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खास खबरसंपादकीय/लेख

हम, हद से ज्यादा तडप लिये, हम, हद से ज्यादा भटक लिये…


हम, हद से ज्यादा तडप लिये,
हम, हद से ज्यादा भटक लिये,
अब और नहीं सह पायेंगे।
हम खींच के तुमको लाएंगे,
तपती सडकों पे बिछायेंगे,

हम दर्प तुम्हारा तोड़ेगें-
उठने के योग्य न छोडेंगे,
अपने पैरों के छालों को-
तेरी मूँछो से सहलाएंगे,
अब और नहीं सह पायेंगे।

तुम रोकोगे, रुक जायेंगे,
या लौट के वापस आयेंगे,
छीनेंगे सब हथियार तेरे-
मिट्टी में तुझे मिलायेंगे,
अब और नहीं सह पायेंगे।

तुम सब जाओगे जेलों में,
या काम करोगे तबेलों में,
फ़ार्महाउस-कोठी-बंगले-
गाड़ी-होटल छिन जायेंगे,
अब और नहीं सह पायेंगे।

राम कुमार सविता
कवि

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