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कोरोना कर्फ्यू से बॉलीवुड में सन्नाटा

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मुम्बई, शामी एम इरफ़ान|
बॉलीवुड यानी मुम्बई चकाचौंध, चमक-दमक, चहल-पहल की मायावी नगरी ही नहीं, यह मुम्बई महाराष्ट्र की राजधानी भी है। यहाँ हर किस्म का कारोबार होता है और हर जाति-धर्म के लोग रहते हैं। कहते हैं कि, मुम्बई कभी सोती नहीं और आज आलम यह है कि सड़कें सुनसान हैं और लोग-बाग अपने घरों के अंदर शनिवार की रात से ही बंद हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर पूरे देश के शहरों में रविवार सुबह 7 बजे से जनता कर्फ्यू शुरू हो गया था और फिर सड़कों पर सन्नाटा पसरा गया। महाराष्ट्र की राजधानी महानगर मुम्बई में आमतौर पर व्यस्त रहने वाले चर्चगेट से विरार और वी टी यानी छत्रपति शिवाजी टर्मिनल से कर्जत-कसारा तक के जैसे इलाकों में दुकानें पूरी तरह बंद रहीं और सड़कों पर सिवाय पुलिस बलों के वाहनों के अन्य वाहन नजर नहीं आए। अत्यावश्यक कार्य से निकलने वाले इक्का-दुक्का लोगों को पुलिसकर्मी समझाते नजर आए कि वे घरों में ही बंद रहें और बाहर ना निकलें।
              रविवार को ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उधव ठाकरे का आदेश आ गया कि, अगले दिन भी शाम छह बजे तक कर्फ्यू जारी रहेगा और दूसरे दिन भी लोग अपने घरों में ही बंद रहे। सड़कों पर सन्नाटा पसरा रह। दुकानें और बाजार पूरी तरह बंद रहीं। सिनेमाघर, कैफे, रेस्तरां और बार जैसी जगहों को बंद करने के आदेश सरकार ने पहले ही दे दिए थे। लोकल बसें और मुम्बई की धड़कन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों को भी पब्लिक के लिये बंद कर दिया गया है। सोमवार की सुबह ठहरा हुआ मुम्बई का जनजीवन रोजमर्रा की तरह अंगड़ाई लेना शुरू ही किया था कि, हर जगह तैनात पुलिस कर्मियों ने लोगों को समझाते नजर आये कि कोरोना वायरस से निपटना है तो एहतियात ही सबसे बड़ी सुरक्षा है और बाहर निकल चुके लोगों को वापस घरों में भेज दिया गया। कुछ जगहों पर लोगों की भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने लाठी भी चलाई है, ऐसी भी खबर मिली है। मुम्बई की धड़कन कही जाने वाली लोकल ट्रेन और बीईएसटी की बसें और हालिया शुरू की गई मिनी ए सी बसें सोमवार को सड़कों पर खाली दौड़ रही थीं। चिकित्सा विभाग से जुड़े और नगर महापालिका के कर्मचारी ही बस या ट्रेन का सफर किये। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग (पता नहीं चिकित्सक हैं या चपरासी) के कर्मियों द्वारा कई जगहों पर नाकेबंदी जैसा करके जांच पड़ताल भी करते देखा गया है। रेलवे स्टेशनों पर कड़ी जांच के उपरांत हाथ सनीटाइजर से साफ करने पर रेलवे टिकट विंडो और अंदर प्लेटफार्म तक जाने की अनुमति है। यह नजारा सोमवार का है। आगामी दिनों में क्या होगा, कुछ भी कहना मुश्किल है।
                    बहरहाल, कामकाज पहले से ही ठप्प है। आदेशानुसार सरकारी कार्यालयों में उपस्थित पांच प्रतिशत कर दी गई है। शटडाउन के चलते हर किसी का काम बंद है। धारा 144 भी पहले से ही 31 मार्च तक लागू है। रोजाना कमाने- खाने वालों का अभी से बुरा हाल है। कुछ रोज की दिहाड़ी करने वालों ने मुम्बई से बाहर अपने गांव जाने का इरादा लिये वी टी और कुर्ला टर्मिनल से मायूस लौटते भी मिले और बताया ‘सभी ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं, हम चाह कर भी अपने गांव नहीं जा सकते।’ सरकारी कार्यालयों में सवेतन छुट्टी दी गई है। सभी कल-कारखानों में ऐसा नहीं है। जो रोजाना अपना स्वतंत्र रोजगार करते हैं, अपना और अपने परिवार का पेट पालते हैं।अनुमानतः ऐसे लोग मुम्बई में तीस-चालीस प्रतिशत हैं। देखा जाये तो मुम्बई की आधी से ज्यादा आबादी किराये के घरों में रहती है। उनके समक्ष खाने-पीने के साथ किराये भरने की भी समस्या आने वाली है।        
                अब सवाल यह है कि, देश की ऐसी बहुसंख्यक जनता, जो “घर से काम” नहीं कर सकती और अपनी रोज की कमाई पर निर्भर है, के सामने आने वाले संकट को कम करने के लिए सरकार क्या कर रही है? कोरोना वायरस से पहले ही वे मौजूदा आर्थिक मंदी का खामियाजा भुगत रहे हैं। शटडाउन के कारण ऐसे गरीबों और हाशिए पर रहने वालों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा हैै। बॉलीवुड इसी देेेश-समाज का हिस्सा है और हर संकट की घड़ी में सहयोग दिया है। सिनेमाघरों के साथ शूटिंग, रिकार्डिंग और डबिंग स्टूडियोज और इनसे जुड़े बहुत से कामकाज बंद हो चुके हैं। चालीस-पचास हजार मजदूरों की बात करने वाले स्वयंभू फिल्म जगत के तथाकथित नेेताओं को भी नहीं पता कि, गरीब मजदूरों की वास्तविक संख्या क्या है? ये यूनियन वाले नेतागीरी की ओट में दादागीरी ही तो करते आये हैं। इनके सदस्य हाथी के दांत के समान हैंं। बीस-पचीस संस्थानों में अगर मानलेें सिन्टा कलाकारों की मदद करने के लिये आगे आये तो, अपने सदस्यों के अलावा किसी वनडे टूडे आर्टिस्ट की मदद नहीं करेंगे। क्योंकि बहुत से स्ट्रगलर कलाकार उनके मेम्बर ही नहीं हैं। बॉलीवुड में कोरोना की सबसे बड़ी मार ऐसे लोगों पर पड़ रही है। यह रोज मजदूरी करके अपना पेट भरते हैं। कास्टिंग डायरेक्टर की ऑडिशन ऑफिस के बाहर खड़े होते हैं। उन लोगों के लिए भोजन का इंतजाम कहां से होगा? 
                    कुछ फिल्मकारों ने अपने स्टाफ को सवेतन छुट्टी दी है और कुछ दरिया दिल फिल्मकार अपने सम्पर्क में कार्यरत लोगों का ख्याल भी रख रहे हैं। लेकिन उन गरीबों और ज़रूरतमंदों का ख्याल कौन करेगा, जिनको बड़े लोगों ने काम नहीं दिया और उनके ऑफिस में घुसने या उनसे मिलने नहीं दिया गया। अमीर व्यक्ति के पास तो बहुत साधन है। वह अपने घर में हर तरह का सामान इकट्ठा कर लेगा। परंतु उस गरीब का क्या होगा, जो रोज कमाता है और रोज खाता है। उसके बीवी बच्चे कहां जाएंगे उसको रोटी कैसे मिलेगी, इसके बारे में किसी ने सोचा है क्या? याद रहे, देश के सारे गरीब हर सुरक्षा घेरे का पालन करते हैं, परंतु अमीरों पर अंकुश लगाना शायद किसी सरकार के बस की बात नहीं। तभी तो, कनिका कपूर लंदन से आती है और सिस्टम सो रहा होता है। फिर वह मजे से पार्टियां करती है। जिसमें वसुंधरा राजे और दुष्यंत सिंह, उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जैसे पावरफुल लोग शिरकत करते हैं। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री जी होली मिलन भी स्थगित कर रहे हैं। एक तरफ तो धारा 144 लगा रखी है। हाथ धोने के प्रोग्राम चल रहे हैं। दूसरी तरफ स्वास्थ्य मंत्री ही पार्टी में मस्त है। आईएएस अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों का पार्टी में शामिल होना शर्मनाक है। 
                 हालांकि, बॉलीवुड के लोग कानून-कायदा का बखूबी पालन करते हैं। भजन सम्राट अनूप जलोटा एक मिसाल हैं। उनको विदेश से लौटने पर कोरोना जांच के लिए दो दिन आइसोलेशन में रखा गया और उन्होंने पूरा सहयोग दिया। ना कोई हाय-हाय ना कोई किट- किट। इस तरह से तमाम लोगों से बॉलीवुड भरा हुआ है। और भरा हुआ है गरीब स्टारगलर्स कलाकारों व मजदूरों से। जिनके पास रहने के लिए छत नहीं है और खाने के लिए अनाज नहीं है। इसमें से कई लोग किसी दरगाह के पास, मंदिर और गुरुद्वारों के पास कतार लगाये अक्सर मिले हैं। जो भंडारा, लंगर खाकर अपनी भूख शांत करते हैं। सरकारी आदेश से मंदिर, मस्जिद व गुरुद्वारों को बंद कर दिया गया है और लोगों को इस तरह से मिलने वाला भोजन मिलना बंद हो गया है। मुम्बई में कुछ व्यक्तियों ने ऐसी पहल की है कि गरीबों को खाना मिल जाये लेकिन वह ऊंट के मुंह में जीरा जैसा है और उसमें भी पब्लिसिटी पाने के लिए किया जा रहा कार्य की बू आती है।
                         महामारी कोरोना वायरस ने अब देश की रेल और हवाई सेवा दोनों पर ब्रेक लगा दिया है। भारतीय रेलवे ने 31 मार्च तक सभी यात्री ट्रेनों का परिचालन बंद करने का फैसला किया है। सोमवार को रेलवे ने अधिकारिकतौर पर बताया है कि, सभी लंबी दूरी की ट्रेनें, एक्सप्रेस और इंटरसिटी ट्रेन (प्रीमियम ट्रेन भी शामिल) का परिचालन 31 मार्च की रात 12 बजे तक बंद रहेगा। रेलवे की ओर से जारी सूचना में बताया गया है कि, रद्द ट्रेनों की सूची में कोलकाता मेट्रो, कोंकण रेलवे, उपनगरीय ट्रेनें नहीं चलेंगी। कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए घरेलू उड़ानों पर भी रोक लगा दी गई है। मंगलवार रात 12 बजे से उड़ानों पर रोक लगाई है। हालांकि, कार्गो फ्लाइट पर पाबंदी लागू नहीं होगी। एयरलाइंस को मंगलवार रात 12 बजे से पहले अपने गंतव्य पर उतरने के लिए योजना बनानी होगी। बता दें कि देश में हर रोज करीब 6500 घरेलू उड़ानें होती हैं और हर साल 144.17 मिलियन यात्री सफर करते हैं। देश में कोरोना वायरस का कहर से अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, देश में कोरोना के मरीजों की संख्या 434 बतायी जा रही है। अकेले 24 घंटे में 50 से अधिक नए मरीज आए हैं और 4 मौतें हुई हैं।
                  शायद भारत दुनिया का पहला देश है, जहां जज राजनीति कर रहे हैं। डॉक्टर कॉमेडी कर रहे हैं। पत्रकार दलाली कर रहे हैं और देश का चौकीदार बोल रहा है थाली बजाओ। किसके जन्म के उपलक्ष्य में? अपने देश में तो, बच्चे के जन्म पर ताली और थाली बजाने की परंपरा है। मोदी जी अपने एक मित्र के स्वागत के लिए 120 करोड रुपए और देश की गरीब जनता के लिए ताली और थाली? वाह क्या बात है! एक आह्वान पर देशवासियों ने मोदी जी की बात मानी। लेकिन मध्यप्रदेश में सरकार गिराने के उपलक्ष में हजारों भाजपाई लोगों की भीड़ इकठ्ठा होना क्या आदेश का उलंघन नहीं है? अब लॉक डाउन में हाशिये पर रहने वाले गरीब लोग रोटी का इंतजाम कैैसे करें? कुछ इस तरफ भी नजरें इनायत की जाये। कहीं ऐसा ना हो कि, कोरोना के कहर से ज्यादा भूख से मरने वालों की संख्या दर्ज हो जाये। क्योंकि, मौत ना जाति, ना धर्म, ना क्षेत्र, ना उम्र, ना राज्य, ना इलाका और ना लिंग और ना सूरत देखकर आती है। जिस दिन सिनेमाघरों में ताले लगे, उसी दिन से बॉलीवुड के गरीब हाशिये पर जीने वालों के बुरे दिन शुरू हो गये थे। 31 मार्च तक ट्रेड विशेषज्ञों की मानें तो, फिल्म जगत को करोड़ों हजार का नुकसान होगा।                                           अल्लाह खैर करे! दिल्ली, राजस्थान, बिहार, पंजाब, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस की वजह से 31 मार्च तक लॉकडाउन है। उत्तर प्रदेश के 16 जिलों को विशेष रूप से लॉकडाउन किया गया है। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक मात्र चौबीस घंटे में चौदह नये मरीज पाये गये और कोरोना से पीड़ितों की कुल संख्या 89 हो गई है। इस लिये महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उध्दव ठाकरे ने नागरिकों के हित को ध्यान में रखते हुए धारा 144 और कर्फ्यू को 31 मार्च तक जारी रखने का निर्णय लिया है। जब आम जनजीवन को जटिल मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है तो, बॉलीवुड वाले कौन से खास हैं। स्थिति- परिस्थिति से सबको दो-चार होना ही पड़ेगा। (वनअप रिलेशंस न्यूज डेस्क)

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