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परिषद की मनमर्जी के चलते से खुले में फेंके जा रहे मृत मवेशियों के शव

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पटेरा। नगर परिषद पटेरा की मनमर्जी का खामियाजा इन दिनों वार्ड क्रमांक 15 आदिवासी बस्ती के लोगों को उठाना पड़ रहा है। पिछले कई महीनों से नगर परिषद के अधिकारियों की सह पर परिषद के कर्मचारी नगर मे मृत होने वाले मवेशियों के शवो को यू ही खुले मे आदिवासी बस्ती मे एकत्रित किये जा रहे कचरे के ढेरो पर फेक रहे है।
खुले मे पड़े पड़े सड़ रहे मवेशियों के शवो उठ रही दुर्गंध-हवा के झोको के साथ मृत मवेशियों के सडे गले पड़े शवो से उठ रही अति तीव्र दम घुटा देने वाली दुर्गंध के चलते आदिवासी बस्ती के लोग का जीना दुस्वार सा हो गया है एवं यहा रहने वाले लोग नरकीय जीवन जीने पर बाधित हो गये है। साथ ही उसी रास्ते से निकलने वाले राहगीरों उस रास्ते से निकलने के साथ ही सांस लेना मुश्किल हो गया है। वहीं दूसरी ओर संक्रामक बीमारियों के भी फैलने का भी अंदेशा बना हुआ है। यहा रहने वाले गणेश आदिवासी ने बताया कि घर जगह कम होने एवं लगातार हो रही ठंड के चलते मेरे परिवार के सभी लोग ज्यादातरघर के बार आंगन मै रहने वाली धूप मे बैठते हैं परन्तु समीप ही पडे मवेशियों के शवो से आने वाली दुर्गंध के कारण घर के आँगन तक मे नही रह पाते है साथ ही इस दुर्गंध के चलते मै और मेरे परिवार के सदस्य अच्छे से खाना तक नही खा पाते है।

मृत मवेशियों को उठाने नही किये गये ठेके-गौरतलब है कि मृत मवेशियों के शवों को उठाने के लिए नगर परिषद से ठेके उठाए जाते हैं, लेकिन पिछले पाँच वर्षों में परिषद व्दारा मृत पशुओं को उठाने के लिए नही किये जा सके ठेके उसके विपरीत परिषद के सफाई कर्मियो से उठवाये जा रहे है मृत मवेशी जोकि परिषद की मनमानी के चलते खुले स्थानो पर ही शवों को डाल रहे हैं।
पानी फिलटर प्लांट एवं आई टी आई भवन के बीचो-बीच एकत्रित किया जा नगर से निकलने वाला कचरा-नगरपरिषद कचरा एकत्रित कराते हुए इसे फेकने के सारे साधन मौजूद हैं और कचरा एकत्रित कराते हुए फेकने का कार्य भी कराया जाकर पटेरा को स्वच्छ बनाने का प्रयास किया जा रहा है किन्तु दूसरी ओर जहाँ नगर परिषद् की कचरा गाड़ियों द्वारा नगर का कचरा एकत्रित कर फिंकवाया जा रहा है वहां से लगभग 100 मीटर की दूरी पर ही पानी फ़िल्टर प्लांट लगा हुआ है जिससे स्वच्छ पानी पटेरा सहित पटेरा ब्लाक के अनेक ग्रामो तक पहुँचाया जा रहा है एव नजदीक की गरीब आदिवासियों के मकान भी हैं जो इस कचरे के कारण नारकीय जीवन जीने को बाधित हैं ।
एक ओर जहाँ गाय को हम माँ का दर्जा देते हैं उसकी सेवा करते हैं एवम् मृत हो जाने पर उसे जमीन में गाड़ते हुए उसका अंतिम संस्कार करते हैं वही नगर परिषद् द्वारा ग्राम में मृत होने वाले मवेशियों को नगर की नालियो से निकलने वाले गंदगी कीचड कचरे के साथ परिषद ट्रेक्टर ट्राली में डालकर यही फ़िल्टर प्लांट के पास यूँ ही खुले में फेककर अपनी कर्तव्य निष्ठता और अपने दायित्व की इति श्री कर लेते हैं।जब इस संबंध में बस्ती के लोगो से बात की तो बस्ती मे रहने वाले लोगो ने बताया कि खुले मे पडे मृत पशुओं के शव यहा पडे पडे सड गल रहे है एवं उन शवो से हवा के झोको के साथ इतनी तीव्र दम घुटा देने वाली बदबू आती है कि जिस बदबू के कारण जीवन दुस्वार है इसके अलावा यहां से थोडी ही दूरी पर आई टी आई भी स्थिति होने से आई टी आई जाने वाली छात्राओ ने भी बदबू और खुले में मवेशियों के फेके जाने की बात कही एवं मवेशियों के खुले मे फेके जाने के कारण यहां आवारा कुत्तो का जमावड़ा लगा रहता है जो इन मवेसियो नोचते चीथते रहते है साथ ही यहां से निकलने वाले राहगीरो आई टी आई जाने वाले छात्र छात्राओं बस्ती के रहवासियों को कभी भी नुकसान पहुंचा सकते हैं यहां निवासरत गणेश आदिवासी ने बताया की ठण्ड के समय बाहर धुप में बैठकर खाना खाते हैं लेकिन बदबू के कारण खाना खाना मुश्किल है वही घर में जगह कम होने के कारण ज्यादातर बाहर आँगन में रहते है जिससे काफी परेशानी है वही सन्तोष आदिवासी से पूछे जाने पर की क्या आपने इसकी शिकायत नगरपरिषद कार्यालय में की संतोस का कहना था मोहल्ले वालो ने की थी जिनकी सुनवाई नही हुई तो हमारी कौन सुनेगा।

इस सम्बन्ध में कचरा भरने और वाहन चालक ने बताया की हमको जैसा आदेश दिया जाता है वैसा करते हैं ।

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