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शूटिंग शुरू करने के लिए एफडब्लूआईसीई के दिशा निर्देश पर बाॅलीवुड में एक राय नहीं

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शूटिंग शुरू करने के लिए एफडब्लूआईसीई के दिशा निर्देश पर बाॅलीवुड में एक राय नहीं

शामी एम् इरफ़ान की रिपोर्ट, मुम्बई ।भारतीय फिल्म उद्योग लाॅकडाउन के दौरान हाशिये पर आ गया है। शूटिंग बंद है, रिकार्डिंग बंद है, एडिटिंग, डबिंग, मिक्सिंग स्टूडियो बंद है, सिनेमा- थियेटर बंद है, क्योंकि सब जगह तालाबंदी है और आम जनता भी अपने घरों में एक तरह से बंद है। आम जन जीवन किसी कार्य में व्यस्त नहीं अपितु इस लाॅकडाउन में त्रस्त है। बाॅलीवुड के लोग भी घरों में रहते हुए परेशान हैं। कोई भी शूटिंग करने की पहल करने को तैयार नहीं है। सुलझे हुए फिल्मकार पहले ही कह चुके हैं कि, देश के जन जीवन का स्वास्थ्य उनकी प्राथमिकता है। फिल्म की शूटिंग या रिलीज नहीं करेंगे। टीवी चैनलों पर और ओ टी टी पर कार्यक्रम की आवश्यकता है और प्रसारण हेतु नये कार्यक्रमों की शूटिंग करनी ही होगी। इस लिए जब भी शूटिंग आरम्भ होगी, तो किस तरह से, किन शर्तों के साथ होगी इस सम्बन्ध में विविध मत रोजाना पढ़ने-सुनने को मिल रहे हैं। अब एफडब्लूआईसीई ने भी शूटिंग के लिए अपने दिशा निर्देशों को लेकर निर्माताओं से बातचीत कर रही है।
                   प्रेस विज्ञप्ति द्वारा बताया जा रहा है कि, हिंदी फिल्म इंडस्ट्री और टीवी शोज से जुड़े 32 क्राफ्ट संस्थाओं की मदर बॉडी फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (एफडब्लूआइसीई) के तहत तकरीबन 5 लाख दिहाड़ी मजदूर व तकनीशियन काम करते हैं। लॉकडाउन के बाद वाले माहौल में शूटिंग शुरू हो और मजदूर व तमाम टेक्नीशियन काम पर लौटें इससे पहले एफडब्लूआइसीई चाहती है कि शूटिंग के दौरान मजदूरों व टेक्नीशियन के स्वास्थ्य व सुरक्षा के मद्देनजर तमाम तरह के नियमों को लागू किया जाए और उनके श्रमिक सदस्यों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जाए। 
                   फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज (एफडब्लूआइसीई) के प्रेसिडेंट बीएन तिवारी, जनरल सेक्रेटरी अशोक दुबे और ट्रेजरार गंगेश्वरलाल श्रीवास्तव  ने कहा है कि, एफडब्लूआइसीई ने फ़िल्म और टीवी शो के निर्माताओं के लिए कुछ नियम तय किए हैं, जो अपने सीरियल की शूटिंग शुरू करना चाहते हैं। सभी निर्माताओं को जारी किये निर्देशों का अनिवार्य रूप में पालन करना होगा। फिलहाल इस गाइडलाइन पर फ़िल्म और टीवी शो प्रोड्यूसरों तथा चैनलो के वरिष्ठ अधिकारियों की एक ऑनलाइन बैठक जल्द बुलाई जा रही है। इस बैठक में मंजूरी के बाद इसे सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
                  इस गाइडलाइन्‍स के अनुसार, निर्माताओं को सेट पर सिर्फ 50 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ काम करना होगा। उन्हें कर्मचारियों को अलग अलग शिफ्ट में बुलाना होगा ताकि कोई भी बेरोजगार न हो। गाइडलाइन में यह भी है कि, अगर किसी श्रमिक की मौत कोरोना वायरस से होती है तो, निर्माता और टीवी चैनल श्रमिकों के परिवारों को 50 लाख रुपये का मुआवजे देंगे। साथ ही, चैनल और निर्माता को श्रमिकों के मेडिकल खर्च का भी ध्यान रखना होगा।
                 एफडब्लूआईसीई की ओर से 60 साल से ऊपर वालों को घर पर रहने के लिए कहा गया है। क्योंकि उनको कोरोना वायरस से संक्रमित होने की संभावना ज्‍यादा होती है। इसके अलावा, सेट पर एक एम्बुलेंस और एक स्वास्थ्य निरीक्षक हमेशा उपलब्ध रहेंगे। फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉई (एफडब्लूआईसीई) के प्रेसिडेंट बीएन तिवारी, जनरल सेक्रेटरी अशोक दुबे और ट्रेजरार गंगेश्वरलाल श्रीवास्तव ने कहा है कि, अगर निर्माता और चैनल इन दिशा-निर्देशों का पालन करना स्वीकार करते हैं, तो फिल्मो और टीवी शो की शूटिंग शुरू की जाएगी। सनद रहे कि, इसी फेडरेशन की इससे पूर्व एक विज्ञप्ति में शूटिंग जुलाई में शुरू करने की बात की जा चुकी है।
                     सूत्रों से पता चला है कि, अभी तक 32 क्राफ्ट संगठनों की सहमति नहीं बनी है। बहुत से निर्माता-निर्देशक अपने शूटिंग स्टूडियो के सेट पर सभी की सेहत की सुरक्षा चाहते हैं लेकिन फेडरेशन की गाइडलाइन के कुछ नियमों के समर्थन में नहीं हैं। एकाध फिल्मकारों ने स्वतंत्र रूप से अपनी गाइडलाइन भी प्रस्तावित कर रखी है। लाॅकडाउन लिफ्ट होने में कितना वक्त लगेगा, किसी को पता नहीं। मुम्बई कोरोना संक्रमित हाॅटस्पाॅट में है। यहाँ पर चाह कर भी जल्दी शूटिंग शुरू नहीं हो सकती। अपवाद के तौर पर सलमान खान ने अपना वीडियो एलबम की शूटिंग लाॅकडाउन के दौरान करके जारी किया है। इस तरह से न तो परफेक्ट शूटिंग होती है और न ही कामगारों का भला होता है। (वनअप रिलेशंस)
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