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श्रद्धांजलि: सबसे बुरा होता है सपनों का मर जाना

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शामी एम इरफ़ान की रिपोर्ट, मुम्बई । बाॅलीवुड में आत्महत्या करने वालों में एक नाम और जुड़ गया है अभिनेत्री प्रेक्षा मेहता का। उसने अपनी जीवन लीला पिछले सप्ताह सोमवार को समाप्त की और आज भी उसकी आत्महत्या को लेकर चर्चा गर्म है। इंदौर की पुलिस आत्महत्या का कारण पता करने का भरसक प्रयत्न कर रही है। पत्र-पत्रिकाओं व टीवी चैनलों पर खबर का सिलसिला आज भी जारी है। निष्कर्ष पर ना कोई पहुँचा है और ना पहुंचेगा। प्रेक्षा मेहता जैसी समझदार, प्रतिभावान की कमी की भरपाई होने वाली नहीं है।
                ‘सबसे बुरा होता है सपनों का मर जाना’ सोशल मीडिया पर उसका यहअंतिम अपडेट सुर्खियों में रहा। उसकी मृत्यु की खबर ने मुझे भी झंकझोर कर रख दिया है। उसकी छोटी सी जिंदगी का अवलोकन करने पर ऐसा नहीं लगता कि, लाॅकडाउन के दौरान काम ना होने के कारण दूसरों को जीने की सीख देने वाली इस तरह से टूटकर मौत का फंदा गले में डाल लेगी। वह किसी भी तरह का नशा नहीं करती थी। उसको नशा था तो अपने काम का, काम को सीखने का उसमें पारंगत होने का और जुनून था बुलन्दियो पर पहुंचने का और उसने कम समय में बड़ी उपलब्धियां हासिल की थी। उसने जो चाहा, वह किया, वह पाया फिर भी वह खुद से टूट गई तो कोई बात तो जरूर है।
                       इंदौर के हीरा नगर थाने के इंस्पेक्टर राजीव भदौरिया का कहना है कि प्रेक्षा के कमरे से एक सुसाइड नोट मिला है। उसने लिखा है कि, “मेरे टूटे हुए सपनों ने मेरे कॉन्फिडेंस का दम तोड़ दिया है। मैं मरे हुए सपनों के साथ नहीं जी सकती हूं। इस निगेटिविटी के साथ रहना मुश्किल है। पिछले एक साल से मैंने बहुत कोशिश की। अब मैं थक गई हूं।”  आखिर प्रेक्षा ने यह सब क्यों लिखा? क्या प्रेक्षा डिप्रेशन से जूझ रही थी? बचपन से हंसने-बोलने वाली यह लड़की कभी खामोश नहीं बैठी और अचानक मरकर खामोश हो गई। बहुत से सवाल उठाए जा सकते हैं और सवाल जवाब का सिलसिला चालू भी है लेकिन उसकी पर्सनल लाईफ में कोई लव स्टोरी नहीं थी, इस बात पर यकीन नहीं होता। घर वाले शादी करने का दबाव बना रहे थे या नहीं बना रहे थे? घर वाले उसकी शादी किस के साथ करना चाहते थे और वह किस से शादी करना चाहती थी, यह प्रश्न भी महत्वपूर्ण है।
                      मुम्बई एक ऐसा ड्रीम सिटी है कि, यहाँ पर सपनों का व्यापार होता है और सपनों के साथ व्यभिचार भी होता है। फिल्मों में नायक नायिका का सपना सजाने वाले ज्यादातर टूटकर बिखरे ही हैं। महिलाओं को वरदान प्राप्त है, उन्हें काम और कामयाबी जल्द हासिल हो जाती है। कोई उनका गाॅडफादर भी बन जाता है तो कोई किसी का ब्वाय फ्रेंड। अधिकांश लोगों ने महिला मित्र के धन दौलत पर अपनी मंजिल की नींव मजबूत की है। क्या यह बात किसी से छुपी है कि, कमालिस्तान स्टूडियो के मालिक फिल्मकार कमाल अमरोही ने मीना कुमारी की दौलत के बलबूते अपनी कामयाबी का परचम लहराया था। मिसाले बहुत सी है और आज के झोलर फिल्मकार भी आने वाली लडकियों को बहला- फुसलाकर उनको लूटने में लगे रहते हैं।
                        इंस्टागराम और फेसबुक पर सर्च करते हुए कई सवाल मेरे जेहन में आये। प्रेक्षा पचीस साल की हो चुकी थी। 2017 में मुम्बई की मायावी नगरी में कदम रख चुकी थी। कोई न कोई जरूर उसका अंतरंग साथी था, जो 2020 आते-आते उससे ब्रेक अप कर चुका था और मुमकिन है, इस कारण परेशान हो गई हो, तभी तो 28 फरवरी की उसकी एक पोस्ट है, जिसमें वह लिखती है कि, ‘मैंने जिसे अपनी हर दुआ में मांगा, उसने मुझे पहचानने से ही इंकार कर दिया।’ मुझे लगता है कि, उसे साल के शुरू में ही या वैलेन्टाइन डे पर भारी झटका लगा था। जिससे वह उबर नहीं सकी और फांसी के फंदे से झूल गई। 
         लॉकडाउन के कारण सभी तरह की शूटिंग रुक जाने के कारण बेचैन रहने की बात बेमानी लगती है। लॉकडाउन शुरू होते ही वह अपने माता-पिता मंजू मेहता व रवींद्र मेहता  के पास इंदौर पहुंच गई थी, जहाँ उसने रहते हुए आत्महत्या की। प्रेक्षा ने अपने आखिरी इंस्टाग्राम लाइव में एक दोस्त को बताया था कि उनके पैरेंट्स उन्हें बार-बार शादी करने के लिए कह रहे हैं। हालांकि उसके पिता का कहना है कि, “हमने कभी उस पर दबाव नहीं बनाया। कभी-कभी हम उससे हल्के-फुल्के अंदाज में शादी के लिए जरूर कहते थे।”
                      बता दें कि, प्रेक्षा ने अपने अभिनय की शुरुआत रंगमंच से की थी। उसने पहली बार सआदत हसन मंटो की कहानी पर आधारित नाटक ‘खोल दो’ में अभिनय करके रंगमंच जगत में अपनी पहचान दर्ज कराई थी। उसे थियेटर में कई राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले हैं। वह मध्य प्रदेश स्कूल ऑफ ड्रामा से विधिवत अभिनय का प्रशिक्षण लेने के अलावा डांस, काॅस्टयूम डिजाईनिंग, सेट डिजाईनिंग और मार्शल आर्ट की कल्लरीपायट्टू पद्धति का भी प्रशिक्षण लिया था। कई वीडियो एलबम के साथ-साथ पिछले दो-तीन सालों में कई टीवी शोज में उसकी अभिनय प्रतिभा के दर्शन हुए हैं। ‘क्राइम पेट्रोल’, ‘लाल इश्क’, ‘मेरी दुर्गा’, ‘सिध्दि विनायक’, ‘आशिकी’ जैसे शो तथा मंटो की कहानी पर बनी ‘उलटी सलवार’ और ‘सखा’ शाॅॅॅर्ट मूवी के अलावा उसने अक्षय कुमार की फिल्म ‘पैडमैन’ में भी काम किया था। वाकई सबसे बुरा होता है किसी का यूँ आत्महत्या करना! सपने तो पलकों पर सजाने के लिए होते हैं, एक सपना के टूटने से जीवन का अंत नहीं करना चाहिए।

(वनअप रिलेशंस)

(सभी फोटो इंस्टाग्राम और फेसबुक से साभार)

शामी एम् इरफ़ान (+919892046798) वनअप रिलेशंस न्यूज एंड फीचर्स सर्विस, मुम्बई ।

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