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हर्षोल्लास के साथ मनाया गया होली का त्यौहार

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दीपक तिवारी-जबलपुर दर्पण। रंगो और उमंगों का त्योहार होली पूरे देश में ही नहीं बल्कि दुनिया में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। हालांकि विगत कुछ वर्षों से देखने में आया था कि होली का स्वरूप अब निरंतर बदलता जा रहा है। लोग फूलों की होली और गुलाल की होली की तरफ बढ़ रहे हैं। इसके अलावा रंगो की होली भी खेली जा रही है। सबका अपना-अपना महत्व है और अपनी अपनी रूचि के अनुरूप ही लोग होली खेलते हैं। इसी कड़ी में हमारी बातचीत हुई जगत गुरु राघव देवाचार्य जी से जिन्होंने होली की पूर्व संध्या पर लोगों को संदेश दिया कि किस प्रकार आप सुरक्षित रहकर होली मना सकते हैं। होली के त्यौहार का जहां एक और पौराणिक महत्व है वही आज के समय में एक दूसरे से प्रेम व्यवहार और मेल मिलाप बढ़ाने का और उसे बनाए रखने का भी एक माध्यम है। इसके बाद कोरोनावायरस पर बोलते हुए राघव देवाचार्य ने बताया कि कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है और वर्तमान समय में इससे बचाव ही इसका उपाय है। साफ-सफाई और स्वच्छता पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। साथ ही संक्रमित व्यक्ति को समय पर अपनी जांच करवाने और उचित इलाज लेने की आवश्यकता है। नगर में फूलों की होली भी देखने में आई प्रसिद्ध समाजसेवी सीमा पचौरी के घर विजय नगर स्थित सारथी द्वार में होलिका दहन एवं फूलों की होली के कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में क्षेत्रीय जनों के साथ-साथ पचौरी परिवार ने भी होली की खुशियां लोगों में बांटी और अपने दामन में भी होली की शुभकामनाएं समेटी। इस अवसर पर समाजसेवी सीमा पचौरी ने लोगों होली की शुभकामनाएं देते हुए शुभ मंगल की कामना की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में क्षेत्रीय लोगों के साथ साथ श्रीकांत पचौरी और उनका पूरा परिवार मौजूद रहा।
धुरेडी़ का उल्लास दमोह नाका स्थित शाला में भव्य होली मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें जगतगुरु स्वामी राघव देवाचार्य एमआईसी श्री राम शुक्ला,अखिल भारतीय साहित्य परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष शरद अग्रवाल, भाजपा के कार्यकर्ता और नगर के प्रमुख गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे और बड़ी संख्या में क्षेत्रीय जनों ने भी मिलकर होली के उल्लास का आनंद लिया एक दूसरे के साथ रंग गुलाल खेलकर होली मनाई। वहीं कुछ लोग इस ढंग से भी होली मनाते देखे गए कि शहर से बाहर किसी पिकनिक स्थल पर जाकर उन्होंने होली खेली और आनंद उठाया। अपने मित्रों और परिवार जनों के साथ शहर से बाहर होली मनाने का यह चलन भी अपने शहर में देखने में आया। इसी कड़ी में भेड़ाघाट के नजदीक वह बच्छा घाट में मित्रों की टोली होली खेलने निकली। जिनमें विजय परोहा, योगेश मालवीय, रूपेश राठौर, दीपक तिवारी की मित्र मंडली शामिल रही।

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