Publisher Theme
I’m a gamer, always have been.

रक्षा उत्पादन फैक्ट्रियों को दिया जाए पर्याप्त कार्य भार।

0 3

निजी हाथों में रक्षा उत्पादन सुरक्षा के लिए घातक:पाठक


जबलपुर। रक्षा उत्पाद निजी कंपनियों को ना सौंपे जाएं ।
ऑल इंडिया डिफेंस एम्पलाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एस.एन. पाठक ने बताया कि विगत दिवस दिनांक 9 अगस्त को रक्षा मंत्री द्वारा 101 रक्षा उत्पादों के आयात पर रोक लगाई गई है । आयात पर रोक लगाए गए रक्षा उत्पादों में फौरी तौर पर लगभग 21 ऐसे उत्पाद पाए गए हैं जो कि देशभर में फैली हुई 41 ऑडनेंस फैक्ट्रीयो द्वारा पहले से ही बनाए जा रहे हैं फिर भी उन का आयात किया जा रहा था। उन सभी उत्पादों की सूची तैयार कर एक विस्तृत पत्र इस संबंध में रक्षा मंत्री को ऑल इंडिया डिफेंस एम्पलाइज फेडरेशन द्वारा भेजा गया है। पत्र में विभिन्न उत्पाद जैसे कि ऐसे FSAPDS एम्युनिशन, स्नाइपर राइफल, धनुष, सारंग, अल्ट्रा लाइट होविटजसर, बुलेट प्रूफ जैकेट बैलेस्टिक हेलमेट, प्रहरी, तारपीडो लांचर, विभिन्न प्रकार के चार्ज, विभिन्न प्रकार के बम , पैराशूट, राइफल अपग्रेड सिस्टम, ऑटोमेटिक चार्ज, ट्रैक्टर, एलएमजी असाल्ट राइफल, सेल्फ प्रोपेल्ड गन, पिनाका इत्यादि तथा जिन ऑडनेंस फैक्ट्री में इनका उत्पादन होता है उनकी सूची भी सौंपी गई है। फेडरेशन द्वारा सरकार से यह मांग की गई है कि यह सभी उत्पाद निजी क्षेत्रों को उत्पादन हेतु नहीं सौंपे जाने चाहिए क्योंकि लगभग 340 कंपनियों के रक्षा उत्पादन लाइसेंस जारी किए गए हैं परंतु किसी भी कंपनी द्वारा रक्षा उत्पादन की शुरुआत नहीं की गई है । “इज ऑफ डूइंग बिजनेस ” के नाम पर सरकार द्वारा इन निजी कंपनियों को जिस तरह की सुविधाएं दी जा रही है उसे देखकर यह लगता है कि सरकार निजी कंपनियों पर बहुत ही ज्यादा मेहरबान है जबकि निजी रक्षा उत्पादन कंपनियां अभी तक अस्तित्व में ही नहीं आ पाई है। यह भी देखा गया है कि सरकार द्वारा रिलायंस डिफेंस जैसी कंपनियों को जमीने दी गई है जिसमें डिफेंस कांप्लेक्स बनाए जाने हैं यहां पर यह देखना चाहिए कि इनमें से कितनी कंपनियों ने अभी तक अपनी उत्पादन इकाई प्रारंभ की है । आज जबकि ऑडनेंस फैक्ट्रीयां समुचित वर्क लोड की समस्या से जूझ रही है शासकीय उत्पादन इकाई होने के नाते सरकार को यह सभी उत्पाद निजी कंपनियों को न देकर पहले से उत्पादन में संलग्न फैक्ट्रियों को देकर ऑडनेंस फैक्ट्रीयों की संपूर्ण क्षमता का उपयोग करना चाहिए। फेडरेशन यह समझने में असमर्थ है कि ऑडनेंस फैक्ट्रीयों की संपूर्ण क्षमता का उपयोग न करके निजी क्षेत्रों को बढ़ावा क्यों दिया जा रहा है । मेक इन इंडिया के नाम पर निजी कंपनियों द्वारा विदेशों से स्पेयर पार्ट के नाम पर पुर्जे मंगाए जाते हैं और उनकी असेंबली करके उत्पाद तैयार किया जाता है। रक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की प्रैक्टिस ना केवल खतरनाक बल्कि देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ साबित होगी। देश की सुरक्षा के मद्देनजर, सिर्फ मुनाफा कमाने की सोच रखने वाली निजी कंपनियों के हाथों में संवेदनशील रक्षा उत्पादन को नहीं सौंपा जाना चाहिए। ऑल इंडिया डिफेंस फेडरेशन रोक लगाई गई आयात सूची के उत्पादों के उत्पादन के लिए ओएफबी, डीआरडीओ, डीपीएसयू सेना के संयुक्त प्रयास का प्रस्ताव प्रस्तुत करता है। रक्षा क्षेत्र की सभी शासकीय इकाइयां एक साथ रक्षा उत्पादन में आपसी सहयोग, जवाबदेही, समय सीमा के साथ मिलकर रक्षा उत्पादन करें। हमें पूरा विश्वास है कि रक्षा उत्पादन की सभी शासकीय इकाइयां रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने में पूर्णतः सक्षम है। रक्षा क्षेत्र की इकाइयों में छुपी हुई तकनीकी योग्यता और क्षमता को पहचान कर उपयोग में लाने की आवश्यकता है। फेडरेशन को पूरा विश्वास है कि यदि रक्षा मंत्री ऑल इंडिया डिफेंस एम्पलाइज फेडरेशन के इस प्रस्ताव को कार्यान्वित करते हैं तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित होगा। मध्यप्रदेश की आर्डिनेंस फैक्ट्रियों के कर्मचारी नेताओं नेम सिंह, आर् एन शर्मा, शिव पांडे, रामप्रवेश, श्री राम मीणा, मिठाई लाल, सुनील श्रीवास्तव, रोहित यादव, अमरीश सिंह, नीतेश सिंह, वीरेंद्र साहू, पुष्पेंद्र सिंह, अरनब दास गुप्ता, राकेश जयसवाल, अवधेश,पीपी, मोहनलाल, सेकेत, अमित बीरबल, आशीष, गोपाल, मनोज, गोविंद इत्यादि ने वर्क लोड की कमी से जूझ रही ऑडनेंस फैक्ट्रीयों को पर्याप्त वर्क लोड मुहैया कराने की मांग की है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.