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ऐसा भी एक सरकारी विदाई समारोह

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मुंबई.रिपोर्ट : के .रवि ( दादा ).

कई सालो तक सरकारी सेवा करने के बाद उस विभाग के अन्य लोग अपने अपने उस सहयोगी विदाई देने के लिए अपनी अपनी सोच के माध्यम से समारोह का आयोजन करते है .कई समारोह बड़े पैमाने पर तो , कई साधे तरीके से मनाए जाते है . वैसे इसमें भी कोई विशेष बात नहीं हैं .पर हाल ही में मुंबई दूरदर्शन केंद्र में एक अलगसा अनोखा विदाई समारोह मनाया गया .वह हुआ यू के मुंबई दूरदर्शन के सहायक संचालक श्री जयु भाटकर जी के विदाई समारोह में उन्हें आखरी विदाई देने के लिए कई साथी मौजूद थे विदाई के बाद सभी ने इकठ्ठा समूहभोजन करने का तय था .पर देढ़ घंटो तक काफी इंतजार करने के बाद भी जयु भाटकर जी आएभी नहीं .और ना उनकी और से कोई संदेश आया .मन के
अरुचि की जगह पेट के भूक ने ली थी .उसमे से भी कुछ वरिष्ठ , जेष्ठ ,और श्रेष्ठ निर्माताओं को भुक बर्दाश्त नहीं हो रही थी .अपने भारत देश में मूलतः टीव्ही माध्यम दूरदर्शन ने ही लाया .उसमे भी इस विदाई समारोह में मौजूद निर्मातागण भी
पहलीकतार के . जिनके नाम , उणका कार्यक्रम आज भी रलठीठोलियो के मन में बसे हुए है .उनके पास संकल्पनाओं क्या आकाल . उसलिए
उनमें से एक ने सुझाया ,के मान – सम्मान शक्श का नहीं बल्कि उनके नियुक्ति का रहता हैै .वह शक्श जानेवाला होता हैं , उसिलीए तो उन्हें अलविदा कहकर सम्मान दिया जाता हैं .
फिर हम सब मिलकर क्यों ना जयु भाटकर जी के खुर्ची को ही शाल ( गरम चादर ) , श्रीफल , एवम् गुलदस्ता दे . विदाई करने का यह अनोखा फंडा मौजूदा सभी को पसंद आया .( इस फंडे का और एक फायदा यह था के सभी को बहुत भूख भी लगी थी ,कभी खाने की थाली पर बैठते है ऐसा हर किसीको लग रहा था .)
इनमें के सबसे जेष्ठ रहे विनोदी अभिनेता जनाब याकूब सईद को जयु भाटकर जी के खुर्ची को शाल पहनाने का ,तो प्रतिमा आणि प्रतिभा रहे विजया जोगलेकर – धुमाले जी को गुलदस्ता अर्पण करने का मौका मिला . चतुर , आगे गपशप फेम जयंत ओक ने शंका निर्माण की के हम सबने ने तो यह अनोखा अलविदा समारोह मनाया .पर यह सब हमने किया यह जयु को कैसे पता चलेगा .हा यह सवाल तो अब खड़ा हुआ . उसपर भी किसी समय में सबके ही तस्वीर निकाल लेते है .तब तक उपहार गृह की और भागनेवालो को फिर से बुलाकर लिया जाएगा . आखिरकार थंडे हवा की जगह पर सभी ने खुर्चिया पकडी .और खाने की व्यग्रता से इंतजार करने लगे .आगे सब वैसा ही के इस अनूठे अलविदा समारोह में शरीक मलकराज पंचभाई , चंद्रकांत बर्वे जी , देवेंद्र भुजबल जी एवम् अजित नाईक जि का समावेश था .शायद ही हिंदुस्तान का यह पहला ऐसा अलविदा समरोह था ,जो मुंबई दूरदर्शन के इतिहास में अक्सर याद किया जाएगा .

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