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भाजपा सरकार के चौथे कार्यकाल में सेमरिया नंबर वन

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रवि शंकर पाठक की रिपोर्ट
रीवा। पीएम मोदी की लोकप्रियता के कारण ही भाजपा एशिया की सबसे अधिक सदस्यों वाली पार्टी बनने में सफल हुई है। विंध्य प्रदेश को भले ही कुछ संकीर्ण मानसिकता वाले जनप्रतिनिधि अपनी जागीर समझने की भूल कर बैठे हैं।
पिछले पंद्रह साल भाजपा सरकार के बेमिसाल रहे, इसमें कोई दोराय नहीं है।
उसी दौरान विंध्य प्रदेश के रीवा में विकास की सुनियोजित गंगा बहाई गई।
मध्य प्रदेश में भाजपा ने चौथी बार अपनी सरकार कैसे बनाई है यह बात पूरा देश बखूबी जानता है।
विगत 24 मार्च 2020 को शिवराज सिंह चौहान ने चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। भाजपा सरकार के इस चौथे कार्यकाल में विंध्य प्रदेश को किसी तरह की खास उपलब्धि मिलने की कोई खास उम्मीद नहीं है।
मध्य प्रदेश में चौथी बार भाजपा सरकार काबिज होने और प्रायोजित विकास पुरुष का सरकार से बाहर होने का गणित भी बहुत जटिल है।
अक्सर अपने आपको सबसे बड़ा खिलाड़ी समझने वाले ओवर कांफिडेंस लीडर्स भी गच्चा खा जाते हैं और अपना सबकुछ खो बैठते हैं ।
कुछ ऐसे ही हालात विंध्य प्रदेश के प्रायोजित विकास पुरुष के जीवन में यथार्थ बनकर सामने आ चुके हैं।
एक वह दौर भी रहा जब भाजपा सरकार की पहचान ही विकास पुरुष से हुआ करती थी। अमहिया यानी भाजपा सरकार का विंध्य प्रदेश में हेडक्वार्टर माना जाता था।
पंद्रह साल आगे पीछे जी हुजूरी बजाने वालों की फौज चला करती थी।
मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार ने अपनी जो चौथी पारी लेन देन के साथ शुरू की है, उसमें विंध्य प्रदेश के सबसे लोकप्रिय विकास पुरुष तो शामिल नहीं है , हां औपचारिकता पूरी करते हुए अमरपाटन विधायक रामखेलावन पटेल को जरुर विंध्य प्रदेश के कोटे से भाजपा सरकार में मंत्री बनाया गया। पिछले पांच माह से भाजपा सरकार की मौजूदगी के बावजूद रीवा जिले की राजनीति में ठहराव जैसे हालात अचानक निर्मित हो गये। सब कुछ सामान्य चल ही रहा था तभी पहली बार सेमरिया विधानसभा के जरिए विधानसभा पहुंचने वाले विधायक केपी त्रिपाठी का एक नया अंदाज सोशल मीडिया के माध्यम से सबके सामने आ गया। सेमरिया विधानसभा के ग्राम पंचायत सथनी में बदहाल सड़क सहित अन्य समस्याओं को लेकर परेशान ग्रामीणों ने सेमरिया विधायक केपी त्रिपाठी का काफिला रोक लिया।
जिस पर विधायक ने अपने संस्कारों के माध्यम से ग्रामीणों को समझाया कि बहुत ज्यादा नेतागिरी करने की आवश्यकता नहीं है। सेमरिया विधायक के तल्ख तेवर से सथनी ग्राम पंचायत में ग्रामीण जन आक्रोशित नजर आए।
सोशल मीडिया में सेमरिया माननीय का यह नया अवतार काफी वायरल किया गया।
हद तो तब हो गई जब ठीक दूसरे दिन सेमरिया विधायक केपी त्रिपाठी का एक और बड़ा कारनामा आदिवासियों की बस्ती के मामले में सामने आ गये हैं।
70 साल से जिस शासकीय भूमि पर आदिवासी बस्ती बसी हुई है उसे उजाड़ने की सौगंध सेमरिया विधायक ने खाई है।

यही वजह है कि माननीय आदिवासी बस्ती वाली जमीन पर एक भव्य गौशाला का निर्माण कराना चाहते हैं। कुल मिलाकर भाजपा सरकार की चौथी पारी में लगातार सेमरिया विधानसभा और वहां के विधायक केपी त्रिपाठी मीडिया में छाए हुए हैं। सोशल मीडिया में सेमरिया विधायक जैसे मास्टरमाइंड लीडर को देखने वालों की उत्सुकता बराबर नजर आती।
रीवा जिले में कुल आठ विधानसभा क्षेत्र आते हैं, इनमें चर्चाएं बटोरने का काम सबसे अधिक सेमरिया विधायक केपी त्रिपाठी कर रहे हैं। सथनी ग्राम पंचायत और आदिवासी बस्ती वाले मामले से सेमरिया विधायक सबसे अधिक जगजाहिर हुए हैं।
चौथी भाजपा सरकार के पांचवें महीने में रीवा, मनगवां, सिरमौर, देवतालाब, त्योंथर सहित अन्य विधानसभा में अजीब सी खामोशी बनी रहती है।
अकेले सेमरिया विधायक केपी त्रिपाठी की चहल-कदमी सोशल मीडिया पर बनी रहती है।
उन्होंने यह साबित कर दिया है कि लोकप्रियता के मामले में सेमरिया विधायक अपने राजनैतिक गुरु से कहीं भी कमजोर नहीं है।

साल 2018 के चुनावी परिणाम में चला मोदी मैजिक
पिछले पंद्रह सालों तक भाजपा का केंद्र बिंदु विंध्य प्रदेश में अमहिया हुआ करता था, लेकिन आज पहले जैसे हालात दूर दूर तक नजर नहीं आते हैं।
गाड़ियों का काफिला अमहिया की सड़कों पर खड़ा होता था, यह दृश्य भी अब दूर के ढोल सुहावने जैसे हो गये हैं। साल 2018 में हुआ विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए विंध्य प्रदेश में लकी साबित हुआ। मध्य प्रदेश में पहली बार भाजपा ने विंध्य प्रदेश की 30 विधानसभा सीटों में से 24 सीटों पर अपना झंडा गाड़ दिया था। मोदी मैजिक के कारण विंध्य प्रदेश में भाजपा ने इतिहास बना डाला। इन चुनावी परिणाम से उत्साहित होकर पंद्रह साल मलाई छानने वाले प्रायोजित विकास पुरुष भाजपा की इस ऐतिहासिक जीत को अपनी उपलब्धि बताने लगे।
उन्होंने अपने अगलगू और पिछलग्गू भाजपाइयों से भाजपा की जीत का श्रेय अपने आपको बताने के महाभियान में लगा दिया। जिस विंध्य प्रदेश की 24 सीटों पर जीत का श्रेय लेने का खेल किया जा रहा था उससे संबंधित लोगों को जब प्रायोजित विकास पुरुष की मंशा पता चली तो पहली बार खुलकर भाजपा के दूसरे विधायकों ने दिखावटी विकास के खिलाफ अपना विरोध भाजपा सरकार, संगठन और भाजपा आलाकमान के सामने जोरदार अंदाज में पेश किया।
बस यहीं से प्रायोजित विकास पुरुष के राजनैतिक कैरियर ढलान में आ गया। जो साहब विधानसभा चुनाव जीतवाने का दावा कर रहे थे,
वही देवतालाब में विधायक गिरीश गौतम, सीधी विधायक केदारनाथ शुक्ला, रामपुर बघेलान विक्की सिंह का अंदरूनी जमकर विरोध करवा रहे थे। कुल मिलाकर विधानसभा चुनाव 2018 में भाजपा की बड़ी जीत मोदी मैजिक पर आधारित रही।

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