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सामुदायिक शौचालय हुये धराशाही

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ओडीएफ की हकीकत , शासकीय सिविल अस्पताल पर सार्वजनिक सुविधाघर होते हुए भी सुविधाहीन

पवन कौरव नरसिंहपुर, गाडरवारा । स्वच्छ भारत-स्वस्थ भारत अभियान की शुरूआत अभी कुछ ही दिन गुजरें हैं कि मुख्यालय व शहर में अनेकों सार्वजनिक जगहों में कई स्थानों पर बगरी – पसरी गंदगी व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रही है । जगह-जगह लगे गंदगी के ढेर सड़ांध और बद्बू मार रहे हैं । वार्डों के पार्षदों को भी अपने क्षेत्र की फिक्र नहीं है । स्वच्छता के लिए अभियान की शुरुआत कुछ दिनों पहले ही हुई थी गुजरे पर उत्साह काफूर हो गया है । जबकि स्वच्छता अभियान को लेकर हुए अनेकों कार्यक्रमों में क्षेत्र के नेताओं और अधिकारियों ने यह दलीलें खूब दीं कि स्वच्छता में ईश्वर का वास है । स्वच्छता का संकल्प लें , गंदगी न फैलाएं पर सारी दलीलें बयानबाजियों तक सिमट गई हैं । कहीं भी उन पर अमल होते नहीं दिख रहा है । विशेष तौर पर उन विभागों के दफ्तरों में कचरे के ढेर व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रहे हैं , जहां सफाई-स्वच्छता का दारोमदार अहम बात है ।

स्वच्छ भारत की मंशा को पलीता लगा रहे जगह जगह बने सुविधाघर

बीते दिनों बड़े जोर शोर से नगर को ओडीएफ का दर्जा दिलाने अनेक प्रकार की कवायदें कर गाडरवारा को खुले में शौचमुक्त एवं साफ स्वच्छ शहर बनाने नगर पालिका गाडरवारा द्वारा मुहिम चलाई गई थी । जिसमें प्रतिदिन रोको टोको अभियान , जगह जगह साफ सफाई कर गंदगी उन्मूलन , अनेक जगह सार्वजनिक एवं लोगों के घरों में शौचालय निर्माण आदि जोरों पर रहे । इसके बाद फरवरी मार्च में नगर को ओडीएफ का दर्जा मिल गया ।  उसके बाद से ही स्वच्छता अभियान हवा होते दिख रहा है । अनेक जगह के सार्वजनिक शौचालय बदहाल पड़े हैं । चंद महीने बाद ही इनके दरवाजे खिड़की नदारद हो गए हैं । वहीं भीतर इतनी गंदगी है कि पैर रखने की कल्पना भी दूभर है । इसी क्रम में बस स्टैंड क्षेत्र को खुले में शौच से मुक्त करने करीब तीन चार महीने पहले सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराया गया था। जिसमें शासन प्रशासन की मंशा थी कि शासकीय सिविल हॉस्पिटल में आने वाले मरीजों को प्रसाधन गृह की सुविधा देने व रेल्वे स्टेशन रेस्ट हाउस के सामने बने या फिर बात करें नगर पालिका के बाजू में स्टेट बैंक के पास बने सामुदायिक शौचालय की तो सभी जगह आमजन की सुविधा को देखते हुए बनाये गए थे । साथ ही आसपास के लोगों को भी खुले में शौच जाने से बचने के लिए उनके घर शौचालय बनने तक सार्वजनिक शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। बताया गया है कि जब तक नगर को ओडीएफ का दर्जा नहीं मिला तब तक तो इस सार्वजनिक शौचालय सहित सभी सार्वजनिक शौचालयों की पूछ परख बनी रही । लेकिन जैसे ही ओडीएफ सार्टिफिकेट मिला , वैसे ही इस ओर से आंखे मूंद ली गईं । जिसके परिणाम स्वरूप शहर में अनेको जगह बने सामुदायिक शौचालय घोर गंदगी बदबू के चलते उपयोग करने लायक नहीं रह गए है । इससे सार्वजनिक स्थानों पर सार्वजनिक सुविधाघर होते हुए भी सुविधाहीन पडे है । जिससे निस्तार के लिए जाने वाले लोगों को परेशानी होती है । लेकिन वहां जाते ही गंदगी के चलते , लोग बिना निस्तार के ही वापस लौट आते हैं । इनको देखकर ऐंसा प्रतीत होता है कि मानो विकास कागजों तक ही सीमित हो ।

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