां भी कूड़े से भरी मिलेंगी । हालांकि उक्त वार्ड के जनप्रतिनिधि व अधिकारियों का यह दायित्व बनता है कि वह वार्ड की साफ सफाई को लेकर जागरूक रहे लेकिन जिस तरीके से विकास की बात की जाती थी उस दृष्टिकोण से जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों ने भी जैसे स्वच्छ भारत मिशन को नज़र अंदाज़ किया हुआ है । जिस कारण प्रधान मंत्री का स्वच्छ भारत मिशन का सपना अधूरा ही दिखाई दे रहा है। वार्ड में कोई भी सफाई कर्मी सफाई करने नहीं आता और न ही गांव में एक भी नगरपालिका द्वारा रखा गया कोई कूड़ेदान नज़र आएगा । गांव का सारा कूड़ा कचरा गांव के ही बीचों बीच एक स्थान पर फेंक दिया जाता है। जिससे वहां पर कूड़े कचरा का अंबार लगा हुआ है। गांव की नालियों का भी ठीक ढंग से निर्माण नहीं हुआ है जिससे बारिश पड़ने पर नालियों का पानी रास्ते पर आ जाता है। ग्राम प्रधान से कई बार वार्डवासियों ने सफाई को लेकर कई बार मौखिक व लिखित शिकायत भी की लेकिन इस सुनवाई पर कोई कार्यवाई नहीं की जाती है । जिससे पतलोंन वासी भी परेशान हैं । वार्डवासियों का कहना है कि इस ओर यदि जल्द ध्यान नही दिया जाता है तो गंदगी के कारण गांव में बीमारियां फैलने का अंदेशा बना हुआ है ।

शासकीय पट्टे से भी अनेको गरीब परिवार आज भी वंचित ।

जी हां बात करे मिलने वाले आवास योजना के लाभ की तो नियमानुसार लाभ उसी को दिया जाता है जिसके पास अपनी जगह के संविधानिक कागज हों उस जगह का पट्टा हो तो बता दें कि आज भी ऐंसे दर्जनों गरीब परिबार है जो पट्टा ना मिलने के कारण आवास योजना से भी बंचित है । कुछ दिनों पूर्व कुछ लोगों को जो बाहर से आकर गांव में रह रहे हैं उनको पट्टे दिए गए थे एवं उन्हें ही पहले प्राथमिकता दी गई थी आज भी लोग यदि आवास योजना से वंचित है तो उसका एक कारण जरूरतमंदों को ना मिलने वाला पट्टा भी है रहवासियों का कई बार आरोप यह भी रहा है कि अधिकारियों द्वारा “मुँह चीन चीन रेवड़ी बांटी” गई है ।

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