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फूलों की होली में सराबोर हुये श्रद्धालु-सुंदरसाथ

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श्री प्राणनाथ मंदिर में दिन-रात चली होली की बयार, गुलाब की महक से गुलजार हुआ मंदिर का प्रांगण, देश के कोने-कोने से आये हजारों श्रृद्धालु बनें साक्षी

पन्ना। श्री प्राणनाथ मंदिर के प्रांगण में बिखरे फूलों से होली खेलते सुन्दरसाथ।, 2-पन्ना-दूर देश से आये श्रृद्धालु मंदिर प्रांगण में फूलों की होली का आनंद उठाते हुए।, 3-पन्ना-फूलों की वर्षा से प्रफुल्लित नाचते-गाते होली मनाते हुए लोग।, 4-पन्ना-मंदिर परिसर में बिखरीं फूलों की पंखूडियों से खेेलते हुए बच्चे।, 5-पन्ना-फाग गाते हुए व फूलों की वर्षा करते हुए संुदरसाथ।, 6-अमानगंज-अमानगंज में होली मनाते हुए लोग।, 7-पन्ना-श्रीराज जी महाराज जी निजी दरबार बंगला जी में परमधाम के खरछप्पर के हिण्डोल में शोभायमान।         
पन्ना। पवित्र नगरी पन्ना अपनी हीरों की चकाचौंध व विश्व प्रसिद्ध श्री प्राणनाथ जी मंदिर व पवित्र मनोहारी स्थान जिस मंदिर के बारे में कवियों ने अपनी लेखनी न जाने किन आयाम तक  पहुंुचा दी है। “पन्ना के जुगल किशोर हो मुरलिया में  हीरे जड़े“ की उपमा से नवाजे गए अभूतपूर्व मंदिरों में फागुन की बयार के बीच जब रंग बरसते हैं तो एक तरफ महामति श्री प्राणनाथ अपने सखियों संग प्रेम रस के आनन्द में भक्तों को डुबोने चले आते है तो दूसरी तरफ 18 कला अवतारी भगवान श्री कृष्ण जिन्हें टेसू के फूलों से विशेष लगाव है और वृन्दावन से होली खेलने पन्ना जुगल जोड़ी के साथ आ जाते हैं और यहां एकत्रित हजारों श्रृद्धालु के बीच टेसू के रंग और फूलो के बीच जमकर होली खेलते हैं ध्से वक्त इस रस में भींगे भक्तों को सिर्फ एक बात ही याद रहती है कि कैसे अपने प्रियतम को रंग से सराबोर कर दें और खुद भी उनके रंग में रंग जाए।   

परमधाम के खरछप्पर के हिण्डोल में शोभायमान हुये श्रीजी
    होली के पावन पर्व पर श्री प्राणनाथ जी मंदिर के निज दरबार में श्रीजी की विशेष शोभा रहती है। इस पर्व पर श्रीजी को खरछप्पर का हिण्डोला (झूला) जोकि विशेष तौर पर मोतियों से जडा हुआ होता है। जिसमें विराजमान श्रीजी की शोभा के दर्शन करने देश-विदेश से हजारों लोग पन्ना में खिंचे चले आते हैं और यहां होने वाली फाग व होली के रस में डूबे रहते हैं। इस वर्ष होली के इस अवसर पर देश के कोने-कोने से पांच से अधिक श्रृद्धालुओं ने आकर यहां की होली में अपनी सहभागिता निभाई और श्रीजी के चरणों में मत्था टेककर अपने आपको धन्य महसूस किया। 
केसर व गुलाब की पंखुडियों के साथ सुगन्धित अबीर से ख्ोली होली
विश्व प्रसिद्ध प्राणनाथ जी मंदिर की बात की जाए तो होलिकादहन के एक दिन पूर्व ही फागों के स्वरलहरी में सुन्दरसाथ आत्मविभोर होकर अपने धाम धनी को मनाते हैं तो फिर होली में चांदी की पिचकारी में रंग भरकर सभी सुन्दर साथ को केसर मिश्रित सुगन्धित रंगों से सराबोर कर देते हैं तो वहीं दूसरी तरफ जुगल किशोर जी मंदिर में जब टेसू के फूलों से बनाई गई सुगन्धित रंगों से होली खेली जाती है तो लगता है भगवान स्वयं अनन्त स्वरूप होकर अपने भक्तों के बीच हंसी ठिठोली कर उनके जीवन को धन्य कर रहे हैं।   
देश के कोने-कोने से पहुंचे श्रद्धालुओं ने खेली होली
श्री पदमावतीपुरी धाम पन्ना में जो कि प्रणामी सम्प्रदाय का प्रमुख तीर्थ स्थल है, यहां पर प्रत्येक त्यौहार में हजारों की संख्या में श्रद्धालु देश के कोने-कोने से आते हैं। होली के त्यौहार में भी देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं का जमावड़ा पन्ना जी में विगत एक सप्ताह से शुरू हो गया था। मथुरा-वृन्दावन की तरह यहां मनाया जाने वाला होली का यह त्यौहार बड़े ही उत्साह पूर्वक मनाया गया। इस मंदिर में  जहां केशर के रंग और गुलाल उड़ती है तो वहीं फूलों की वर्षा सभी सुन्दरसाथ का मन मोह लेती है। मालुम ही नहीं पड़ता कि कौन श्रद्धालु किस प्रदेश से आया है। क्योंकि यहां आकर सभी एक ही रंग में रंग जाते हैं। यहां अपने-पराये का कोई भेदभाव नहीं रहता। सभी होली की मस्ती में अपने आपको भिगांे लेते हैं। इस बार श्री प्राणनाथ जी मंदिर में होली के उत्सव में शामिल होने गुजरात, पंजाब, महाराष्ट, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान सहित अन्य प्रांतों से श्रद्धालुगण पहुंचे। 

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