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एक और अतिथि शिक्षक की मौत हर्ट अटैक से

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संगठन में बढ़ता जा रहा आक्रोश

प्रदेश में लगभग तीन दर्जन से ऊपर अतिथि शिक्षकों की अब तक जा चुकी जान, सरकार खेल रही आंख मिचौली

मण्डला। प्रदेश में अब तक दर्जनों अतिथि शिक्षकों के साथ अलग अलग स्थानों पर घटित हादसों के बढ़ते ग्राफ से सत्याग्रही अतिथि शिक्षक आहत तो हैं ही, सरकार पर आक्रोश का पारा भी अब बढ़ता ही जा रहा है।अवगत हो,कि गुरुवार 11मार्च की सुबह चाबी के पिस पिपरिया ग्राम का रहने वाला अतिथि शिक्षक सुकल सिंह अतिथि शिक्षक परिवार मण्डला का वरिष्ठ पदाधिकारी और वर्तमान में इक्यासी दिनों से शाहजहांनी पार्क भोपाल में लगातार जारी वचन-निभाओ प्रांतव्यापी जन सत्याग्रह के आयोजक परिवार के सदस्य कार्यकर्ता भी हैं।आगे यह भी बताया गया है कि सुकल सिंह 2008 से अतिथि शिक्षक था।परिवार के पांच सदस्यों के पालन-पोषण करने का भार उन्हीं पर था।परिवार में बुजुर्ग माता पिता का साया पहले से ही जा चुका था।दो बच्चियों के सहित धर्मपत्नि सब इन्हीं पर आश्रित थे। भारी दुख का विषय है,कि अब परिवार का खर्च पूरा कैसे होगा।यह भी बहुत बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।जिसका कोई समाधान नहीं है।क्योंकि अत्यंत कम मानदेय पर तेरह साल से अतिथि शिक्षक के रूप में लगातार काम करते आने से परिवार की आर्थिक हालत बहुत ज्यादा खराब हो चुकी है।सुकल सिंह मिलने वाले कम मानदेय से भरण पोषण नहीं होते देख चारों तरफ कर्जदार भी हो चुका था।अब तो ऐसी स्थिति बन चुकी थी कि कर्ज उधार मांगने के लिए भी जगह नहीं बची।ऐसी स्थिति में सरकारों की गैरजवाबदाराना रवैया और भी अधिक बर्बाद होने को विवश कर रही है।
यह घटना मण्डला जिले की है। अतिथि शिक्षक सुकल सिंह भगत की मृत्यु ह्रदय गति रुक जाने के कारण गुरुवार की सुबह हो गई।सुकल सिंह अतिथि शिक्षक परिवार जिला मण्डला के सक्रिय पदाधिकारी थे।सुकल सिंह पिता समारी सिंह भी अपने परिवार के मुखिया थे।उनके आश्रित दो बेटियां, बुजुर्ग माता और पत्नि सामिल हैं।परिवार का भरण-पोषण करने का एक मात्र सहारा इनका अतिथि शिक्षक की नौकरी ही थी।अत्यंत कम मानदेय पाकर भी जल्द ही नियमित होकर निश्चिंत रोजगार पाकर शिक्षक के रूप में समाजसेवा करने की उम्मीद से दिन गुजरते गये,और इसी आर्थिक तंगी को सहन नहीं कर पाने की वजह से ह्रदय अचानक रुक गया,और गुरुवार की सुबह काल के गाल में समा गये।अब इनके परिवार पर दुख का पहाड़ तो टूट ही गया,पालन पोषण का संकट भी छा गया है।बड़ी बेटी की अवस्था विवाह योग्य हो चुकी है।सरकार वचन पत्र में सामिल करने के बाद भी कोई ठोस निर्णय नहीं ले पा रही है।बीजेपी सरकार से अब तक तीन दर्जन अतिथि शिक्षकों ने आर्थिक तंगी के चलते जान गंवा चुके हैं।जबकि राजधानी भोपाल के शाहजहानी पार्क में इक्यासी दिनों से तंबू डालकर सत्याग्रह जारी है।जिसका नेतृत्व मण्डला अतिथि शिक्षक परिवार के जिला अध्यक्ष पी.डी.खैरवार के मार्गदर्शन पर चल रहा है। बावजूद इसके प्रदेश की गंदी राजनीति का शिकार होते इनकी सुनवाई कोई नहीं कर रहा है।

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