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रेवेन्यू कोर्ट और पुलिस थाने के बीच भटक रही किसान की फरियाद

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रेवेन्यू कोर्ट के फैसले के खिलाफ थाना प्रभारी पाटन ने दी अर्जी


जबलपुर। किसान न्याय पाने के लिए पुलिस थाने और कोर्ट के चक्कर लगा रहा है। लेकिन पुलिस किसान का पक्ष सुनने की बजाय उसे ही समझा इस दे रही है। मामला पाटन तहसील के अंतर्गत थाना गांव का है जहां केहरी पटेल के नाम से दर्ज जमीन को लक्ष्मण यादव और उसके साथी गण उपयोग कर रहे हैं। जिसका विरोध उसने कई बार किया लेकिन उसे न्याय नहीं मिला। मजबूरन उसे कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। पीड़ित की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता डीके पटेल ने बताया कि विगत कुछ समय पूर्व किसान की जमीन से जिन लोगों ने बबूल के पेड़ काटे थे उन पर चोरी का मामला दर्ज है। मुख्य आरोपी अब तक फरार है। शेष आरोपी इस शर्त पर जमानत पर हैं कि वे दोबारा अपराध को कार्य नहीं करेंगे। लेकिन 17 अप्रैल की रात किसान की बोई हुई गेहूं की खड़ी फसल प्रतिवादियों ने एक बार फिर काट कर रख ली और किसान न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है। गौर करने लायक बात यह है कि जिस जमीन को लेकर विवाद है वह जमीन नाले के उस पार की है वह नाला जो सरकारी दस्तावेजों में पूरा खेत घूम कर जा रहा है।
इस मामले में लक्ष्मण यादव, थान सिंह यादव, शुभम यादव व अन्य लोग प्रतिवादी हैं।
सरकारी दस्तावेजों में किसान सोनेलाल के पिता केहरी पटेल के नाम से खसरा नंबर 191 की जमीन नाले के इधर की दर्ज है। लेकिन नाला नक्शे के मुताबिक पूरा खेत घूम कर फिर आगे बढ़ता है। जबकि मौके पर नाले को सीधा कर दिया गया है। नाले के उस पार की जमीन पर प्रतिवादियों ने कब्जा कर लिया है और वादी अपनी जमीन पर मौके पर मालिकाना हक के लिए भटक रहा है।
किसान रेवेन्यू कोर्ट द्वारा जारी दस्तावेज दिखा रहा है जिसमें की समूची भूमि उसके नाम पर दर्ज हो रही है लेकिन थाना प्रभारी पाटन का कहना है कि नाले के उस पार की जमीन भी किसान के नाम कर दी गई है जो कि एक गलती है और इस बाबत उन्होंने एसडीएम पाटन को खत लिखा है। कहने का आशय यह कि थाना प्रभारी पाटन के अनुसार वह जमीन जो खसरा नंबर 191 में केहरी पटेल के नाम से दर्ज है सरकारी रिकॉर्ड में वह एक गलती है और उसमें सुधार होना चाहिए क्योंकि नाले के उस पार की जमीन भी केहरी पटेल के नाम से दर्ज कर दी गई है।
विवाद का विषय केवल इतना नहीं गेहूं की फसल भी है वादी पक्ष के मुताबिक उन्होंने गेहूं की फसल बोई थी उसी जमीन पर जिसे लेकर विवाद है और जब फसल पक गई तो फसल को काटने को लेकर विवाद हुआ। तब थाना पाटन की तरफ से एक पत्र तहसीलदार महोदय को लिखा गया। विवाद के संदर्भ में और पत्र के अनुरूप तहसीलदार महोदया ने सरकारी सर्वेयर नियुक्त किए और आदेशित किया की सर्वेयर और पुलिस देखरेख में फसल को काटा जाएगा और पुलिस अभिरक्षा में फसल को काटकर केहरी पटेल के सुपुर्द कर दिया जाएगा। 17 अप्रैल की तारीख फसल को काटने के लिए निश्चित की गई सरकारी 17 अप्रैल को पहुंचे मौके पर लेकिन पुलिस नहीं पहुंची। पुलिस से बातचीत की गई तो उस दिन बल की कमी बताते हुए मौके पर आने में असमर्थता जताई गई। फसल काटने का दिन 18 अप्रैल का निश्चित किया गया। 18 अप्रैल को सरकारी दल जब फसल काटने गया तो मौके पर का नामोनिशान नहीं था। थाना प्रभारी का कहना है कि मौके पर उन्हें कोई फसल नहीं मिली इसलिए चोरी का मामला नहीं बनता है। सवाल यह है कि जब चोरी का मामला बनता ही नहीं अब तहसीलदार महोदय ने कौन सी फसल काटकर और करने का आदेश जारी किया था? थाना प्रभारी पाटन शिवराज सिंह ने बताया कि केहरी पटेल के नाम से सरकारी दस्तावेज में नाले के उस पार की जमीन गलत तरीके से दर्ज है और इसे लेकर उन्होंने एसडीएम महोदय को लिखा है। साथ ही उन्होंने बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि उसी भूमि पर लगे बबूल के पेड़ को चोरी से काटने का आरोप है और उस मामले में एक आरोपी लक्ष्मण यादव फरार है। इसके अलावा इस मामले में अन्य साथी जमानत पर है।
सोनेलाल पटेल की माने तो ताजा घटनाक्रम के मुताबिक एक बार फिर पति वादियों द्वारा जमीन पर बखन्नी की जा रही है। जिसे लेकर उन्होंने थाने में भी तहरीर दी है परंतु कोई सुनवाई नहीं हो रही है। दिनांक 17 जून को प्रातः मौके पर विवाद की स्थिति बनी और उन्होंने ने 100 नंबर पर फोन घुमा दिया डायल हंड्रेड के साथ एक सिपाही आया और उसने सड़क पर खड़े रहकर बातचीत की और मौके पर न जाकर रोड से ही डायल हंड्रेड की गाड़ी लेकर वापस हो गया। इस पूरे मामले में यह निष्कर्ष निकल कर आता है कि पीड़ित पक्ष को और उसके द्वारा प्रस्तुत किए गए सरकारी दस्तावेजों को नजरअंदाज करके पाटन पुलिस ने सरकारी दस्तावेजों के विरुद्ध एक पत्र एसडीएम पाटन को लिखा है और वहां से किसी कार्यवाही के इंतजार में है और पीड़ित सोनेलाल पटेल अपनी जमीन दूसरों को जोतता बोता और फसल काटता हुआ देखने पर विवश है।
सोनेलाल पटेल के अधिवक्ता डीके पटेल ने मीडिया को बताया कि उन्होंने इस विषय में अदालत में परिवाद दायर किया था फसल की चोरी की रिपोर्ट लिखने के लिए कोर्ट से आदेश भी जारी हुआ है और इसके लिए पुलिस को 21 जून तक का समय दिया गया है और यदि पुलिस कार्यवाही नहीं करती है तो निश्चित ही यह पीड़ित के साथ अन्याय होगा।

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