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सरपंच कर रहा बेखौफ भ्रष्टाचार

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जबलपुर जिले की तहसील सिहोरा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम बेला का मामला

जबलपुर दर्पण से मनीष श्रीवास की रिपोर्ट

बताया गया हैं कि विगत समय से चल रहा ये खेल जिसको लेकर इतनी अधिक मात्रा में 150 से अधिक पेड़ो का कर दिया कत्लेआम इस प्रकार से की गई लापरवाही –

(1) जुलाई अगस्त में पेड़ लगाए जाते है पेड़ लगाने को लोग अपने आप को धन्य समझते है।(2) सुभाष पटेल सैकड़ों पेड़ जड़ से काटने को धन्य समझता है।(3) गौशाला की आड़ में मनरेगा से भूमि के पेड़ खुदवाकर् सफाई करवाता है फिर स्वय व अपने लोगो से करवा देता है कब्ज़ा।(4) फिर गावं के लोग शिकायत करते है तो करते रहो उसे कोई फर्क नहीं पड़ता। (5) सरपंच के पेड़ काटने अबैध कब्ज़ा की लगभग एक दर्जन शिकायत ज़िला व तहसील के अधिकरियो के दफ़्तर की शोभा बढ़ा रही है क्योंकि पटवारी की ही रिपोर्ट मान्य होती है।(6) गौशाला वाले खसरा 82 में लगभग 20 एकड़ ज़मीन है फिर भी दूसरे खसरे की ज़मीन के कब्ज़ा हटवाने सरपंच ने अधिकारियो को गुमराह किया । (7) बंजर पड़ी ज़मीन को पिछ्ले 50 वर्षो से बंजर पड़ी ज़मीन को खेती के लायक बना खेती कर अपना परिवार का भरण पोषण करते थे । जिसमें मनरेगा से नाली खुदवाकर् मुँह का निवाला छीन लिया । (8) ग्राम महगवा में पीढ़ियों से रह रहे हरिजन गरीब भूमिहीनो की ज़मीन छीन ली जिन्हें पट्टे की पात्रता है।(9) पटवारी सुखचैन पटेल शासकीय कार्य में बाधा डालने पर जेल भेजने की धमकी दे देता रहा शिकायत कर्ताओ को दबाने के लिए धमकी देता रहा । (10) सरपंच ने अपने कार्यकाल में पेड़ लगाया तो नहीं बल्कि सैकड़ो जिंदा पेड़ो का कत्लेआम जरूर कर दिया ।(11) ग्राम पंचायत बेला में 2010 से 2015 के बीच दो नर्सरी तैयार की गयी थी उसे आदिवासी महिला सरपंच लीला बाई कोल के समय की है जो आज भी ग्राम की शान है। उसने भी कुछ कब्जे हटवाए गए थे।(12) उसी नर्सरी को सरपंच अपने नाम बता कर अधिकारियों को गुमराह कर देता है की नर्सरी मेरी तैयार की हुई और अधिकारी सरपंच को धन्यावाद देकर चले जाते हैं। (13) ग्राम बेला महगवा में कब्जा करवाने में भरपूर सहयोग पटवारी सुखचैन पटेल का था क्योंकि सुखचैन सरपंच का अभिन्न मित्र था या जो भी समझो ।(14) सरपंच ने पेड़ लगाए तो नहीं लेकिन पेड़ लगाने के नाम मनरेगा से लाखों रुपए का गबन जरूर किया है।(15) मान्यवर जी सरपंच सुभाष पटेल ने गरीब हरिजन भूमिहीनों का कब्जा क्यों हटवाय है क्योंकि प्रधानमंत्री आवास में उन लोगों ने ₹20000 घूस में सिर्फ ₹15000 दिए हैं । ₹5000 बाकी रह जाने के कारण उनके मुंह का निवाला छीन लिया गया जिसकी शिकायत कर गरीब गिड़गिड़ाते रहे लेकिन किसी ने नहीं सुनी बल्कि उन्हें उल्टा लटकाने की धमकी देकर दबा दिया गया। जबकि सरपंच एवं उनके सहयोगी आज भी अवैध कब्जा कर आराम फरमा रहे क्योंकि यह रसूखदार सरपंच के भाई व सहयोगी है।

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