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लाइफलाइन उड़ान के अंतर्गत अब तक 74 उड़ानों का परिचालन

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एक ही दिन में 22 टन से अधिक सामग्री की ढुलाई

भोपाल। नागरिक उड्डयन मंत्रालय (एमओसीए) की लाइफलाइन उड़ान पहल के अंतर्गत देश भर में चिकित्सा कार्गो की ढुलाई के लिए आज तक 74 उड़ानों का परिचालन किया गया है। अब तक कुल 37.63 टन कार्गो की ढुलाई की जा चुकी है, जिसमें से 22 टन से ज्‍यादा कार्गो की ढुलाई 31 मार्च 2020 को की गई।

31 मार्च को निम्‍नलिखित उड़ानों का परिचालन किया गया  :

लाइफलाइन 1: एयर इंडिया की उड़ानें: मुंबई-नई दिल्ली-गुवाहाटी-मुंबई के दौरान मेघालय, असम, आईसीएमआर की खेप, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और पुणे की खेप पहुंचाई

लाइफलाइन 2: एयर इंडिया की उड़ानें: नई दिल्ली-हैदराबाद-त्रिवेंद्रम-गोवा-दिल्ली। इसने आंध्र प्रदेश, केरल, आईसीएमआर, गोवा की खेप पहुंचाई।

लाइफलाइन 3: एलायंस एयर की उड़ान: हैदराबाद –बेंगलुरु- हैदराबाद में वस्त्र मंत्रालय की खेप पहुंचाई गई।

लाइफलाइन 4: एयर इंडिया की उड़ान: चेन्नई -पोर्ट ब्लेयर-चेन्नई

लाइफलाइन 5: भारतीय वायुसेना की उड़ान: हिंडन (दिल्ली) से वाया सुल्लूर होते हुए पोर्ट ब्लेयर तक

कोविड -19 के खिलाफ भारत की जंग के तहत नागरिक उड्डयन मंत्रालय, भारत सरकार ने देश भर में और देश से बाहर चिकित्सा और आवश्यक वस्‍तुओं की ढुलाई के लिए “लाइफलाइन उड़ान” उड़ानों का परिचालन शुरू किया है।

इन उड़ानों का विवरण इस प्रकार है:

  क्र. सं. दिनांक एअर इंडिया एलायंस आईएएफ इंडिगो स्पाइसजेट कुल परिचालित उड़ानें
1 26.3.2020 02 02 04
2 27.3.2020 04 09 13
3 28.3.2020 04 08 06 18
4 29.3.2020 04 10 06 20
5 30.3.2020 04 03 07
6 31.3.2020 09 02 01     12
  कुल उड़ानें 27 29 10 06 02 74

* एअर इंडिया और आईएएफ ने लद्दाख, दीमापुर, इम्‍फाल, गुवाहाटी और पोर्ट ब्‍लेयर  के लिए आपसी साझेदारी की।

·       एक समर्पित मेडिकल एयर कार्गो संबंधित वेबसाइट लॉन्च की गई है और यह आज से पूरी तरह चालू हो गई है। इसका लिंक एमओसीए की वेबसाइट (www.civilaviation.gov.in) पर उपलब्ध है।

·       घरेलू कार्गो परिचालक : ब्लू डार्ट और स्पाइसजेट विमानन कम्‍पनियां वाणिज्यिक आधार पर कार्गो उड़ानों का परिचालन कर रही हैं।

कैबिनेट सचिव की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी राज्यों के मुख्य सचिवों/डीजीपी के साथ बैठक

कैबिनेट सचिव ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों के साथ बैठक की।

·       बैठक में राज्यों को तब्लीग जमात में शामिल हुए लोगों के गहन संपर्क का पता लगाने के बारे में सजग किया गया, क्योंकि जमात के लोगों के देश के अन्य हिस्सों में लोगों के साथ संपर्क में आने की आशंका से कोविड-19 के संक्रमण को रोकने के प्रयास खतरे में पड़ गए हैं। राज्यों से  कहा गया है कि वह जमात के लोगों के संपर्क का पता लगाने का काम युद्धस्तर पर करें।

·       यह पता चला है कि तब्लीग जमात में भाग लेने वाले विदेशियों ने वीजा शर्तों का उल्लंघन किया था। राज्यों से ऐसे विदेशियों के साथ ही जमात के आयोजकों के खिलाफ भी वीजा की शर्तों के उल्लंघन के लिए कार्रवाई शुरू करने को कहा गया है।

·       राज्यों से अगले सप्ताह के भीतर प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना लागू करने के लिए कहा गया। इसमें लाभार्थियों के लिए बड़े पैमाने पर नकदी हस्तांतरण का काम किया जाएगा। कोविड संक्रमण के मौजूदा हालात में आपसी दूरी बनाए रखना सुनिश्चित करने के लिए इसे अलग- अलग समय में लागू करने की हिदायत दी गई है।

·       बैठक में इस बात का संज्ञान लिया गया कि लॉकडाउन को पूरे देश में प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। राज्यों से कहा गया कि वे लोगों को सामुदायिक स्तर पर दूरी बनाए रखने के लिए तैयार करने के साथ ही बिना किसी बाधा के वस्तुओं की अंतर-राज्य आवाजाही सुनिश्चित करें।

·       राज्य सरकारों से आवश्यक वस्तुओं का विनिर्माण और उनकी आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।

जम्मू कश्मीर प्रशासन ने एनपीपीए की मूल्य निगरानी और संसाधन इकाई स्थापित की

राष्ट्रीय स्तर पर कोरोना संक्रमण से निबटने के प्रयासों के मद्देनजर एक महत्वपूर्ण कदम

राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण(एनपीपीए) द्वारा केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में मूल्य निर्धारण और संसाधन इकाई (पीएमआरयू) की स्थापना के साथ ही आज देश में पीएमआरयू वाले राज्यों और संघशासित प्रदेशों की संख्या बढकर 12 हो गई है। केरल, ओडिशा, गुजरात, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, नागालैंड, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और मिजोरम में पीएमआरयू की स्थापना पहले ही की जा चुकी है।

पीएमआरयू, एक पंजीकृत सोसाइटी के रूप में , जम्मू कश्मीर प्रशासन के औषध नियंत्रक के प्रत्यक्ष नियंत्रण और पर्यवेक्षण के तहत कार्य करेगा। इसे एनपीपीए द्वारा आवर्ती और गैर-आवर्ती खर्चों के लिए वित्त पोषित किया जाएगा। पीएमआरयू सस्ती कीमतों पर दवाओं की उपलब्धता और पहुंच सुनिश्चित करने में एनपीपीए और राज्य औषध नियंत्रक की मदद करेगा। इसके द्वारा सभी के लिए दवाओं की उपलब्धता और सामर्थ्य वाले क्षेत्रों में सेमिनार, प्रशिक्षण कार्यक्रम और अन्य प्रकार की जानकारियां उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा और संचार (आईईसी) गतिविधियों का आयोजन करने की भी संभावना है।

पीएमआरयू औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ) के प्रावधानों के तहत कार्रवाई करने के लिए दवाओं के नमूने एकत्रित करेगा, डेटा एकत्र कर उनका विश्लेषण करेगा और दवाओं की उपलब्धता तथा उनकी ज्यादा कीमतें वसूले जाने के संबंध में रिपोर्ट

ऐसे समय में जबकि देश कोविड  जैसी महामारी से जूझ रहा है,पीएमआरयू द्वारा जम्मू कश्मीर में दवाओं की ज्यादा कीमतें वसूले जाने के मामलों की निगरानी करने के साथ ही स्थानीय स्तर पर जमाखोरी के कारण दवाओं की कमी जैसी समस्याओं का पता लगाये जाने का काम काफी महत्वपूर्ण होगा।

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय

संकट की घड़ी में सीआईपीईटी के सामुदायिक राहत के लिए महत्वपूर्ण कार्य

     कोविड-19 महामारी को ध्यान में रखते हुए रसायन एवं पेट्रोकेमिकल्स विभाग के अंतर्गत केन्द्रीय प्लास्टिक इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान विभिन्न राज्यों में अपनी सुविधाओं के माध्यम से समुदाय की भलाई का नेक कार्य कर रहा है। रसायन एवं पेट्रोकेमिकल्स विभाग रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के तहत कार्य करता है।

     इस अभियान के तहत सीआईईपीटी के ग्वालियर केन्द्र ने अपना कौशल प्रशिक्षण केन्द्र जिला मजिस्ट्रेट/समाहर्त्ता को सौंप दिया है। कौशल प्रशिक्षण केन्द्र को 72 बिस्तरों वाले क्वॉरंटाइन केन्द्र में तब्दील किया गया है। इसके अलावा सीआईपीईटी के अधिकारी और कर्मचारी चौबीसों घंटे पैरामेडिकल टीम को सहायता प्रदान करेंगे।

     इसी प्रकार सीआईईपीटी भुवनेश्वर में कोरोना महामारी के फैलाव से लड़ने के लिए लोगों के बीच जागरुकता अभियान चलाया है। लोगों में मास्क, सैनीटाइजर, कीटाणुनाशक और पानी की बोतलें वितरित की गई हैं। केन्द्र प्रस्तुतियों के माध्यम से भी लोगों को महामारी के प्रति जागरूक बना रहा है।

     सीआईपीईटी के सभी कर्मचारियों ने स्वेच्छा से पीएम केयर्स फंड में अपने एक दिन के वेतन – कुल 18 लाख रुपये का योगदान दिया है।

     सीआईपीईटी-एसएआरपी एलएआरपीएम की शोध एवं विकास शाखा ने डब्ल्यूएचओ दिशा-निर्देशों के अनुरूप सैनीटाइजर विकसित किया है और इसे कोविड-19 के खिलाफ सुरक्षा के लिए सुरक्षा व हाऊस कीपिंग कर्मचारियों के ब च वितरित किया है।

सीआईपीईटी, लखनऊ ने शहर के जरूरतमंद, गरीब और प्रवासियों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए लखनऊ स्थित अन्नदा, नगर निगम निधि को 5 लाख रुपये का योगदान दिया है।

जरूरतमंद और गरीब लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए सीआईपीईटी के विभिन्न केन्द्र भी इसी तरह के प्रयास कर रहे हैं।

उर्वरक विभाग के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने 27 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पीएम केयर्स कोष में दान की

रसायन और उर्वरक मंत्रालय के उर्वरक विभाग के सार्वजनिक उपक्रमों ने कोविड-19 महामारी से निबटने के लिए  “प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं आपातकालीन स्थिति राहत” (पीएम केयर्स) कोष में 27 करोड़ रुपये से अधिक का दान दिया है।

केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री श्री डी. वी सदानंद गौड़ा ने ट्वीट करते हुए कहा, “कोविड-19 से निबटने के लिए भारत सरकार के प्रयासों का साथ देने के मेरे अनुरोध का सम्मान करने के लिए मैं इन कंपनियों के प्रबंध निदेशकों का बहुत आभारी हूं।”

श्री गौड़ा ने कहा, “उर्वरक कंपनी इफको ने पीएयम केयर्स में 25 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। मैं इफको को इसके लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। इससे सरकार को कोरोना वायरस से निपटने और प्रकोप के प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी।’’

केंद्रीय मंत्री ने एक अन्य उर्वरक कंपनी कृभको की भी सराहना की, जिसने अपने कार्पोरेट सामाजिक दायित्व, सीएसआर निधि से पीएम केयर्स के लिए 2 करोड़ रुपये जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि यह कोविड-19 के प्रकोप के मद्देनजर भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे राहत कार्यों में काफी मददगार होगा।

एनएफएल किसान द्वारा किए गए योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि मेरे मंत्रालय के अधीन एक सार्वजनिक उपक्रम ने अपनी सीएसआर निधि से पीएम केयर्स में 63.94 लाख रुपये का योगदान दिया है। इसके लिए कंपनी के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक मनोज मिश्रा को धन्यवाद ।”

श्री गौड़ा ने अपने अपने मंत्रालय के तहत आने वाले सार्वजनिक उपक्रमों से अपनी सीएसआर निधि का कुछ हिस्सा पीएम केयर्स में दान करने का आग्रह किया था।  इन सार्वजनिक उपक्रमों के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशकों को भेजे गए  पत्र में, श्री गौड़ा ने कहा था कि भारत सरकार कोरोना वायरस के संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए सभी संभव कदम उठा रही है, हालांकि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए इतने बडे पैमाने पर आई आपदा की स्थिति में समाज के सभी वर्गों से ठोस प्रयासों और सहयोग की आवश्यकता  है, इसलिए “मैं आप सभी से अनुरोध करता हूं कि आप अपने सीएसआर बजट की अधिकतम संभव राशि  पीएम केयर्स के लिए दान करें।’’

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