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माँ नर्मदा एवं सहायक नदियाँ रोज हो रही है छलनी।

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जिला प्रशासन की नाक के नीचे होता है रेत खनन का ये खेल।
नरसिंहपुर जिला वैसे भी राज्य में हमेशा नई सुर्खियों में रहता है। आये दिन यहाँ कुछ न कुछ ऐसा विशेष घटित होता है जिससे इस जिले की पहचान राज्य में अलग बन चुकी है। चाहे कानून व्यवस्था हो या प्रशासनिक व्यवस्था यहां के प्रमुख मुद्दे हमेशा से रहे हैं। विगत सालों से चाहे किसानों के मुद्दे हो या सबसे बड़ा अवैध खनन का मुद्दा हो। यहाँ की सियासत का खेल भी ऐसा ही रहा जो आया उसने अपना काम बनाकर चलता बना। एक की सरकार आयी तो दूसरा विरोध करता है, दूसरे की सरकार आयी तो पहला विरोध करता है। यहाँ विरोध की एक भी प्रथा कोई नई नहीं है। आम जनता भी अब समझने लगी है कि ये सब चोर चोर मौसेरे भाई जैसे है। पर इन सब में अगर किसी की हानि हो रही है, तो वह सिर्फ और सिर्फ माँ नर्मदा !
बेटा चाहे कुकर्मी हो जायें पर माँ कुमाता नहीं होता जिसका सच्चा उदाहरण यहाँ देखने को मिलता है। इन्ही कुकर्मी बेटों द्वारा कंही न कंही उसके आँचल को दिन प्रतिदिन, प्रतिबंध हो या न हो, शाम हो या रात हो बड़ी बड़ी मशीनों से नोंचा जा रहा है। माँ नर्मदा तो इनके लिए सिर्फ एक नाम मात्र है, इन कुकर्मी खननमाफियाओं बेटों के लिए और उस माँ की रेत तो एक प्रसाद स्वरुप है। उसी प्रसाद की कमाई से इनके ताज तख्तों की सजावट हो रही है। और यह सब नीचे से लेकर ऊपर तक चल रही उस माया का खेल है। इसी माया के खेल को वैध रूप में प्रदर्शित करने के लिए धनलक्ष्मी नामक कम्पनी को बैठाकर जीवनदायिनी माँ नर्मदा समेत दूधी,सीता रेवा जैसी नर्मदा की सहायक नदियों को रेत ठेका के नाम पर गिरवी रख दिया गया है। जिसके पास महज नौ खदानों से खनन करने की अनुमति द्वारा जारी की आशंका है। परंतु कंपनी द्वारा मानसून के चलते खनन प्रतिबंध के बाबजूद ग़ैर अनुमति प्राप्त खदानों एवं नदियों से भरी मात्रा में रेत का खनन किया जा रहा है। हाइवा-डंपरों के जरिये खाली पड़े खेतों में रेत का भंडारण किया जा रहा है। ऐसे में इन संरक्षित अधिकृत रेत माफियाओं पर नकेल कसने में प्रशासनिक दाय बाय हो रहा है। साथ ही रेत माफिया द्वारा क्षेत्र के छुटभैया नेताओं से मिलकर ये कृत्य कर रहे है जो स्थानीय स्तर पर उन्हें प्रोत्साहित करते है। यह खेल दिन के उजाले से लेकर रात के अंधेरे में डंपर-हाइवा से रेत का परिवहन और भंडारण के लिए रोज हो रहा है। रेत माफिया बड़े पैमाने पर रेत का भंडारण इसलिए करते हैं ताकि बरसात में रेत के दाम बढ़कर मोटी कमाई कर सकते हैं।
हालांकि, यह आरोप प्रत्यारोप का जोर जारी हो चूका है जिसके मार्फत में विगत दिवस कांग्रेस को शासन प्रशासन की चहेती बन चुकी धनलक्ष्मी कंपनी ने बैठे-बिठाए अवैध खनन का मुद्दा पकड़ा दिया है। कांग्रेस ने ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि प्रशासन के संरक्षण में धनलक्ष्मी कम्पनी एनजीटी के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए भारी मशीनों से जारी रखा है, जबकि प्रदेश भर में 30 जून से प्रदेश में रेत खनन पर प्रतिबंध लगा हुआ है। परन्तु एनजीटी के आदेशों की सारे आम अभेलना की जा रही है कंही न कंही वह आदेशों का परिपालन नरसिंहपुर जिले में न होना मानो वह प्रदेश के नियम कानून से ऊपर होता हुआ प्रतीक हो रहा है।

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