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सहायंत्री व उपयंत्री बने स्वंयभू, मनरेगा कार्य मे कर रहे मनमानी

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टी एस व मूल्यांकन मे गड़बड़ी , किसान की शिकायत,बिना फील्ड देखे कर दिया 6800 का भुगतान

कोरोना संकट के दौर से गुजरने के कारण सरकार द्वारा मजदूर वर्ग को राहत देने के लिये मनरेगा मे भरपूर रोजगार देकर मजदूर वर्ग के लोगो को राहत देने की बात कही और अतिशीघ्र कार्य भी प्रारंभ करा दिये गये लेकिन प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी स्वंय को सर्वोत्तम मानक र कार्य करा रहे है औैर ना तो किसान की संतुष्टि अनुरूप टी एस किया जा रहा है और ना ही कार्य का मूल्यांकन किया जा रहा है ।

नरसिंहपुर । जिले प्रशासन द्वारा सरकार से निर्देश प्राप्त होने के बाद अतिशीघ्र लोगो काम देने की कवायद शुरू की और कुछ हद तक सफलता भी प्राप्त कर ली लेकिन प्रशासन के जिम्मेदार पदो पर बैठे कुछ अधिकारियों व कर्मचारियो के कारण प्रशासन के मनसूबो पर पानी फिरता नजर आने लगा है एंव मजदूरों के साथ- साथ किसानो में भी निराशा देखी जा रही है ।
मामला इस प्रकार
जिले की करेली जनपद पंचायत अंर्तगत आने वाले ग्राम समनापुर निवासी किसान द्वारा सीएम हेल्प लाईन पर शिकायत की गई है शिकायत मे उल्लेख किया गया है कि बीते 30 दिन पूर्व ग्राम पंचायत मे 45000 रूपये की लागत के कार्य से होने वाले मेढ़ बंधान कार्य की मांग की गई थी जिसमे जनपद पंचायत मे पदस्थ अधिकारियो द्वारा मात्र 23000 रूपये के कार्य का टीएस जारी किया गया
टीएस होने के बाद मजदूरो से मेढ़ बंधान कार्य कराया जा चुका है जिसका भुगतान समेकित रूप से 6800 रूपये का किया जा चुका एंव कार्य पूर्ण होने पर कार्य का मूल्यांकन कर सम्पूर्ण राशि मजदूरो के खाते मे भुगतान किया जाना है जिसमें उपयंत्री द्वारा मूल्यांकन नही किया जा रहा है ।
उपयंत्री बनी स्वंयभू
शिकायतकार्त की माने तो जनपद पंचायत करेली मे पदस्थ उपयंत्री द्वारा अपने आप को स्वंयभू मानकर बिना देखे कार्य मूल्यांकन करने से मनाकर दिया गया और मजदूरो के साथ – साथ किसान भी परेशान नजर आ रहा है मूल्यांकन ना होन के कारण कार्य का भुगतान नही हो पा रहा है । जिससे सरकार के दाबो पर पानी फिरता नजर आ रहा है । शिकयतकर्ता ने अतिशीघ्र मूल्यांकन करा कर भुगतान कराने की मांग की है ।
मनरेगा कार्य मे बाधा
जिले मे पदस्थ उपयंत्रियों की मनमानी के कारण जिले मे मनरेगा के कार्य भी अधर मे लटके हुये है मामला जिले की ग्राम पंचायत समनापुर का सामने आया है ऐसे ही अनेको ग्राम पंचायतो मे भी इसी प्रकार का आलम व्याप्त है और मनरेगा के कार्य अधर मे लटके हुये है । प्रशासन को चाहिये की ऐसे गैरजिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियो पर कठोर कार्रवाई करे जिससे जिले मे होने वाले मनरेगा के कार्य नियम अनूरूप हो सके व जिला प्रशासन की छवि भी धूमिल ना हो और कार्यो मे बाधा उत्पन्न ना हो सके ।
बिना फील्ड देखे कर दिया भुगतान ?
शिकायतकार्त की माने तो टीएस के बाद वर्क ओपन किया गया था वर्क ओपन होने के बाद जिओटैग किया एंव रोजगार सहायक द्वारा मस्टर जारी किया गया जिसमे सब इंजीनियर द्वारा 6800 रूपये का भुगतान किया जा चुका है । यदि 6800 रूपये का भुगतान फील्ड देखे बिना ही सब इंजीनियर द्वारा किया गया था एंव कार्य पूर्ण हो चुका है जिसक ा भुगातान उपयंत्री द्वारा मौका देखकर किया जाना चाहिये लेंकिन एक माह बीत जाने के बाद भी उपयंत्री मौके पर नही पहुंची और मूल्यांकन ना होन के कारण भुगतान अधर मे लटका हुआ है ।

इनका कहना है
उक्त मामले की जानकारी आपके द्वारा मुझे दी गई है सीएम हेल्प लाईन मे शिक ायत हुई तो उसकी नियम पूर्वक जांच की जावेगी एंव दोषियों पर उचित कार्रवाई की जोवगी ।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी
जनपद पंचायत करेली

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