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किसानों को नहीं मिली धान की राशि

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विकास ताम्रकार अनूपपुर। अनूपपुर जिले के किसानों ने गत दिवस कलेक्टर जिला अनूपपुर को अपनी लिखित आवेदन के माध्यम से धान खरीदी के संबंध में मांग किया है कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा धान खरीदी किया जा रहा था जिसकी राशि भुगतान का नियत तिथि दिनांक 20 जनवरी 2020 थाना और इस दिनांक तक समस्त किसानों को उनके धान बिक्री की कीमत हर हालत में उनके खाते पर प्राप्त हो जाएगी परंतु अनूपपुर जिले के किसानों द्वारा शासन प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा है कि हमारे द्वारा दिनांक 20 जनवरी 2020 के पूर्व ही धान खरीदी केंद्रों पर अपने धान की बिक्री कर दी गई है और वहां पर उपलब्ध कर्मचारियों की उपस्थिति में बोरी सिलाई एवं बोरे का माप करा कर रजिस्टर में दर्ज करा दी गई थी परंतु प्रशासनिक कर्मचारी अधिकारियों की लापरवाही एवं उदासीनता के कारण आज दिनांक तक हम किसानों को ना तो ऑनलाइन पावती प्राप्त हुई है और ना ही खाते पर पैसा जिससे हमें घर परिवार चलाने सहित आगे की खेती किए जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है हताश एवं परेशान किसानों ने कलेक्टर जिला अनूपपुर से न्याय की गुहार लगाते हुए मांग किया है कि जिन किसानों को आज दिनांक तक ऑनलाइन पावती एवं पैसा खाते पर प्राप्त नहीं हुआ है उन्हें प्रशासन 1 सप्ताह के भीतर धानका पैसा उपलब्ध करावे अन्यथा जिले के किसान कलेक्ट्रेट कार्यालय के सामने मेन रोड पर चक्का जाम करने के लिए बाध्य होंगे जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी! ज्ञात हो कि हमारा भारत देश कृषि प्रधान देश है और किसान हमारे देश की शान है जिनके कंधों पर हमारे देश की अर्थव्यवस्था एवं आधारशिला टिकी हुई है परंतु स्वेच्छाचारी रवैया के अधिकारी कर्मचारियों की वजह से एवं ढीला शासन व्यवस्था के कारण किसानों को वास्तविक तरहिज नहीं मिल पा रहा है उनके खून पसीने की कमाई हुई उपज की कीमत भी समय पर न मिल पाना शासन प्रशासन की स्वेच्छाचारीता हि स्पष्ट करती है गत दिवस धान खरीदी के समय भी किसानों को समस्त विक्रय केंद्रों पर भारी परेशानी झेलनी पड़ी थी किसान अपनी धान को हार्वेस्टर या मजदूर से गहाई करवा कर घर में फटक उड़ा बनाकर खरीदी केंद्र पहुंचता और वहां नियुक्त हो कर आए चेकिंग अधिकारियों द्वारा यह कहकर धान को रिजेक्ट बता दिया जाता था कि अभी यह कम सूखा है इसमें बदरा की मात्रा अधिक है जिसके कारण हताश किसान रिश्वत देने को मजबूर हो जाता और कहीं विवाद उत्पन्न कर लेता जिसके कारण मानसिक तनाव को भी सहने को मजबूर होता था कि चलो किसी कदर मेरा ध्यान बिक जाएगा तो मैं आगे की खेती करते हुए अपने परिवार का भरण पोषण करूंगा और आज दिनांक तक किसानों को उनकी धान की कीमत उपलब्ध न हो पाना सामाजिक शर्मसार की श्रेणी में आता है जिसके संपूर्ण जिम्मेदार हालिया विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी है!

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