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भारतीय प्रणिता देशपांडे , एक अंतरराष्ट्रीय सामाजिक युवा महिला

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रिपोर्ट : के . रवि ( दादा ) ,

महाराष्ट्र । कोरोना की वजह से पूरी दुनिया में हड़कंप मचा हुआ है . सभी देशों की सरकार, संस्था, चिकित्सा यंत्रणा अपने-अपने स्तर पर कोरोना का मुक़ाबला करने में जुटी हुई है . विविध देशों में चल रही इस मुसीबत के दौर में कुछ लोग अपने स्तर पर प्रयास कर रहे है और अपना सामाजिक योगदान दे रहे है . ऐसा ही एक उदाहरण है युरोप महाद्वीप की नेदरलैंड इस सुंदर देश की ऍड. प्रणिता देशपांडे .
कोरोना का संक्रमन शुरू हुआ तब से प्रणिता रेडियो, टीवी, समाचारपत्रों के माध्यम से जनजागरण करने का काम कर रही है . हालांकि प्रणिता पेशे से वकील है, लेकिन इस दौर में जो कार्य वह कर रही है, जो सराहने के काबिल है .
वैसे देखा जाए तो नेदरलैंड जाकर बहुत दिन नहीं हुये है उन्हें… उनके पति अद्वैत देशपांडे मर्क्स शिपिंग कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर है, उनका ३ साल का एक बेटा का है . प्राणिता ने बहुत ही कम समय में ही वहाँ के रहन-सहन में खुद को ढाल लिया . लेकिन इसमें वे अपनी भारत के मातृभूमि को नहीं भूली और न ही अपने मराठी संस्कारों को भूली है .
प्रणिता मूलत: विदर्भ के अकोला की है . चौथी कक्षा में थी, तभी उनके पिता का कैंसर की बीमारी से निधन हो गया . परिवार में 30 लोग, दादाजी अण्णासाहेब मनभेपकर ने उनकी ओर ध्यान दिया जिससे प्रणिता और बड़ी बहन प्राजक्ता का बचपन अच्छे से बिता . प्रणिता की शालेय शिक्षा भारत विद्यालय में हुई, जो उनके दादाजी ने ही शुरू की है . उनके दादाजी दिवंगत पंतप्रधान अटलबिहारी वाजपेयी के करीबी सहयोगी रहे है . एलआरटी कॉलेज से कॉमर्स लेकर अच्छे अंकों से बारहवीं पास हुई प्रणिता बचपन से ही वकील बनना चाहती थी . इलसिए वे अपने मामा स्वर्गीय . राजेंद्र गणोरकर और मंगेश गणोरकर के पास औरंगाबाद में रहने लगी . यहाँ के डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाडा विश्वविद्यालय से वर्ष २००८ में बी. एस. एल., एल.एल.बी. की पदवी प्राप्त की .
पढ़ाई के बाद प्रणिता ने कुछ साल आयसीआयसीआय बैंक, शेयरखान, एमडी इंडिया हेल्थकेअर सर्विसेस में कानून सलाहकार के रूप में काम किया . करारनामा, कंपनी निगमन एवं पंजीकरण, लीज करार, कान्वेंसींग, विल्स, प्रतिज्ञापत्र ऐसी विविध कानून से संबंधित कामकाज वे संभालती थी . इस तरह से प्राणिता को ९ साल का वकीली पेशे का अनुभव है . इन सभी के बीच प्रणिता ने सामाजिक कार्य भी बरकरार रखा . सातारा, रांजणगाव, पैठण, चिखलठाणा, जालना, अकोला, नागपुर आदि जगहों पर आयोजित विविध शिविरों में उसने हिस्सा लिया . जिससे भारत में महिला सुरक्षा विषयक जनजागरण करने में मदद हुई . इसके साथ ही दहेज प्रथा पर, लड़कियों के जन्म का स्वागत, बालविवाह बंदी कानून, गांवों में महिलाओं के लिए शौचालय की सुविधा और परिसर में महिला सक्षमीकरण के लिए काम किया . साथ ही पुणे की महान समाजसेविका सिंधुताई सपकाल के अनाथाश्रम में प्रणिता ने विविध कार्यक्रमों का आयोजन भी किया है .
सामाजिक कार्य के साथ-साथ प्रणिता ने राजनीति में भी अपनी सक्रिय भूमिका निभाई है . वे राष्ट्रवादी कांग्रेस दल जालना जिला उपाध्यक्ष (महिला आघाडी) रही है . प्राणिता का निरंतर कार्य करने के भाव के कारण वे दूसरे देश में यानि नेदरलैंड में जाने के बाद भी खाली नहीं रही . प्रथमत: प्रणिता ने वहाँ पर डच भाषा ए१ का पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया और उसे पूरा किया . उसे इस बात का पूरा भरोसा था की, नई भाषा सीखने से नेटवर्किंग कौशल बढ़ता है और उस देश की संस्कृति को समझने में आसानी होती है . वहाँ के लोगों के विचारों-उनके अनुभवों से रूबरू होना भी संभव होने के साथ-साथ वर्तमान में विश्व स्तर के संपर्क में संवाद साधने की क्षमता भी बढ़ती है .

प्रणिता फरवरी २०१८ से नेदरलैंड में फाउंडेशन फॉर क्रिटिकल चॉईस फॉर इंडिया की (एफसीसीआय) ट्रस्टी है । वर्ष २०२० से एफसीसीआय में युवा व्यवहार संचालक एवं सहसचिव के रूप में उसकी पदोन्नति हुई है . एफसीसीआय के विश्वस्त अनिवासी भारतीय संसाधन को एकत्रित क सामाजिक, राजकीय और आर्थिक क्षेत्र में भारत को नीतिपरक महत्त्व देने के बिंदुओं पर अध्ययन करने और कार्यक्रमों की शुरुआत और उसका क्रियान्वयन करने के लिए एक थिंक ट्रैक एवं केंद्रबिंदू है . प्राणिता से एफसीसीआय द्वारा आयोजित, युरोपियन संसद , ब्रसेल्स भेट में भी भाग लिया है . ३० जून २०१७ को एफसीसीआय आयोजित ऊर्जा संक्रमण (टेक्नोलॉजी, बिझिनेस एंड पॉलिसी पर्स्पेक्टिव) इस सेमिनार में भी प्राणिता ने एक वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त किए है . साथ ही २ दिसंबर २०१८ को हुई भारत की महिला सुरक्षा विषयक परिसंवाद में सभापति के रूप में भाग लिया है . इन सभी के अलावा इंडियन डायस्पोरा कॉन्फरन्स २०१७ इस कार्यक्रम की स्वयंसेवक एफडीसीआय और फिड, प्रांत उत्रेच युट्रेक्ट युनिवर्सिटी की ओर से १ दिसंबर २०१८ को भारत-युरोप के बीच कौशल गति” यह कार्य भी उसने संभाला है . साथ ही अक्तूबर २०१७ से प्रणिता ऑफ बीजेपी स्वयंसेवक के रूप में भी काम कर रही है .
थॉमस रॉयटर्स ने जून २०१८ में खबर दी थी की, भारत महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक देश है . कई समाचार-पत्रों ने चकित करनेवाली और कई लोगों को नाराज करनेवाली खबरे इस दौर में छापी थी . तब प्रणिता ने एफसीसीआय टीम के साथ रियलिटी चेक करने की ठानी थी . भारतीय डायस्पोरा संगठन ने, एफसीसीआय ने २ दिसंबर एक सार्वजनिक चर्चासत्र आयोजित किया था, जिसका निष्कर्ष प्रस्तुत किया . दर्शकों के साथ सवाल-जवाब भी हुए थे . सभापति के रूप में नेदरलैंड के एफसीसीआय सेमिनार में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए भारतीय कानून इस इस विषय पर प्रस्तुतीकरण किया था . नेदरलैंड्स के भारतीय दूतावास के जरिये १ जनवरी २०१८ को आयोजित संपूर्ण हिंदी कार्यक्रम में और नाटक में प्रणिता ने भाग लिया . भारत भवन, डेन हाग में ३० जून २०१८ को भारत की स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण से संबंधित कानूनन समस्याएँ एवं चुनौतियाँ इसमें अध्यक्ष के रूप में एफसीसीआय चर्चासत्र में भाग लिया है . इसी दूतावास के द्वारा ३० सितंबर २०१८ को आयोजित ग्रोटे केर्क द हेग में अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिन के औचित्य पर गांधी मार्च में भी उसने स्वयंसेवक के रूप में अपनी सहभागिता दर्ज थी और अहिंसा का संदेश दिया . इसके अलावा प्राणिता ने नेदरलैंड्स के गांधी सेंटर इंडियन दूतावास में छह महीने विदेशी लोगों को हिंदी भाषा पढ़ाने के लिए भी मदद भी की है . ८ मार्च २०२० को महिला दिन पर मंत्रालय में आयोजित कार्यक्रम में के हाथों महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री . उद्धव ठाकरे के हाथों प्रणिता के महिला सुरक्षा एवं भारतीय कानून” इस किताब का प्रकाशन हुआ . कार्यक्रम में महाराष्ट्र के गृहमंत्री . अनिल देशमुख, राजस्व मंत्री . बालासाहेब थोरात, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव . विकास खारगे प्रमुखता से उपस्थित थे . यह सभी के लिए बहुत ही गर्व की बात है। ३१ मई २०२० को एफसीसीआय आयोजित कोविड १९ के प्रथम वेबिनार की भी वक्ता रही है . नेदरलैंड में मनाए जानेवाले भारतीय पर्व-त्योहारों के सांस्कृतिक, पारंपारिक बिंदुओं पर एवं त्योहार से संबंधित उसके लेख लोकमत टाइम्स, सकाल,लोकशाही वार्ता, महाराष्ट दिनमान, फ्रि प्रेस जर्नल,तरूण भारत आदि मराठी-हिंदी अंग्रेजी समाचार-पत्रों एवं नेदरलैंड के वेबसाइट्स और पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए है और उनका लेखन का कार्य भी निरंतर जारी है . इसके अलावा प्रणिता विविध परियोजनाओं पर भी काम कर रही है . स्थानीय समुदाय में डच और भारतीय संस्कृति का हित संबंध को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ मुंबई के फ्री प्रेस जर्नल इस समाचारपत्र के लिए भी वे नियमित रूप से युरोपविषयक लेखन कर रही है . भारत सरकार के आयुर्वेद, योग एवं निसर्गोपचार केंद्रीय राज्यमंत्री . श्रीपाद नाईक, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री . जयराम ठाकूर के हाथों उसे सम्मानित किया गया है . अपूर्वा प्रॉडक्शन, मुंबई की ओर से इस साल महिला सन्मान ठाणे महानगरपालिका उत्कर्ष महिला पुरस्कार प्रदान किया गया है . प्रणिता की बड़ी बहन प्राजक्ता कुलकर्णी अपने पति के साथ अमेरिका के टेक्सास में रह रही है . उन्होंने भी पत्रकारिता में पदवी प्राप्त की है और वे भी पत्रकारिता कर रही है . पिता के जाने के बाद संयुक्त परिवार पद्धति के कारण दादा-दादी और आगे पढ़ाई के लिए औरंगाबाद में मामा मंगेश गणोरकर ,मामी अनिता का प्यार मिला . इसके लिए प्राणिता हमेशा ही उनके प्यार के प्रति, समाज कार्य के संस्कारों के प्रति कृतज्ञ है . स्वयं के अनुभवों से प्रणिता संयुक्त परिवार पद्धति का स्वीकार करती है . संयुक्त परिवार होने से ही पिता के जाने के बाद भी उसे परिवार का प्यार, संस्कार मिले, जिसे वो हमेशा अपने शब्दों, विचारों में व्यक्त करती है . स्वभाव से शीतल प्रणिता कहती है कि दादा-दादी और अपने मामा दिवंगत राजेंद्र गणोरकर को जिनका मुंबई- पुणे एक्सप्रेस महामार्ग पर एक दुर्घटना में उनका निधन हुआ, उन्हें कभी भी नहीं भूल सकती . दोनों बेटियाँ है…लेकिन उन्हें किसी बात का दु:ख नहीं बल्कि गर्व ऐसी उनकी अपने दोनों बेटियाँ, दामाद अच्छे और प्रेममय होने से समाधानी है . विदेश में जाने के बाद भी बहुत ही कम समय में वहाँ के जीवन पद्धति में समरस होते हुए अपने देश के गौरव के लिए हमेशा प्रयासरत ऍड प्रणिता देशपांडे को सलाम…वो हम सभी के लिए आदर्श है…प्रणिता को भविष्य के लिए असीम शुभकामनाएँ….

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