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शिक्षकों के निर्धारित नहीं है टाइम कोरोना काल से बंद स्कूलों का उठा रहे फायदा

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गहरी नींद में सोए हुए शिक्षा विभाग के आला अधिकारी।

डिंडोरी।जबलपुर दर्पण न्यूज। देशभर में करोना काल में लोगों का जनजीवन अस्त व्यस्त कर दिया है।जिलेभर के सभी प्राथमिक शाला एवं माध्यमिक शाला अभी तक बंद है, छात्र स्कूलों तक नहीं पहुंच रहे हैं। ग्रामीण अंचलों में इसका फायदा शिक्षक भरपूर उठा रहे हैं, कई दिनों तक स्कूलों से मास्टर साहब गायब रहते हैं,वही हमारा घर हमारा विद्यालय का संचालन केवल कागजों पर चल रहा है।गौरतलब है कि कोविड-19 महामारी के चलते वैसे तो इस वर्ष सारे के सारे शासकीय विद्यालय लगभग चार छः महीनों से बंद पड़े हुए हैं ,लेकिन मंडल की बोर्ड परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों का संचालन लगभग पिछले 2 महीनों से किया जा रहा है, ताकि बोर्ड परीक्षाओं में अध्ययनरत छात्र छात्राओं को परीक्षा में किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत ना हो सके, लेकिन डिंडोरी जिले की शाहपुर संकुल के अंतर्गत आने वाला शासकीय उत्तर माध्यमिक विद्यालय मुड़िया खुर्द लापरवाही का केंद्र बना हुआ है ,यहां पर शिक्षकों के विद्यालय आने एवं विद्यालय से जाने का कोई निश्चित टाइम टेबल नहीं है, जब शिक्षक की जब मर्जी होती है, तब वह विद्यालय से आते जाते रहते है। एसटी,एससी के बच्चों से की गई, परीक्षा फीस के नाम पर अवैध वसूली। गौरतलब है कि अभी हाल में ही हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी के छात्र छात्राओं से एक हजार से 15 सो रुपए तक की बीच फीस वसूलने के आरोप लग रहे हैं। जबकि शासन के द्वारा एसटी एससी वर्ग के छात्र छात्राओं को परीक्षा शुल्क में छूट प्रदान की जाती है,लेकिन विद्यालय में सभी छात्र छात्राओं से बराबर मात्रा में फीस ली गई है, जबकि छात्र छात्राओं का कहना है कि हमारे द्वारा छूट से संबंधित दस्तावेज जैसे कि आय प्रमाण पत्र ,जाति प्रमाण पत्र सारे दस्तावेज विद्यालय को उपलब्ध करा दिए गए हैं, तब भी हम लोगों से पूरी फीस ली गई है।संबल योजना के तहत छात्र छात्राओं को चाहे भर्ती का फीस हो या फिर परीक्षा की फीस हो संबल योजना के तहत फीस माफी की जाना चाहिए था ,लेकिन यहां पर भी विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य के द्वारा किसी भी प्रकार की कोई रियायत छात्र छात्राओं को नहीं दी गई है ,इस संबंध में जब प्रभारी प्रचार से संवाद किया गया तो उनका कहना था कि हम फीस वापस कर देंगे कारण यह है कि जब फीस वापस ही करना था तो फीस लिया ही क्यों गया,जबकि इस वर्ष छात्र-छात्राओं की पलकों की माली स्थिति पिछले काफी दिनों कमजोर चल रहे हैं।

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