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अभिनेता इरफ़ान खान अलविदा

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शामी एम् इरफ़ान की रिपोर्ट, मुम्बई ।आज बॉलीवुड अभिनेता इरफान खान का निधन हो गया. मंगलवार को अचानक उनकी तबीयत ज्यादा खराब होने के बाद मुंबई, अंधेरी, पश्चिम स्थित कोकिलाबेन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. जहाँ उन्होंने अपनी जिंदगी की आखिरी सांस ली. उनके कुछ रिश्तेदारों व शुभचिंतकों की मौजूदगी में वर्सोवा कब्रिस्तान में दफनाया गया है. लाॅक डाउन के कारण उनके जनाजे में ज्यादा लोग शामिल नहीं हो पाये.
दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से रंगमंच की बारीकियाँ सीखा हुआ इरफ़ान खान का पूरा नाम साहबजादे इरफ़ान अली खान है. उनका जन्म 7 जनवरी 1967 को राजस्थान के जयपुर में हुआ था. थियेटर के नाटकों से अभिनय की शुरुआत करके 1985-86 में “श्रीकांत” धारावाहिक से टीवी स्क्रीन पर अपनी झलक दिखाई. फिर “भारत एक खोज” धारावाहिक करते हुए 1988 में “सलाम बाम्बे” फिल्म से बॉलीवुड में दस्तक दे दी. चाणक्य, चन्द्रकांत, दि ग्रेट मराठा जैसे दर्जनों टीवी शोज और पचासों फिल्म में अभिनय का जादू दिखाने वाले इस कलाकार को 2003 की फिल्म ‘हासिल’ से पहचान मिली. इसके साथ ही कामयाबी उनके कदम चूमने लगी. हासिल, हैदर, रोग, मकबूल, फुटपाथ, अंग्रेजी मीडियम, हिन्दी मीडियम, पान सिंह तोमर, लंचबाॅक्स, हिस्स, द नेमसेक, लाइफ इन ए मेट्रो, तलवार, पी कू, ना जाने कितनी ऐसी फिल्में हैं, जिनमें इरफान खान ने दमदार अभिनय किया है. इस दिग्गज कलाकार के जाने से बॉलीवुड में शोक का माहौल है और सोशल मीडिया पर उनके फैन, अभिनेता व नेता सभी अपनी श्रद्धांजलि दे रहे हैं.
बॉलीवुड के साथ उन्होंने हॉलीवुड में भी अपने अभिनय के जलवे दिखाये हैं. हालांकि एक ब्रिटिश फिल्म ‘द वैरियर’ 2001 में की थी लेकिन “स्लमडॉग मिलिनेयर” में उनका पुलिस इंस्पेक्टर का किरदार सबने सराहा है. अन्य अंग्रेजी भाषा की उल्लेखनीय फिल्में हैं इनफेरनो, अमेजिंग स्पाइडर-मैन, लाइफ ऑफ पाई, जुरासिक वर्ल्ड, पॅज्जल. इसके साथ-साथ उनका वीडियो गेम लीगो जुरासिक वर्ल्ड और लीगो डाइमेंशन भी बहुत लोकप्रिय है. उन्हें बेहतरीन अभिनय के लिए फिल्म फेयर अवार्ड, नेशनल अवार्ड के साथ भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया है.
आपको बता दें कि, इरफान खान आजकल अपनी न्यूरोक्राइन ट्यूमर बीमारी के साथ-साथ काफी इमोशनल दौर से गुजर रहे थे. 25 अप्रैल को ही उनकी मां सईदा बेगम का जयपुर में निधन हुआ था और लाॅकडाउन के चलते वो अपनी मां के जनाजे में शामिल नहीं हो सके थे. एक बार उन्होंने अपने साक्षात्कार के समय कहा था कि, ‘जब तक मेरी माँ जिंदा है, मुझे कुछ नहीं होगा’ और यह क्या? अपनी माँ की मृत्यु के बाद वह भी अपने पीछे पत्नी सुतापा सिकदर और दो बच्चों को छोड़कर चल दिये. अल्लाह उन्हें जन्नत अता करे और सभी की यह सदमा बर्दाश्त करने की ताकत दे. बॉलीवुड में इस उम्दा फनकार की कमी हमेशा खलेगी.

(वनअप रिलेशंस, मुम्बई)

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