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भारतीय नौसेना दिवस : नौसेना की बहादुरी को सलाम

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आज 4 दिसंबर 2020 हम देशवासी भारतीय नौसेना दिवस मना रहे हैं। दरअसल 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान इंडियन नेवी ने पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। इस उपलब्धि की याद में 4 दिसंबर को भारतीय नौसेना जश्न मनाती है। हम वर्तमान परिस्थितियों के बारे में प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया के माध्यम से यह जानते हैं कि चीन के साथ भारत के बढ़ते हुए तनाव को देखते हुए चीन की अपना प्रभुत्व बढ़ाने की रणनीति पर अंकुश लगाने के लिए भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के ‘क्वाड’ की लामबंदी आज उस समय और अधिक मजबूत हो गई, जब भारत ने अमेरिका तथा जापान की नौसेना के साथ होने वाले अभ्यास मालाबार में ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के शामिल होने के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया। इसका प्रभावी अर्थ यह हुआ कि ‘क्वॉड’ या 4 सदस्यीय गठबंधन के सभी सदस्य इस महा अभ्यास में शामिल होंगे। भारत द्वारा नौसेना युद्धाभ्यास में शामिल होने के ऑस्ट्रेलियाई अनुरोध को ऐसे समय स्वीकार किया गया जब पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सीमा को लेकर तनाव बढ़ रहा है। भारतीय नौसेना ने कहा कि समुद्री क्षेत्र में अन्य देशों के साथ सहयोग बढ़ाने और विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया के साथ रक्षा क्षेत्र में सहयोग को पुख्ता करने की दिशा में आगे बढ़ते हुए इस वर्ष होने वाले मालाबार अभ्यास में ऑस्ट्रेलियाई नौसेना की भी हिस्सेदारी का निर्णय लिया गया है। यह अभ्यास बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में होगा। भारतीय सेना का सामुद्रिक अंग है भारतीय नौसेना।  हर साल 4 दिसंबर को भारतीय नौसेना दिवस मनाया जाता है। इस दिन पूरा देश समुद्री सीमा की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले अपने वीर सपूतों को श्रद्धांजलि देता है। देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा में भारतीय नौसेना का रोल काफी महत्वपूर्ण है। भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने में भी भारतीय नौसेना का महत्वपूर्ण योगदान होता है। देश की सुरक्षा के लिए हमारे जवान धरती, जल और वायु पर तैनात है। दुनिया की सबसे ताकतवर नौसेना में हमारी नेवी का नाम शामिल है। 4 दिसंबर भारतीय नौसेना दिवस के दिन भारतीय नौसेना के वीरों को याद किया जाता है। भारतीय नौसेना  भारत की सेनाओं में से अपने सर्वश्रेष्ठ स्वरूप में है। आपको बता दें आज भारतीय नौसेना विश्व की सबसे बड़ी नौसेनाओं में शामिल है। भारतीय नौसेना अपनी क्षमताओं में लगातार इजाफा भी कर रही है। भारतीय नौसेना के पास बड़ी संख्या में युद्धपोत और जहाज हैं भारतीय सशस्त्र बल का एक मुख्य हिस्सा भारतीय नौसेना है। नौसेना ने आजादी के बाद से अपनी शक्तियों में लगातार इजाफा किया है। युद्धपोत और मिसाइलें समुद्र के नीचे, समुद्र के ऊपर और समुद्री सतह पर लक्ष्य भेद कर सकती हैं। एशिया की सबसे बड़ी फोर्स भारतीय नौसेना है। जो सिर्फ 7 किलोमीटर के दायरे में जवानों को ट्रेनिंग देती है। भारतीय नौसेना का अपना एक स्वतंत्र झंडा है। सुपरसॉनिक मिसाइल का भारतीय नौसेना की तकत को बढ़ाने में अहम योगदान है। ये समुद्र में चलने वाली सबसे तेज मिसाइल में गिनी जाती है। भारतीय नौसेना दिवस क्यों मनाया जाता है? 4 दिसंबर को भारतीय नौसेना दिवस मनाया जाता है। 1971 के भारत-पाकिस्तान में युद्ध हुआ था। युद्ध में भारतीय नौसेना  को जीत मिली थी। जीत के जश्न के रूप में ही भारतीय नौसेना दिवस  मनाया जाता है। भारतीय नौसेना दिवस के दिन नौसेना के जाबाजों को याद किया जाता है। दरअसल  4 दिसंबर, 1971 को भारतीय नौसेना ने ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के तहत पाकिस्तान के कराची नौसैनिक अड्डे पर हमला बोल दिया था।  इस ऑपरेशन में भारतीय नौसेना को सफलता मिली थी बस तभी से ही 4 दिसंबर को हर साल नौसेना दिवस मनाया जाता है। ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ अभियान पाकिस्‍तानी नौसेना के मुख्‍यालय को निशाने पर लेकर शुरू किया गया था। भारतीय नौसेना की ओर से किए गए इस हमले में 3 विद्युत क्‍लास मिसाइल बोट, 2 एंटी-सबमरीन और एक टैंकर शामिल थे। इस युद्ध में एंटी शिप मिसाइल से हमला किया गया था। पाकिस्तान के कई जहाज  इस हमले में नेस्‍तनाबूद कर दिए गए थे। ऑपरेशन ट्राइडेंट में पाकिस्तान के ऑयल टैंकर भी तबाह हो गए थे। इस लेख में प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया का सहयोग लिया गया है। भारतीय नौसेना का इतिहास5 सितंबर 1612 को भारतीय नौसेना की शुरुआत हुई थी। सूरत के बंदरगाह पर इस दिन ईस्ट इंडिया कंपनी के लड़ाकू जहाजों का पहला बेड़ा  पहुँचा था। जिसे तब ईस्ट इंडिया कंपनी की समुद्री सेना द्वारा बुलाया गया था। यह बेड़ा ‘द ऑनरेबल ईस्ट इंडिया कंपनीज़ मॅरीन’ कहलाता था।आपको बता दे आगे यह ‘द बॉम्बे मॅरीन’ कहलाया।  इस नौसेना का नया नाम पहले विश्व युद्ध के दौरान ‘रॉयल इंडियन मॅरीन’ रखा गया था । साल 1892 में इसका नाम रॉयल इंडियन मरीन कर दिया गया। रॉयल इंडियन नेवी में द्वितीय विश्व युद्ध आते-आते लगभग आठ युद्धपोत थे। युद्ध के ख़त्म होने तक पोतों की संख्या बढ़कर 100 हो गई थी। 26 जनवरी 1950 को भारत गणतंत्र बना। भारत की आजादी के बाद 1950 में नौसेना का गठन फिर से हुआ। भारतीय नौसेना ने 26 जनवरी 1950 को अपने नाम के सामने से रॉयल नाम को त्याग दिया। भारतीय नौसेना में उस समय 32 नौ-परिवहन पोत और लगभग 11,000 अधिकारी और नौसैनिक थे। रियल एडमिरल आई.टी.एस. हॉल भारतीय नौसेना के पहले कमांडर-इन-चीफ़ थे। पहले भारतीय नौसेनाध्यक्ष वाइस एडमिरल आर.डी. कटारी थे

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