जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

नीला घोड़ा बांका जोड़ा हत्थ विच बाज सजाये ने’’गुरूगोबिंद सिंह जयंती पर निकला भव्य नगर कीर्तन

जबलपुर दर्पण। देश की आन-बान-शान तथा सत्यधर्म व मानवता की खातिर अपने माता-पिता, चारों पुत्रों सहित सर्वंश बलिदान देकर विजयी राष्ट्र पताका फहराने वाले खालसा पंथ के सृजक तथा सिखधर्म के दसवें गुरू साहिब-ए-कमाल साहिब श्रीगुरू गोबिंद सिंह जी महाराज के पवित्र प्रकाशोत्सव गुरूपर्व के उपलक्ष्य में नगर के सिख धर्मावलम्बियों द्वारा आज अपरान्ह गुरूद्वारा प्रेमनगर से परम्परागत तरीके से एक भव्य, अनुशासनबद्ध, विशाल तथा बहु-आकर्षणों से युक्त नगर कीर्तन निकाला गया। बहुरंगी और विविधाकर्षणों से ओतप्रोत इस शोभायात्रा नगर कीर्तन का कैबिनेट मंत्री राकेश सिंहहरेंद्रजीत सिंह बब्बू, लवलीन काके आनंद जय लक्ष्मी पार्षद सहित विभिन्न धर्मावलम्बियों, संस्थाओं, व्यापारिक संघों एवं विभिन्न राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों सहित अनेक सभाओं ने नगर कीर्तन का पुरजोर स्वागत किया। वहीं हर जाति, हर वर्ग और धर्म के प्रबुद्धजनों ने शामिल होकर साम्प्रदायिक सद्भाव और मानवीय एकात्म की अनूठी छाप छोड़ी। अधिकांश श्रृद्धालु केसरी पगड़ियां और केसरी दुपट्टों में नजर आये।
श्रीगुरू सिंघ सभा गुरूद्वारा प्रेमनगर से मुख्यगृंथी साहिबान द्वारा सर्वत्र के भले की विशेष अरदास प्रार्थना के साथ ही जब यह परम्परागत तरीके से भव्य नगर कीर्तन आरम्भ हुआ तब उपस्थित साध संगतों ने ‘‘बोले सो निहाल सत्यश्रीअकाल’’ तथा ‘‘वाहेगुरू जी का खालसा: वाहेगुरू जी की फतह’’ इत्यादि धार्मिक जैकारे लगाकर आकाश गुजां-गुजां दिया। तदोपरान्त यह प्रेरक और अनुशासनबद्ध नगर कीर्तन ,साहिब श्रीगुरू गोविंद सिंह जी महाराज और अकालपुरूष परमात्मा की जय-जयकार करता हुआ तथा गुरूजी की पवित्र गुरवाणी का पूर्ण आस्था श्रृद्वा और भक्तिभाव के साथ यशोगान करता हुआ क्रमशः मदनमहल चौक, महानददा, शंकराचार्य चौक शारदा सिनेमा, आजाद चौक, गुलाटी चौक, गोरखपुर बाजार, सदर तिराहा, कटंगा, सदर आदि प्रमुख मार्गो का भ्रमण करता हुआ सायंकाल जब गुरूद्वारा सदर में समाप्त हुआ तब वहां उपस्थित श्रृद्धालु साधसंगतों ने मुक्ताकाश से पुष्पवर्षा कर अपनी श्रृद्वाभक्ति का इजहार किया। स्वर्णिम आभा से युक्त पालकी वाले वाहन के ऊपर से मुख्यग्रंथी सहिबान द्वारा नगर कीर्तन समाप्ती पर विश्वशान्ति और सर्वत्र के भले की विशेष अरदास-प्रार्थना की गई, इसके साथ ही गगनभेदी पत्रिव जैकारों और उद्घघोष के मध्य नगर कीर्तन का सोल्लास सानंद समापन हो गया।
समग्र जुलूस पथ में सर्वाधिक श्रृद्धा आस्था और जनाकर्षण का केन्द्र था वह स्वर्णिम आभा से युक्त पालकी वाला विशाल वाहन, जिसे हजारों भांति-भांति के पुष्पों, मालाओं और पुष्पगु़च्छों आदि से करीने से सजाया गया था तथा बीचोंबीच एक कलात्मक काष्ट पालकी में सिख धर्मावलंबियों के सर्वोच्च गुरू श्री गुरूग्रंथ साहिब जी का पावन प्रकाश किया गया था। यहां पर स्थान-स्थान पर रास्ते भर जहां एक तरफ श्रृद्वालुगण नतमस्तक हो मत्था टेक रहे थे वहीं दूसरी तरफ विभिन्न श्रृद्धालुगण हाथों में मिष्ठान एवं बताशे के थाल, रूमालों और पुष्पमालाओं के साथ गुरूग्रंथ साहिब के समक्ष प्रसाद अर्पण कर रहे थे। पालकी के दोनों तरफ हाथों में नग्न कृपाण धारण किये सेवादार पहरारत थे, वहीं वाहन के पार्श्व भाग में चारों तरफ से दर्जनों सेवादारों द्वारा मिष्ठान और बताशे का प्रसाद वितरित किया जा रहा था जिसे पाने हेतु श्रृद्वालुओं में होड सी लगी हुई थी। इस पालकी वाले वाहन के ठीक समाने मार्ग पर खालसा पंथ के प्रतीक एवं नेतृत्वकर्ता ‘‘पंज-प्यारे’’ नंगे पैर पैदल ही हाथों में नग्न कृपाण धारण किये, पीतवस्त्रों में आहिस्ता-आहिस्ता पथगमन कर रहे थे। अनेक श्रृद्वालुजन पंज प्यारों को पुष्पहार अर्पित कर दूध के प्याले भी पेश कर रहे थे। अनेकजन चरण स्पर्श कर स्वयं को धन्य कर रहे थे। पंज-प्यारों तथा पालकी वाले वाहन के पीछे जबलपुर नगर तथा उपनगरीय क्षेत्रों में विभिन्न गुरूद्वारों सभाओं तथा संस्थाओं के कीर्तनी जत्थे, लोकवाद्य यंत्रों- हारमोनियम, ढोलक, तबला, चिमटा तथा मंजीरें आदि पर गुरूजी की पवित्र वाणी- ‘‘वह प्रगट़यो मरद अगंमणा वरयाम अकेला, वाह वाह गोविंद सिंह आपे गुरू चेला’’ तथा चलों सिंघों चल दर्शन करिये, गुरू गोविंदसिंह आये ने, नीला घोड़ा बांका जोड़ा हत्थ विच बाज सजाये ने’’, आदि का मानों बेसुध होकर भक्तिभाव के साथ तन्मयतापूर्वक यशोगान कर रहे थे। इसके साथ ही गतकां दल ने वीररस से ओतप्रोत शस्त्र विद्या का अनूठा प्रदर्शन कर युद्ध के जीवन्त नजारे पेश किये। उत्साही नौजवान गतकां की शानदार प्रदर्शन कर रहे थे, लाठी तलवार और चक्रचालन विशेष आकर्षण का केन्द्र रहे। गतकां, भांगड़ा तथा अन्य अनेकों प्रस्तुतियां आकर्षण का केन्द्र थी। जुलूस के अग्र भाग में जहां उत्साही नौजवानों की घुड़सवार तथा वाहन सवार टोलियां उपस्थित थी, वहीं मध्यभाग में शहर के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित खालसा शालाओं के हर वर्ग, धर्म और मजहब के छात्र-छात्रायें ड्रिल, पीटी, लेझिम, डांडिया, एनसीसी, गाइड एवं भांति-भांति के नृत्य प्रस्तुत करते हुए दृष्टव्य थे, अनेक बच्चे हाथों में सद्भावना एकता तथा मानवता से ओतप्रोत गुरूवाणी के बैनर लिये चल रहे थे। अनेक शालाओं द्वारा नीले एवं पीले वस्त्रधारी बाल पंज प्यारे भी प्रस्तुत किए गए थे, वहीं कुछ शालाओं द्वारा बाल बैंड दल भी मन को लुभा रहे थे। इसके अलावा शहर के नामी गिरामी बैंड दल धार्मिक धुनें गुंजा कर धर्ममय वातावरण निर्मित कर रहे थे। समूचा नगर कीर्तन पथ जहां मनमोहक, बन्दनवारों, स्वागत द्वारों एवं स्पीकरों से अटा पड़ा था वहीं अनेक जत्थों द्वारा श्रृद्वालुओं हेतु जल, दूध, चाय, खीर, पुलाव तथा मिष्ठान आदि के स्टाल भी लगाये गये थे। श्रृद्धालुओं खासकर नौजवान युवक-युवतियों द्वारा समूचा सड़क मार्ग झाडू से बुहार कर पानी से सींचकर गेंदा के फूलों से निरन्तर पाटा जा रहा था। इसके बाद पंज प्यारे साहिबान और पालकी वाला वाहन आगे बढ़ रहे थे।
नगर कीर्तन में पूरे मार्ग में लगभग हर 100वें कदम पर किसी न किसी संस्था और श्रृद्वालुओं द्वारा मिष्ठान और प्रसाद बांटा जा रहा था। यहां शामिल बच्चों और शिक्षकों ने इसका भरपूर आनंद उठाया और बच्चों ने जेबों और थैले में मिष्ठान रख लिया। गुरूपर्व समिति के प्रबंधकगण प्रधान स. नक्षत्रसिंह, प्रभजोतसिंह, कुलवन्तसिंह, लखवीरसिंह, हरजीतसिंह सूदन, पं. मदन दुबे, , हरइन्दरसिंह रेखी व गणमान्यजन एवं समस्त गुरूद्वारों के प्रधानों का विशेष योगदान रहा। 17 जनवरी को रांझी एवं 21जनवरी को प्रेम नगर मदन महल प्रांगण में प्रकाशोत्सव के रूप में श्रीगुरूगोबिंद सिंह जयंती मनाई जाएगी ।

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