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निजी स्कूलों द्वारा ऑनलाइन क्लासेज के बदले फीस जमा करने का बनाया जा रहा है दबाव

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जबलपुर। कोरोना कॉल ने तकरीबन पूरे विश्व को भारी आर्थिक, मानसिक और शारीरिक नुकसान पहुंचाया है। अभी पूरे विश्व में कोरोनावायरस का कहर जारी है। लोग समझदारी और सावधानी का परिचय देते हुए अब लाकडाउन के अंतर्गत दी जाने वाली छूट के तहत अपने अपने क्रियाकलाप जारी रखे हुए हैं। लेकिन इस अवधि के दौरान जहां एक और अमीर वर्ग अपने ऊपर हुए नुकसान को सहन कर रहा है वहीं दूसरी और गरीब वर्ग की सहायता सरकार कर रही है स्वयंसेवी संस्थाएं कर रही हैं लोग स्वयं आगे आकर जरूरतमंदों की सेवा कर रहे हैं। किंतु असहाय और निरीह यदि किसी को छोड़ा गया है तो वह है मध्यमवर्ग। उस पर बैंकों के कर्जे उनकी मासिक किस्त, अपने निजी खर्चे और कमाई बंद हो जाने से दोहरा वज्रपात पड़ा है। इसके साथ ही यह समस्या भी देखने में आ रही है कि उनके बच्चे जिन निजी स्कूलों में पढ़ते थे। उन स्कूलों ने ऑनलाइन कक्षाएं लगाई। उन कक्षाओं में बच्चों को 4 से 5 घंटे प्रतिदिन पढ़ाया जाने लगा। शिक्षक ऑनलाइन क्लास ले रहे थे इसके चलते बच्चों के साथ अभिभावक भी व्यस्त रहते थे। उसके बाद ऑनलाइन ही होमवर्क दिया जाता था और उस होमवर्क कराने में भी शिक्षक अभिभावक व्यस्त रहते थे। ऐसी स्थिति में मध्यमवर्ग की कमर उस समय टूट गई जब इन निजी स्कूलों ने अपनी भारी-भरकम ट्यूशन फीस का बोझ है अभिभावकों की जेब पर डाल दिया। इसी बात से आहत होकर सभी निजी स्कूलों के बच्चों के अभिभावक आज जिलाधीश कार्यालय पहुंचे और उन्होंने अपनी समस्याओं के विषय में संयुक्त कलेक्टर दिव्या अवस्थी को अपना ज्ञापन सौंपा और अपनी समस्याओं से अवगत कराया। मीडिया से बात करते हुए कलेक्टर महोदया अभिभावकों की समस्याओं को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने की बात कही। अभिभावकों के साथ आए डॉ मुकेश अग्रवाल ने बताया कि अभिभावकों के साथ यह ज्यादती हो रही है। यह उनके आंदोलन का पहला चरण है यदि राहत नहीं दी गई तो यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।

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