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जापान की संस्कृति से परिचित होकर हर्षित हुए हर्ष

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https://youtu.be/Tei73qQ3Cpo

दीपक तिवारी सिटी रिपोर्टर जबलपुर दर्पण। इसमें दो राय नहीं कि विद्यार्थियों के जीवन में विद्या का सबसे अहम स्थान होता है। लेकिन इसके साथ-साथ यदि विद्यार्थियों के भीतर छिपी हुई क्षमता को पहचान कर उसे विकसित करने का प्रयास किया जाए। तो निश्चित ही उसके परिणाम दुनिया और समाज के लिए ना केवल फलदाई होंगे बल्कि प्रेरणास्पद ही होंगे। आज के दौर में स्कूलों में बच्चों को खेल और उनकी रुचि के अनुरूप विधा में प्रशिक्षित और शिक्षित किया जाता है। साथ ही अपने देश के साथ-साथ दूसरे देश की संस्कृति के बारे में जानना पहचानना और समझने का मौका भी उन्हें स्कूल जीवन के दौरान हैं मिलने लगा है। शहर का ज्ञान गंगा इंटरनेशनल स्कूल अपने यहां पढ़ने वाले बच्चों को ऐसे ही मौके उपलब्ध करा रहा है। अमेरिकन फील्ड सर्विसेज कार्यक्रम के तहत काकेहाशी प्रोजेक्ट के अंतर्गत आयोजित इंटर कल्चरल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत शहर के हर्षित नाकरा को ग्यारह महीने के प्रवास पर 19/08/2019 को जापान जाने का अवसर प्राप्त हुआ। ज्ञान गंगा इंटरनेशनल स्कूल के कक्षा 11वीं के छात्र हर्ष को एक जापानी परिवार में एक परिवार के सदस्य के तौर पर रहने का मौका मिला। इसके अलावा जापान में साकूचौसी हाई स्कूल के हॉस्टल में रहने का मौका मिला। वहां उन्होंने न केवल रहकर पढ़ाई की बल्कि जापानी शिक्षा संस्कृति और वहां के आचार विचार रहन-सहन में भी अपने आप को ढाला। इस तरह के कार्यक्रमों से बच्चों का व्यक्तित्व बहुआयामी तौर पर विकसित होता है। उनके भीतर आने वाला आत्मविश्वास उन्हें भविष्य की किसी भी चुनौती के सामने डटकर खड़े रहने का साहस प्रदान करता है। मीडिया से बात करते हुए ज्ञान गंगा स्कूल के डायरेक्टर नितिन जैन ने बताया कि उनका स्कूल इस तरह के कार्यक्रमों में सदैव अग्रणी रहा है जिससे कि बच्चों के विकास को नए आयाम दे सकें। हर्ष नाकरा की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि हर्ष ने कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा किया और स्कूल,शहर और अपने देश का नाम रोशन किया। ज्ञान गंगा स्कूल के प्राचार्य डॉ. राजेश चंदेल ने बताया कि विगत 2015 से उनका स्कूल इस तरह के कार्यक्रमों में हिस्सा लेता रहा है। यहां पढ़ने वाले चुनिंदा बच्चों को विदेशों में प्रवास पर भेजा जाता है। ताकि वहां की संस्कृति से परिचित हो सकें। अब तक कुल 12 बच्चे स्कूल से विदेशों से आकर ज्ञान गंगा इंटरनेशनल स्कूल में अध्ययन कर इस प्रोग्राम का हिस्सा बन चुके हैं। इसी वर्ष जुलाई में जर्मनी से एक छात्रा मेरी यहां आएगी और इसी स्कूल में रहकर अध्ययन करेगी। साथ ही भारतीय संस्कृति के विषय में जानेगी। मीडिया से बात करते हुए हर्ष ने बताया कि जापान में रहकर अध्ययन करना उनके लिए निश्चय ही एक नया अनुभव था। भाषा संस्कृति खानपान और रहन-सहन के भेद की वजह से शुरुआत में उन्हें ऐसे माहौल में स्वयं को ढालने में कुछ दिक्कत महसूस हुई। लेकिन जिस परिवार के साथ में पारिवारिक सदस्य के तौर पर रहा करते थे उसने उनकी बहुत मदद की और वहां के माहौल में ढलने के लिए तैयार कराया। उन्हें जापानी सरकार की तरफ से वहां की मुद्रा येन के रूप में 15000 येन प्रति माह दिए जाते थे। ताकि वे जापान घूम कर देख सकें और वहां की संस्कृति के बारे में अच्छे से जानकारी हासिल कर सकें।

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