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शिवराज सरकार में पनप रहा भारी भ्रष्टाचार

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सरपंच सचिव और अधिकारी बना रहे अब खुद की सरकार

ग्राम पंचायतों में जारी है प्रवासी मजदूरों के नाम पर भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी मनरेगा योजना की वाहवाही लूटने लगे कमीशनखोर अधिकारी

तेन्दूखेड़ा-दमोह जिले के अंतर्गत आने वाले सात जनपद पंचायतों की 460 ग्राम पंचायतों में लगभग 41 हजार मजदूरों की काम करने की डिमांड डाली गई है इस तरह के मजदूरों को काम करने की डिमांड विगत तीन माह से लगातार निरन्तर चल रही है जबकि पूर्व से ही अखबारों में लगातार खबरें प्रकाशित की जा रही है कि मजदूरों की जगह मशीनरी का उपयोग किया जा रहा है लेकिन सरकारी गाड़ी में घूमने वाले और अपने दफ्तर बैठकर खानापूर्ति कार्रवाई करने वाले बेचारे अधिकारी कर्मचारी करें तो क्या करे कृपा करें क्योंकि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का दबाव रहता है कि मजदूरों को भले रोजगार मिले या न मिले लेकिन ऑनलाइन मजदूरों को काम करते दिखाना चाहिए यह हम नहीं कह रहे हैं उनके ही कर्मचारी जो सरकार की तनख्वाह ले रहे हैं और जिनके ऊपर यह जिम्मेदारी है एक और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भ्रष्टाचार मुक्त भारत की बात टीवी चैनलों पर और समाचार पत्रों में कहीं जा रही है लेकिन हकीकत में स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार तो कांग्रेस के समय काम होता था लेकिन अब मजदूरों के नाम पर सरकार और सरकार के नुमाइंदे भ्रष्टाचार करने लगे हुए हैं और अधिकारी अपने दफ्तर में हाथ पर हाथ रखे हुए बैठे हैं दमोह जिले की जनपद पंचायत तेन्दूखेड़ा में आने वाले सभी 63 ग्राम पंचायतों में चरमसीमा पर भ्रष्टाचार की इबादत लिखी गई है जहां मजदूरों को पोर्टल पर दिखाकर मनरेगा के सभी कार्यों को जेसीबी मशीनों से कराए जा रहे हैं और अधिकारियों की इसकी जानकारी काम होने से पहले हो जाती है लेकिन उनका भी इस भ्रष्टाचार और झूठे कार्यों में कमीशन होता है और अगर किसी भी पत्रकार द्वारा खबरों को प्रकाशित किया जाता है तो फिर उसकी जांच का आश्वासन देकर कागजो में पूरी जांच और कार्रवाई हो जाती है.
आज फिर नया मामला तेन्दूखेड़ा जनपद का-आपको बता दें कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश की सभी पंचायतों के मजदूरों को पलायन ना करने और पलायन रोकने के लिए प्रवासी मजदूरों के नाम पर करोड़ों रुपए की राशि जारी की गई जिसमे उनका एक ही निर्देश था कि प्रदेश की हर एक पंचायत में प्रवासी मजदूरों को काम दिया जाए और रोजगार उपलब्ध हो लेकिन यह योजना सिर्फ सफेद कागजों में अब नजर आ रही है और प्रवासी मजदूर अपने घरों में या फिर अन्य प्रदेशों में जहां उनका परिवार का पालन पोषण हो सकें! इसी तरह दमोह तेन्दूखेड़ा की जनपद पंचायत की पंचायतों में भी मजदूरों के नाम पर लगातार भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का सिलसिला जारी है तेन्दूखेड़ा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत मोहरा के रोजगार सहायक सचिव उपयंत्री सीईओ की भी मिलीभगत के चलते प्रवासी मजदूरों के नाम फर्जी मस्टर भर कर लाखों रुपए की राशि अहरण की जा रही है ग्राम पंचायत में 5 लाख रुपये की लागत से परकोलेशन टेक का निर्माण कार्य कराया जा रहा है लेकिन परकोलेशन टेक में 8 से 10 घंटे जेसीबी मशीन चलाई गई और तीन लाख रुपये के मजदूरों के नाम पर मस्टर भरकर राशि निकाल ली गई इस संबंध में सचिव मेघराज सिह से बात की तो उनका कहना था की सरपंच भाजपा सरकार से पूर्व जनपद अध्यक्ष है वर्तमान में सरपंच उनके यहां इसी प्रकार के कार्य होते हैं हम तो छोटे कर्मचारी हम नौकरी करना है तो उनके कहे अनुसार चलना पड़ता है वहीं दूसरी ओर उपयंत्री नीतेश असाटी से इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने कहा कि मशीन सभी जगह चल रही है.
वहीं इस संबंध में जब जनपद की मुख्यकार्यपालन अधिकारी सीईओ रानू जैन से इस नंबर-9827269205 पर संपर्क किया तो उनका फोन कवरेज क्षेत्र के बाहर आ रहा था जिसके चलते इस पंचायत के काले कारनामों के संबंध में बात नहीं हो पाई लेकिन अब क्या कहे हकीकत तो यह है कि जितना भी पत्रकारों द्वारा इन भ्रष्टाचार सचिव सरपंचों और अधिकारियों की खबरों का प्रकाशन करें लेकिन कार्रवाई तो सिर्फ सफेद कागजों में दिखाने के लिए करनी ही पड़ती है लेकिन अपनी तो कमीशन लेना ही है.

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