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बलात्कार के आरोपी आरक्षक की जमानत खारिज

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जबलपुर दर्पण दमोह ब्यूरो भूपेंद्र साहू

दलित लड़की को शादी का झांसा देकर कई बार शारीरिक संबंध बनाने के आरोपी आरक्षक की अग्रिम जमानत माननीय विशेष न्यायाधीश आरएस शर्मा ने निरस्त कर दी है। करोना वायरस संक्रमण के कारण पक्षकारों की सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से की गई। मामले में शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक राजीव बद्री सिंह ठाकुर द्वारा की गई। मामला इस प्रकार है कथित पीड़िता की जान-पहचान 2 वर्ष पूर्व आरक्षक से हो गई थी। कथित पीड़िता एवं आरोपी एक-दूसरे को पसंद करते थे। आरोपी आरक्षक ने पीड़िता को शादी करने का झांसा देकर अपने एसपीएम नगर स्थित शासकीय आवास में ले जाकर उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए, पीड़िता ने आरोपी से कहा कि पहले शादी करो फिर शारीरिक संबंध बनाना परंतु आरोपी हमेशा यह कहकर कि शादी तुमसे ही करना है, लेकिन कुछ समय बाद करेंगे। दिनांक 28 जून 2020 को आरोपी अपने पिता के रिटायरमेंट में कटनी जाने का कहकर पीड़िता को उसके माता पिता के पास हिंडोरिया में छोड़ आया। उसके बाद आरोपी उसके पास लौट कर नहीं गया। पीड़िता ने कई बार आरोपी को मोबाइल किया, परंतु वह बात नहीं करता था जब कई दिन ऐसे हो गए तो पीड़िता, आरक्षक के एसपीएम नगर स्थित शासकीय आवास में पहुंची तो पता चला कि आरक्षक ने शादी कर ली है। पीड़िता ने आरोपी से जब बात की तो आरोपी ने कहा कि उसकी शादी हो गई है। अब तुम यहां मत आया करो। पीड़िता ने अपने साथ हुई घटना के संबंध में थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने पीड़िता की रिपोर्ट पर से आरोपी आरक्षक के विरुद्ध भादवि की धारा 376 एवं 376 (2) का मामला पंजीबद्ध किया। आरोपी की ओर से जमानत मांगते हुए तर्क किया गया कि उसकी लगभग तीन साल से पीड़िता से जान पहचान है और उसकी बातचीत होती थी परंतु उसने कोई अपराध नहीं किया बल्कि उसे दिनांक 23 जुलाई 2020 को पीड़िता ने फोन पर धमकी दी थी कि 20 लाख रुपए दो नहीं तो वह उसकी शादी तुडवा देगी। दिनांक 13 अगस्त 2020 को पीड़िता ने उसकी पत्नी को मोबाइल कर कहा कि उसकी शादी तुम्हारे पति से हो चुकी है। जब उसकी पत्नी ने उसकी बात पर विश्वास नहीं किया तो पीड़िता ने गोली मारने की धमकी दी और दो घंटे बाद पीड़िता और उसके साथी उसके आवास पर पहुंचे और उसके एवं उसकी पत्नी के साथ मारपीट कर दी।उस समय भी पीड़िता ने 20 लाख रुपये मांगे,पीड़िता ने रुपये नहीं मिलने के कारण रिपोर्ट की है। वहीं शासकीय अधिवक्ता राजीव बद्री सिंह ने मामला गंभीर होने के कारण जमानत देने का विरोध किया। न्यायालय द्वारा आरोपी के विरुद्ध लगे गंभीर आरोपो को देखते हुएआरोपी की ओर से प्रस्तुत अग्रिम जमानत निरस्त कर दी।

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